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Bhavna Thaker

Romance

4.0  

Bhavna Thaker

Romance

मुझे बस तुमसे इश्क है

मुझे बस तुमसे इश्क है

21 mins
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आज एक नाम गूँज रहा है मोडेलिंग की दुनिया में कालिंदी वर्मा का,

हर न्यूज़ पेपर, हर मेगज़िन के कवर पेज पर तेज नैंन नक्श वाली ३६-२४-३६ की परफेक्ट कमनीय काया वाली, बोलने में तेज़ तर्रार, बिंदास अदाएँ, हर जवाँ दिलों की धड़कन कालिंदी ही छाई है।

हर बड़ी मोडलों से छीनती जा रही है विज्ञापन हर ब्रांड की चहीती कालिंदी।

आज सुबह-सुबह टाईम्स ऑफ इन्डिया के फ्रन्ट पेज पर अपनी सेक्सी तस्वीर देककर सोच रही है कालिंदी क्या ये वही कालिंदी है ? जो कभी खुद के श्याम रंग से ग्रसित खुद के ही मन के उत्पीड़न की शिकार एक कौचले में छूईमुई सी श्याम रंग ओर कमज़ोर मानसिकता के दायरे में सिमटी पड़ी थी।

पिछले कुछ सालों का सफ़र आँखों के सामने गुज़रने लगा, कैसे खुद को एक पिछड़ी हुई आम सी, काली कलूटी समझ कर काले रंग को अभिशाप मानती एक आशंका से घिरी रहती थी। मानों उसे देखने वाला हर इंसान उसका उपहास किए जा रहा है।

वीना ओर संजय की इकलौती संतान थी कालिंदी जब जन्मी तो दोनों बहुत खुश थे वीना का रंग गेहूँआ है पर संजय थोड़ा श्याम वर्ण,कालिंदी बिलकुल संजय पर गई थी, तो संजय की माँ कालिंदी की दादी ने बोला जमुना जी जैसी श्यामा मेरी बच्ची है, तो नाम भी रखेंगे कालिंदी, जो कोई देखता कालिंदी को यही बोलता त्वचा कितनी मख़मली, चमकती है नैन नक्श भी तीखे बस एक रंग श्याम, अगर गोरी होती तो क्या बात होती, पर माँ बाप को तो उसकी संतान जैसी भी हो अज़ीज़ होती है तो दोनों बड़े ही चाव से कालिंदी को पाल रहे थे।

पर जैसे-जैसे कालिंदी बड़ी होती जा रही थी उसके ज़हन में गोरे रंग का प्रभाव हावी होता जा रहा था। किसी भी गोरी लड़की को देखती तो खुद को छोटा ओर बौना महसूस करती, ओर तो छोड़ो कहीं आने जाने से भी कतराने लगी कहीं भी जाना होता था तो कोई न कोई बहाना बनाकर टाल देती , अकेले में छुपकर रो भी लेती, पढ़ने में बहुत तेज थी अब तो १२ पास कर लिया काॅलेज में संजय ने एडमिशन करवाया तो कहने लगी पापा में एक्सट्रनल कर लूँगी काॅलेज नहीं जाना।

पर वीना ओर संजय ने समझा बुझाकर मना लिया, काॅलेज में सब सजधज कर आते थे एक कालिंदी थी जो सीधे सादे तरीके से बस सिर्फ़ पढ़ाई के लिए जाती थी, ज़्यादा किसीसे बात नहीं करती उसे हंमेशा ये लगता की वो किसीके काबिल नहीं।

पर एक लड़का था राजवीर उसे कालिंदी की सादगी बहुत भाति थी,

एक दिन हिम्मत करके राजवीर ने कालिंदी से हाय हैलो करके बातचीत की राजवीर पढ़ने में अव्वल था स्पोर्ट्स ओर दूसरी एक्टिविटी में भी आगे कालिंदी शुरु में संकोचवश बहुत कम बोलती थी पर राजवीर के विनोदी स्वभाव ने कालिंदी को थोड़ा मुखर किया।

दोनों अच्छे दोस्त बन गए, ना ओर कोई अट्रेक्शन नहीं था बस दोनों को एक दूसरे की कंपनी अच्छी लगती थी, फिर तो काॅलेज टाईम के बाद भी दोनों मिलने लगे एक दूसरे के घर आने जाने लगे, मूवी, शोपिंग हर जगह साथ पर राजवीर ने नोटिस किया की कालिंदी अब भी एक दायरे में बँधी खुद को समेटे अंदर ही अंदर किसी लघुभाव में जी रही थी।

काॅलेज का साल खतम होने को था तो एन्युअल फंक्शन की तैयारियाँ हो रही थी, राजवीर ने बहोत सारी एक्टिविटी में पार्ट लिया था, कालिंदी बस चुपचाप रिहर्सल देखने जाती सब बहुत उत्साह से प्रेक्टिस कर रहे थे।

एक दिन राजवीर किसी काम से अचानक कालिंदी के घर आ गया, कालिंदी अकेली थी ओर रसोई में कुछ काम करते करते गुनगुना रही थी हमको हमीं से चुरा लो दिल में कहीं तुम छुपा लो, राजवीर पीछे खड़ा चुपके से सुन रहा था। कालिंदी बहुत ही सुंदर राग में गा रही थी ओर आवाज़ भी घंटीयों सी सिल्की राजवीर बोला हैलो मैडम आपका ये हुनर तो हमें आज ही पता चला..! वाह क्या आवाज़ है तुम काॅलेज के फंक्शन में गीत गाओगी बस।

कालिंदी तो शरमाकर नतमस्तक सी खड़ी रही ओर बोली अरे नहीं मैं कहाँ इस काबिल, ओर इतने सारे लोगो के सामने मुँह कैसे खुलेगा, ना बाबा ये मेरा काम नहीं ओर वहाँ कितनी सुंदर लड़कियाँ पर्फोम कर रही है उसमें मैं काली कलूटी ना ना रहने दो।राजवीर ने कालिंदी के मुँह पर हाथ रख दिया ये आख़री बार खुद को काली कलूटी बोल रही हो ओके, तुम नहीं जानती तुम कितनी सुंदर हो, सिर्फ़ गोरी चमड़ी सबकुछ नहीं होती, तुम्हारा टेलेंट, तुम्हारा कोन्फिडेन्ट, तुम्हारी वाक्छट्टा तुम्हें सुंदर बनाती है। इस श्याम रंग के दायरे से बाहर निकलकर देखो खुद को पहचानों ओर अपने हुनर से तराशो खुद को, तुम बेमिसाल हो। कालिंदी फटी आँखों से राजवीर को सुन रही थी।

कुछ काम से आया था राजवीर वो भी भूल गया आज उसने ठान लिया कालिंदी को खुद से खुद की पहचान करवानी ही होगी एक श्याम रंग के डर ओर छोछ ने कालिंदी को कुँएँ का मेढ़क बनाकर रख दिया है।

शाम को रिहर्सल में मिलते है ओर हाँ तब तक तुम सोंग पसंद कर लो कौनसा गाओगी..! बाय करते राजवीर निकल गया कालिंदी के मन में एक कश्मकश छोड़कर, राजवीर के जाते ही कालिंदी आईने के सामने जाकर खड़ी रही, कुछ देर अपलक खुद को निहारती रही, हाँ नैन नक्श तो कटीले है, होंठों का शेइप सुंदर है, आँखें काली नशीली सूरमेदानी सी, बस कुछ मेकओवर की कमी है चलो मेकओवर तो ब्यूटी पार्लर वाले कर देंगे पर इस रंग का क्या करुँ। वापस घुम फिर के रंग पर आकर कालिंदी की सोच अटक जाती, शाम होते ही स्कूटी निकालकर काॅलेज पहूँच गई राजवीर रिहर्सल में बिज़ी था तो कालिंदी एक बैंच पर बैठकर चुपचाप देखने लगी राजवीर कितना कोन्फ़िडेन्ट है, हर रंग में बखूबी ढ़ल जाता है। काश की मुझे उपर वाले ने टेलेंट के साथ थोड़ा गोरापन भी दिया होता तब मुझमें भी इतना ही आत्मविश्वास होता।

राजवीर की चुटकी ने जैसे नींद से जगाया हैलो मैडम तैयार हो ना अपने परफोर्मेंस के लिए ? राजवीर ने पूछा तो कालिंदी चौंक गई ओर बोली राजवीर रहने दो ये मेरे बस की बात नहीं, मैं नहीं कर पाऊँगी पर ये तो राजवीर था जो ठान लेता है वो करके रहता है सीधा स्टेज पर जाकर माईक हाथ में लेकर एनाउंस ही कर दिया।

जी हाँ दोस्तों आज हमारे बीच एक एैसी कलाकार है जो बहुत ही सुंदर आवाज़ की मालकिन है, आपके सामने एक गीत पेश करना चाहती है तो प्लीज़ तालियों के साथ मिस कालिंदी वर्मा का स्वागत किजीए। कालिंदी सकपका गई डर ओर जीजक के मारे पर एनाउंस हो चुका था तो झुटला नहीं पाई, धीरे से स्टेज के उपर चढ़ते पैर काँप रहे थे की राजवीर ने हाथ बढ़ाया ओर आँखों से रिलेक्स रहने का इशारा करते हुए माईक थमा हिया, ओर धीरे से कानों में बोला तुम आँखें बंद करके गाओ तुम्हें कोई नहीं दिखेगा।

सबकी नज़रे खुद पर पाकर कालिंदी नर्वस हो गई पर राजवीर ने थम्स अप करके हौसला बढ़ाया तो कालिंदी ने गाना शुरु किया,

बिती ना बिताई रैना बिरहा सी हाए रैना, इतनी मधुर आवाज़ थी की सब मंत्र मुग्ध हो गए हाॅल में सन्नाटा छा गया, गीत पूरा होने पर भी किसीकी आवाज़ ना सुनाई दी तो कालिंदी ने आँखें खोली ओर धीरे से पूछा लगता है किसीको गाना पसंद नहीं आया, कालिंदी की आवाज़ ने सबको जगाया ओर तालियों की गूँज से पूरा हाॅल भर गया।

सब वाह वाह पुकार उठे बहुत तारिफ़ की सबने कालिंदी को विश्वास नहीं हो रहा था पर यही सच था, उसने राजवीर की ओर अहसान जताती नज़रों से देखा तो राजवीर ने आँखें दिखाकर हंस दिया।

घर आकर मम्मी पापा को बताया तो वीना ओर संजय भी बहुत खुश हुए।

आज कालिंदी खुश थी थोड़ा सा आत्मविश्वास जगा था, दूसरे दिन ब्यूटी पार्लर जाकर फेस क्लीन अप करवाया, थोड़े हेयर कट ओर आईब्रोस करवाकर तो पूरा लूक ही बदल गया फिर भी मन के एक कोने में खराश रह गई काश की थोड़ी गोरी होती।

फिर भी आज दिल में एक अजीब ही आनंद था घर आई तो मम्मी पापा तो कालिंदी के नये रुप को देखते ही रह गये दूसरे दिन काॅलेज भी थोड़े आत्मविश्वास के साथ गई आज लग रहा था मानों सब उसे ही देख रहे है, पर एक अलग ओर प्यार भरी नज़रों से, अब खुद का नज़रिया बदला तो सबकुछ बदला हुआ लग रहा था।

दूर से राजवीर को आता देखकर दौड़ती हुई आज पहली बार सामने से मिलने गई राजवीर एकटूक कालिंदी को देखता ही रहा फिर बोला that's like my beautiful friend वाह क्या लग रही हो। कालिंदी ने सिर्फ़ इतना ही कहा credit go's to u.

राजवीर ने बोला कालिंदी आज में तुम्हें कुछ दिखाना चाहता हूँ काॅलेज के बाद मेरे घर चलेंगे तुम्हारी मम्मी को फोन करके बोल देना की तुम देर से आओगी।

कालिंदी ने ओके बोस बोलकर घर पर फोन लगाया,

काॅलेज खतम होते ही दोनों राजवीर के घर आए, राजवीर की मम्मी ने दोनों को खाना खिलाया फिर राजवीर ने कुछ सीडी होम थिएटर में लगाई, जिसमें बड़ी बड़ी मोडेल्स दिखाई जिसकी त्वचा श्याम ओर गेहूँआ थी फिर भी कोन्फीडेन्स के साथ रेम्प वोक कर रही थी।

कालिंदी बोली पर ये सब तुम मुझे क्यूँ दिखा रहे हो मुझे कहाँ मोड़ेल बनना है,

राजवीर बोला मोडेल चाहे ना बनो पर कम से कम तुम्हारे दिमाग में जो चमडी के रंग को लेकर बवंडर उठता है ना उसे शांत करो। देख लिया ना रंग कोई मायने नहीं रखता ओर तुम मोडेल क्यूँ नहीं बन सकती..! अच्छी हाईट है, फिगर है, नैन नक्श कातिल है मैडम बस थोड़े ग्रूमिंग की ज़रुरत है कुछ भी नामुमकिन नहीं, बस थोडी हिम्मत ओर आत्मविश्वास बढ़ाओ मिशाल बनकर दिखा दो गोरे लोगों को।

कालिंदी थोड़ी सोच में पड़ गई फिर बोली देखूँगी अभी तो पूरा ध्यान पढाई में लगाना है।

राजवीर ने बोला पढ़ाई में तुम अव्वल हो बस एक्ज़ाम्स के वक्त मेहनत कर लेना साथ-साथ तुम ग्रूमिंग क्लासिस ज्वाॅइन कर लो दो काम साथ में हो जाएँगे।

कालिंदी को भी अब लगने लगा की अगर ज़िंदगी में कुछ बनना है तो हिम्मत भी करनी होगी ओर आत्मविश्वास भी बढ़ाना होगा, कालिंदी ने आज पहली बार राजवीर के हाथ पकड़ लिए ओर बोली तुम मेरे सबसे प्यारे दोस्त हो आज तुमने मुझे एक रास्ता दिखाया है, बस अब उस रास्ते पर आगे बढ़ना मेरा काम है ओर तुमने जो मेरे उपर भरोसा दिखाया है मैं उसे टूटने नहीं दूँगी, thanks for SAPPORT,

राजवीर ने भी कालिंदी का हाथ थाम लिया ओर बोला I m always with you go ahead, best of luck..

कालिंदी ने अब श्याम रंग को मकसद बना लिया जीने का जी जान से लग गई खुद को तराशने में, पढ़ाई के साथ-साथ हर उस इवेंट की डी वी डी देखती रहती जिसमें गेहूँए रंग वाली लड़कियों ने मोडेलिंग की ऊँचाइयों को अपने आत्मविश्वास से आसमान छू लिया था, साथ में ग्रूमिंग क्लास ज्वाईन कर लिए, फ़ेशन जगत की हर छोटी बड़ी ख़बर से माहितगार रहने लगी चलना, उठना, बैठना, खाने पीने के तौर तरीकों से लेकर कपड़े की चोईस तक बदल ली।

मानों कालिंदी का नया जन्म हुआ था, उसे देखने वाला हर कोई अचंभित था की क्या ये वही कालिंदी है जिसे सब श्याम रंग वाली सामान्य लड़की समझ रहे थे, खासकर राजवीर बहुत खुश था आख़िरकार उसकी मेहनत रंग ला रही थी।

वीना ओर संजय की खुशी का ठिकाना नहीं था अपनी बेटी के परिवर्तन को देखकर दोनों फूले नहीं समा रहे।

अब तो ग्रेजुएशन भी ख़तम हो गया तो राजवीर ने कालिंदी को अपनी कुछ तस्वीरें खिंचवाने के लिए मना लिया। ओर उसका दोस्त जो मोडेलिंग फोटोग्राफी का एक्सपर्ट था ज़ुत्सी डिसूज़ा उसने कालिंदी की एक से बढ़कर एक तस्वीरें निकाली ओर कालिंदी ओर उसके मम्मी पापा की परमिशन लेकर मुंबई में अपने कोन्टेक में जो एड एजेंसी थी वहाँ भेज दी।

कुछ ही दिनों में मुंबई से कालिंदी को बुलावा आ गया एक ब्रांड की मोडेलिंग के लिए, कालिंदी पहले तो हिचकीचाई मुंबई जैसे बड़े शहर में कैसे मेनेज कर पाएगी, पर राजवीर ने हौसला बढ़ाया की ये तो तुम्हारे करियर की पहली सीढ़ी है ओर मैं तुम्हारे साथ हूँ बस तैयारी करो मैडम अब तो तुम्हें अपनी बाँहों में पूरा आसमान भरना है।

ओर कुछ ही दिन में सारी तैयारियों के साथ कालिंदी ज़िंदगी के नये सफ़र पर मंज़िल की तलाश में राजवीर का हाथ थामें निकल पड़ी मोहनगरी मुंबई की ओर।

राजवीर के चाचा चाची मुंबई में अकेले रहेते है उसकी कोई संतान नहीं थी तो राजवीर को ही अपना सबकुछ मानते है, तो बस कालिंदी ओर राजवीर वहीं चले गए। चाचा-चाची भी खुश हो गए अकेलेपन में अगर कोई आ जाए तो सुकून मिलता है, कालिंदी के लिए सबकुछ नया था इतना बड़ा शहर, नया माहौल, नया काम मन में एक गडमथल लिए सोच रही थी तस्वीर देखकर तो सिलेक्ट हो गई थी रुबरु देखकर कहीं रिजेक्ट ना कर दें, ये रंग कहीं मेरी करियर का दुश्मन ना बन जाए।

राजवीर की चुटकी की आवाज़ ने तंद्रा तोड़ दी हैलो मैडम फिर से पुरानी गलियों में खो गई क्या ?

उफ्फ़ ये तुम्हारा रंग के पिछे पड़ जाना रंग को भी परेशान करता होगा बेचारा देखो ओर काला हो गया।

ओर दोनों हंस पड़े राजवीर ने बोला आज शाम ५:०० बजे डायरेक्टर ने बुलाया है रेड्डी रहना ,

कालिंदी ओके बोस बोलकर तैयारी में लग गई कहाँ ५ बज गए पता ही नहीं चला। टिपटोप तैयार होके जब कालिंदी निकली तो राजवीर देखता ही रह गया, आज पहली बार कालिंदी के प्रति दोस्ती से विपरीत मोह जग रहा था। पर राजवीर ने आँखें झटक ली कालिंदी की निगाहों ने राजवीर की हरकत को पकड़ लिया, पर जाने की जल्दी थी तो कुछ ओर प्रतिक्रिया ना देते हुए दोनों चाचा जी की गाड़ी लेकर स्टुडिओ की ओर चल पड़े।

आलिशान बिल्डींगे, इंसानों का मेला पता नहीं कौन किधर जा रहा है सब इतने जल्दी में दिख रहे थे कालिंदी को लगा लोग साँस भी लेते होंगे या नहीं इतनी फास्ट लाईफ बाप रे मैं कैसे रह पाऊँगी इस चकाचौंध कर देने वाली ज़िंदगी में।

खयालों में ही कब स्टुडिओ आ गया पता ही नहीं चला। लोगों की भीड़भाड़ ओर चकाचौंध कर देने वाली लाईट्स के बीच राजवीर ओर कालिंदी पहूँच गए एड डायरेक्टर मिस्टर जय रतनानी जी के पास जो काम में व्यस्त थे,

६ फूट की हाईट, सर पर कैप, हाथ में सिगार, लाइट, एक्शन, कैमरा की आवाज़ से स्टुडिओ गूँज रहा था बहुत सारी मोडेल्स यहाँ वहाँ घूम रही थी, उसमें कुछ का रंग कालिंदी से मिलता था पर रंग को मायने ना देती सब बिंदास एक आत्मविश्वास के सात पोज़ दे रही थी, उन सबको देखकर कालिंदी में एक जोश भर गया, ओर खुद को मानसिक तौर पर तैयार कर लिया ज़िंदगी के इस नये इवेंट के लिए।

कुछ ही देर में एक स्पोटबोय ने कालिंदी को कहा ओफिस में सर आपको बुला रहे है, कालिंदी ने राजवीर का हाथ जोर से थाम लिया जैसे पहली बार स्कूल जाते समय बच्चा अपनी माँ का थामता है, राजवीर ने कालिंदी का गाल थपथपाकर आश्वासन दिया डरो मत तुम्हारा पूरा फोकस अब काम पे दो मैं हूँ ना तुम्हारे साथ।

कालिंदी ने लंबी साँस ली ओर टेंशन को अलविदा कहा ओफिस में जाते ही कालिंदी ने नमस्कार करके जय रतनानी से जिस कोन्फिडेन्स के साथ हाथ मिलाया उसे देखकर राजवीर हैरान रह गया, उसे वो कालिंदी याद आ गई जिसे पहली बार देखा था, मिला था आज कालिंदी के नये रुप को देखकर अच्छा लगा राजवीर को।

जय रतनानी ने कालिंदी को नखशिख देखा ओर बोला ब्यूटीफुल फिगर, एन्ड योर बोडीलेंग्वेज ओलसो आई एम इम्प्रेस्ड ,थोड़ी औपचारिक बातें हुई ओर कुछ पेपर साईन करके शुटिंग का लोकेशन बताकर रविवार को वापस बुलाया। आज गुरुवार था तो दो दिन दोनों फ्रि थे मस्त घुमते रहे दोनों,

आज तक दोनों में कोई दूरी नहीं थी बिंदास एक दूसरे का हाथ थाम लेते थे, छू लेते थे छेड़छाड़ कर लिया करते थे,

पर राजवीर पता नहीं दो दिन से कालिंदी से एक दूरी बनाए खिंचा-खिंचा सा रहने लगा था मन में एक अजीब ही भाव उठ रहे थे कालिंदी के प्रति, पर ज़ाहिर नहीं कर रहा था, कालिंदी ने महसूस किया पर कुछ निष्कर्ष पर नहीं पहूँच पा रही थी, कुछ तो है राजवीर के मन में पर चलो आराम से पूछूँगी सोचकर रुक गई।

शनिवार पूरी रात कालिंदी सो नहीं पायी एक उन्माद ओर डर के मिश्रित भावों ने घेर लिया था क्या होगा कल पता नहीं क्या इस नये रूप में ढ़ल पाऊँगी मैं क्या लोग मुझे पसंद करेंगे की घर वापस जाना होगा भगवान जाने इन लकीरों में क्या छुपा है देखते ही देखते रविवार की सुबह ने आगाज़ दे दिया सुबह ६ बजे बगैर अलार्म के ही उठ गई कालिंदी पहले खुद नहाकर तैयार हो गई फिर राजवीर को जगाया ९ बजे निकलना था तो अभी समय था ओर लोकेशन भी नज़दीक था तो टेंशन नहीं थी राजवीर अप टु डेट कालिंदी को तकता रह गया दिन ब दिन कालिंदी ओर निखर रही थी उसका नया रूप राजवीर को बेचैन कर जाता था पर मन को टपार लेता था कालिंदी के करियर का सवाल है ओर खुद को भी तो कुछ बनकर दिखाना है , कुछ समय बाद दोनों सेटल हो जाएँ फिर आराम से बताऊँगा अपने दिल की बात ये सोचकर रुक जाता,

कालिंदी को कुछ शक तो हुआ पर राजवीर को आहत करना नहीं चाहती थी ओर सोचती भी की क्या पता ये शायद मेरा वहम ही हो ,

८:३० बजे नाश्ता करके दोनों निकल गये २० मिनट में पहूँचे गये समुन्दर किनारे एक छोटा सा बीच था खुली जगह ओर कुछ नारियल के पेड़ दरिया की साफ़ सुथरी लहरों का शोर मन को प्रफुल्लित कर गया पाँच मिनट में ही रतनानी साहब अपने पूरे काफले सहित आ गए हैलो ब्यूटीफुल कालिंदी हैलो हेन्डशम वीर हाउ आर यू बोथ कहकर उष्मा से दोनों से हाथ मिलाया कालिंदी को थोड़ा सहज करने के लिए गाल पर थपकी लगाते बोले बहुत प्यारी लग रही हो , anyways चलो काम पर लगते है राजु मैडम के कोस्चुम निकालो गाड़ी से ओर कालिंदी आज आपकी कुछ फोटो शूट होगी अलग-अलग कोस्च्यूम में फिर जो स्यूट करेगी वही एड के लिए चूस करेंगे ,

कालिंदी थोड़ा हिचकिचाई, तो रतनानी जी समझ गये ओर बोले डरो मत कोई टु पिस या बिकीनी नहीं पहनाऊँगा but u know थोड़ा बोल्ड तो बनना पड़ेगा अगर इस लाईन में आगे बढ़ना है पर मैं लड़कीयों की एक लिमीट से वाकिफ़ हूँ तो मेरी ओर से निश्चिंत रहो

कालिंदी ने राहत की साँस ली ओर रतनानी जी की वेनिटी वैन में कालिंदी एक के बाद एक कोस्च्यूम बदलती रही ओर पोज़ देती रही, जिस आत्मविश्वास से वो काम कर रही थी वो देखकर राजवीर तो खुश था ही रतनानी जी भी खुश हो गये weldone pretty girl u r so coperative n brilliant I m impressed काम खत्म होते-होते दोपहर के २ बज गए तो रतनानी जी बोले भै हमें तो अब जोरों की भूख लगी है चलिए किसी अच्छी सी होटेल में जाके खाना खाते है।

पास ही मैं पंचतारक होटेल थी वहाँ पहूँचे सब कालिंदी ने पहली बार ५ स्टार होटेल में कदम रखा था तो खुद की तकदीर पर भरोसा नहीं हो रहा था, कहाँ छोटे शहर से इस महालय में लाकर खड़ा कर दिया था आज खुशी के मारे आँखें नम हो गई तो राजवीर ने इशारे से पूछा क्या हुआ तो बस हौले से कुछ नहीं के इशारे में हंस दी,

घर पहूँचते ४ बज गया थके हारे दोनों सो गये।

अब कालिंदी धीरे धीरे इस माहौल ओर काम में ढ़ल रही थी तो राजवीर ने कालिंदी से बोला मैडम अब मुझे इजाज़त दो अब आप जानों आपका काम जाने, इस बंदे को भी अपने करियर पर ध्यान देना है आपका हुकूम हो तो कल निकलूँ घर जाने के लिए..!

कालिंदी ने भी खुशी खुशी हाँ कर दी अब वो खुद सब मेनेज करने में सक्षम थी तो राजवीर वापस घर आ गया।

कुछ ही समय में कालिंदी का नाम हो गया मोडेलिंग जगत में एक तो काम १०० % देती ओर स्वाभाव से शालिन कामियाबी दिमाग में नहीं चढ़ी थी तो सबकी चहिती बन गई,

हर ब्रांड कालिंदी को मोडेल के रूप में लेने के लिए मुँह मांगे दाम देने लगे, कालिंदी लाखों नहीं अरबों करोड़ों में खेलने लगी तो मुंबई में आलिशान अपार्टमेंट ले लिया ओर मम्मी पापा को भी बुला लिया , बीच बीच में राजवीर दो तीन बार मिलने आ गया।

राजवीर भी MBA करके एक बड़ी कंपनी में अच्छी पोस्ट पर लग गया था, राजवीर को लगा अब समय आ गया है की कालिंदी को दिल की बात बताई जाय पर एक डर भी लग रहा था कालिंदी आज एक सेलीब्रिटी बन गई है क्या वो जीवन साथी के रूप में मुझे स्वीकार करेगी क्या उसके मन में भी मेरे लिए वही फिलींग्स होगी ,कहीं उसकी लाईफ़ में कोई ओर तो नहीं आ गया होगा ,

कितने अनगिनत सवालों से घिरा राजवीर सोचने लगा कैसे बताऊँ कालिंदी को मन की बात एैसा करता हूँ उसका जन्मदिन आ रहा है इस महिने तो सरप्राइस दूँगा अचानक मुंबई जाकर जन्मदिन की बढ़िया पार्टी दूँगा फिर मौका देखकर बता दूँगा।

सोच ही रहा था की कालिंदी का काॅल आया हैलो राजवीर इस १५ तारीख़ को तुम्हें मुंबई आना है याद है की भूल गए मेरा जन्मदिन ? देखो कोई बहाना नहीं चाहिए ओर सुनो हीरो बनकर आना बुद्धुराम क्यूँकि रतनानी जी होटेल ताज में मेरे जन्मदिन पर ग्रांड पार्टी दे रहे है, साथ में कुछ सरप्राईस भी देना चाहते है तो बेबी कम ओन तैयारी शुरू करों।

जी हाँ देखते ही देखते कालिंदी २५ साल की हो गई १५ जून को जन्मदिन पर रतनानी जी बहुत बड़ी पार्टी दे रहे है ये सुनकर कालिंदी फूली नहीं समा रही, आज ५ जून तो हो गई बहुत कम समय बचा था तो कालिंदी तैयारियों में लग गई।

सारे जान पहचान वालों को बुलाना चाहती थी तो इन्विटेशन कार्ड से लेकर थीम क्या रखनी है, कौनसा आउटफिट पहनना है वगैरह में पड़ गई।

इधर राजवीर तय नहीं कर पा रहा था की क्या करें कालिंदी से अपने प्यार का इज़हार करें की ना करें क्या जवाब मिलेगा रतनानी जी कौनसी सरप्राइस देने वाले है ? कहीं रतनानी जी खुद तो प्रपोज़ नहीं करने वाले राजवीर की नींद उड़ गई, एक बार तो खयाल आया की अभी फोन करके कालिंदी को प्रपोज़ कर लूँ इससे पहले की कालिंदी किसी ओर की हो जाये पर फिर कुछ सोचकर काम में लग गया की मुंबई जाकर परिस्थिति के अनुसार फैसला करुंगा।

देखते ही देखते १५ तारीख़ आ भी गई सारे मेहमान आ गये पर राजवीर का कहीं पता नहीं कालिंदी की नज़रे राजवीर को ढूँढ रही थी,

शाम ७ बजे पार्टी थी दोपहर के ३ बज गये पर अभी तक राजवीर नहीं आया तो कालिंदी ने काॅल लगाया तो कवरेज क्षेत्र के बाहर दिखा रहे थे, कालिंदी अकुला उठी ये बुद्धु भी ना मेरी जान लेकर रहेगा करके राजवीर के घर पर काॅल लगाया तो नो रिप्ले हुआ, फिर राजवीर के चाचा जी के वहाँ फोन किया हर जगह से नो रिप्ले हुआ।

ये क्या हो रहा था आज कालिंदी बेचैन हो उठी राजवीर पर इतना गुस्सा आ रहा था की पूछो मत पर अब समय कम था ब्यूटी पार्लर वाली आ गई ५ बज गये अब खुद को तैयार होना था तो बेमन से मोबाइल पटककर चली गई तैयार होने, कभी बात नहीं करुंगी उल्लू से क्या समझता है अपने आप को ना आए मेरी बला से गुस्से से ज़्यादा तड़प थी तो आँखें छलक उठी पर खुद पर काबू पा कर मन को मना लिया।

६:३० बजे सारे मेहमान ओर मम्मी पापा के साथ ताज होटेल में कालिंदी की एन्ट्री होते ही कैमरास की फ्लेश झगमगा उठी पींक इवनिंग गाउन में कालिंदी बला की खूबसूरत लग रही थी, होंठों पर हंसी थी पर दिल रो रहा था राजवीर को याद करके,

क्या हुआ होगा क्यूँ नहीं आया किससे पूछूँ कुछ समझ नहीं आ रहा था..!

दिल में तूफ़ान उठ रहा था पर अब सीख गई थी कैमरा के सामने चेहरे के भावों को छुपाना,

७ बजते ही सारे मेहमान आ गये केक कटिंग का समय हो गया अब भी नज़रे इधर-उधर एक चेहरे की तलाश में भाग रही थी पर निराश हो कर लौट आई। रतनानी जी एक छोटा सा बोक्स हाथ में लिए पास ही खड़े थे, कालिंदी ने केक काटने के लिए छुरी उठाई ही थी की राजवीर ने परिवार ओर चाचा चाची सहित एन्ट्री मारी happy birthday to u happy birthday to dear kalindi happy birthday to u, कालिंदी का मन तो किया की सबको हटाकर सब छोड़ छाडकर दौड़ती हुई राजवीर के पास चली जाए, कान खींचे झगड़ा करे, रुठे, पर मेहमानों का खयाल करते जिजक गई पर चेहरे पर अचानक से रौनक आ गई ओर खुशी खुशी केक काटने पर ध्यान दिया।

केक कट होते ही ताज का आलिशान हाॅल तालियों के साथ happy birthday to kalindi ki आवाज़ से गुँज उठा कालिंदी ने सबको केक खिलाई , खुशी के माहौल में रतनानी जी की आवाज़ गुँज उठी लेडीज़ & जेन्टलमेन attention plz..

दोस्तों आज में एक एनाउन्समेन्ट करने जा रहा हूँ, ओर कालिंदी के आगे प्रपोजल की पोज़ीशन में बैठकर बोले कालिंदी I love u so much, will u marry me ? रतनानी जी के साथ-साथ सबको एक ही जवाब की आशा थी की कालिंदी ये मौका नहीं गँवाएगी, रतनानी जी की प्रपोज़ल सुनकर राजवीर नम आँखों से पीछे मूड़ गया,

सपनों का महल ध्वस्त होते अपनी आँखों से नहीं देखना चाहता था।

सारे हाॅल में सन्नाटा छा गया सब कालिंदी के जवाब के इंतज़ार में उत्सुक खड़े थे, पर ये क्या कालिंदी रतनानी जी को इग्नौर करती दौड़ती हुई राजवीर की तरफ़ भागी ओर शिद्दत से लिपट गई राजवीर से, सबके मुँह खुले रह गये की ये क्या हो रहा है कोई समझ नहीं पा रहा था।

राजवीर भी समझ नहीं पाया की क्या हुआ कुछ देर के बाद कालिंदी थोड़ी स्वस्थ होते ही पीछे मूड़ी ओर राजवीर का हाथ पकडकर सबके बीच में ले आयी, ओर रतनानी जी से दो हाथ जोड़कर बोली sir sorry to say but मैंने आपको उस नज़र से कभी देखा ही नहीं, आप बहुत अच्छे नेक ओर बेइंतहा जायन्ट पर्सनालिटी है आपको लाईफ पार्टनर के रूप में पा कर मैं धन्य हो जाती, पर एैसी किस्मत शायद किसी ओर की होगी मुझे माफ़ कर दीजिए, आँखें नम हो गई कालिंदी की,ओर बोली मेरे परिवार के प्यारे सदस्यों ओर मेरे प्यारे दोस्तों आज मैं आप सबको एक सरप्राईस देना चाहती हूँ बोलकर राजवीर के सामने प्रपोज़ करने पैरों को मोड़कर घुटनों के बल बैठकर एक हाथ आगे करके बोली राजवीर I love u so much, will u marry me ? अगर तुम मुझे अपने काबील समझते हो तो मैं अपनी पूरी लाईफ़ तुम्हारे साथ बिताना चाहूँगी।

मुझे तुम्हारे अहसास नहीं पता, तुम मेरे लिए क्या सोचते हो क्या महसूस करते हो ये भी नहीं जानती, बस इतना जानती हूँ की मेरे लिए तुम मेरे सबकुछ हो..!

अगर तुम मेरी ज़िंदगी में नहीं आते तो आज में जो कुछ हूँ वो नहीं होती।

एक सहमी सी ओर अपने रंग से ग्रस्त मानसिक तौर पर अपाहिज सी पड़ी होती उस छोटे से शहर में गुमनाम सी, तुमने मुझे तराशा है u r my everything बोलो ना इस पगली का प्यार मंज़ूर है तुम्हें ?

राजवीर खुद सरप्राईज़ देने वाला था पर यहाँ तो उल्टा हो गया खुद सरप्राईज़ हो गया, धीरे से कालिंदी का हाथ अपने हाथ में लेकर दूसरा हाथ सीने पे रखकर नतमस्तक सा आँखें बंद किए इतना ही बोला जो हूकूम मेरे आका, हम तो शिकार करने को आये थे पर शिकार होके चले,

ये बंदा अपना दिल आपके कदमों में बिछा रहा है कुबूल किजिए ओर कालिंदी को अपनी दो मजबूत बाँहों में उठाकर राजवीर खुशी से झूम उठा।

हाॅल में सन्नाटे के बीच सबसे पहले रतनानी जी की तालियों ने खामोशीयों को मुखर किया, ओर पूरा हाॅल अभिनंदन के सूर में तालियों से दो प्रेमी पंछी को नवाज़ते रहे,

कालिंदी की तंद्रा तोड़ते राजवीर ने अखबार अपने हाथ में लेकर एकबार फ़िर मजाक किया क्यूँ मैडम आज फिर श्याम रंग के साथ कौनसे सफ़र में खो गई थी ?

बंदा कब से आपकी खिदमत में काफ़ी लेकर खड़ा है।

कालिंदी ने बड़े ही प्यार से राजवीर को गले लगा लिया ओर पूछा क्या सच में तुम्हें मेरे रंग से कोई एैतराज़ नहीं ?

ओर राजवीर ने वही बात दोहराई मैडम रंग सबकुछ नहीं, आपकी अदाएँ काफ़ी है हमें लुभाने के लिए, तुम बहुत खूबसूरत हो मेरी आँखों में खुद को देखो जान जाओगी तुम क्या हो, "मुझे बस तुमसे इश्क है"।

तुमने तो श्याम रंग वाली बहुत सारी लड़कियों को नयी राह दिखाई है की हौसला ओर आत्मविश्वास हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं।

और एक दिन के दो अनजाने आज दो जिस्म एक जान हो गये।


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