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अख़लाक़ अहमद ज़ई

Tragedy

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अख़लाक़ अहमद ज़ई

Tragedy

नौकरी

नौकरी

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 बंगले में घुसने से पहले उसने एक बार फिर समझाया--

"देखो, वार्ड ब्वाय की जगह खाली है। बोलना- ऐसा मैंने सुना है। फिर अपना क्वालीफिकेशन बताना और पद देने की विनती करना। वह बहुत घाघ है। आनाकानी करेगा लेकिन तुम बातों-बातों में लेन-देन की बात कर देना। एक बात का ध्यान रखना, यह सीएमओ बिना पैसे के कोई काम नहीं करता है।… उसका गार्डन में घूमने का समय हो रहा है। फौरन पीछे लग जाना। मैं बाहर ही रुकता हूँ। तुम अकेले मिलकर आओ।"

मैं अन्दर जाने के लिए बढ़ चला। वह वहीं गेट के बाहर रुक गया। मैंने चपरासी से पूछा तो मालूम हुआ-साहब अभी सो रहे हैं।

एक घंटे के बाद सीएमओ बाहर आया। मैं झट नमस्ते कर, उसके साथ हो लिया। उसने बिना रुके पूछा-

" कैसे?"

" सर, मैंने सुना है कि आपके हास्पिटल में वार्ड ब्वाय की जगह खाली है। मैंने बीएससी की है। अगर वह पद मुझे…।"

"नहीं, ऐसा कोई पद खाली नहीं है।"

"लेकिन सर…।" एक बार फिर मैं रिरयाया।

"मैंने कहा न! ऐसा कोई पद खाली नहीं है।" उसने सख्ती से मना किया।

मैंने एक बार अपनी सारी हिम्मत इकट्ठी की और तपाक से कह डाला --

" सर, अगर पैसे की बात है तो जो बोलें, मैं पूरी कोशिश करुंगा।"सीएमओ ने एक बार घूर कर देखा।

"बंगले से बाहर निकलो। निकलो, नहीं तो चपरासी से धक्के देकर निकलवाऊंगा।" वह चिल्ला उठा।

 मैं बंगले के कंपाउंड से बाहर आ गया। वह बाहर ही खड़ा था। झपटकर करीब आया और पूछा -

  " क्या हुआ?"

  मैं रुआसा हो गया। गला रूंध गया।

  "यार, आज तक ऐसी जिल्लत नहीं उठायी थी लेकिन आज इस नौकरी के लिए…।"

  " किसी शरीफ आदमी को गुंडों, डकैतों, जिन्हकारों-बदकारों के हाथों जलील होते देखा है?… ऐसे लोगों से नौकरी पाना इसी श्रेणी में आता है। और इसका अभ्यस्त हुए बिना नौकरी नहीं मिलने वाली।… नौकरी करनी है?"

उसने शायद आखिरी निर्णय पूछा।

" हां, करनी है।"

" फिर ठीक है। एक बार फिर कोशिश करेंगे। इस बार नौकरी पक्की समझो।"

            



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