STORYMIRROR

मेरा वजूद

मेरा वजूद

2 mins
985


बढ़े संघर्षों से स्त्री अपने वजूद को बचा पाती है, उसको पीछे धकेलने वाली कोई और नहीं स्त्री ही होती है। आज बड़े दिनों बाद मेरी एक फ्रेंड का फोन आया हम दोनों की पढ़ाई साथ-साथ हुई थी,

मैं पुराने ख़्यालों मेंं खो गई ...

शादी के बाद हम दोनों का कभी-कभी पत्र व्यवहार होता था।

वो अक्सर अपने वजूद की लड़ाई का ज़िक्र करती थी कि मैं कैसे संघर्ष कर रही हूँ ।

उसे सास ननद के साथ निर्वाह करना बड़ा कठिन था,

"उसकी योग्यता को उसके आत्मसम्मान को सिरे से नकारा जाता था ..अक्सर उसके मुंह पर ताना मारा जाता था..., अरे उसे क्या याद है, उसकी मां ने कुछ सिखाया ही नहीं ...।

हमारी मुलाकात होती तो ,वो नर्वस रहती मुझसे कहती मैं क्या करुं ?

कई सालों बाद उसका फोन आया नम्बर जाना पहचाना नहीं था उसने कहा मुझे पहचाना, मैंने आवाज़ से पहचान कर उसका नाम लेकर पुकारा।

मैंने कहा, कहाँ...थी ? इतने साल।

बस यार.....! अपने वजूद को बचाने के "संघर्ष"में लगी हुई थी।

मैंने पूछा आज कैसे याद आई मेरी, अरे,तुने कहा था ना कि अपने वजूद को बचाने के लिए अपने आत्मविश्वास को जागृत कर और कुछ ऐसा कर कि इन सबकी बोलती बंद हो जाए ...जो तुझे ख़ारिज करते हैं।

आज तेरी इस दोस्त का आर्टिकल छपा है न्यूज पेपर में पढ़ना और बताना कैसा लगा ?

फिर ख़ुशी-ख़ुशी बताती है, मेरी ननद का फोन आया था बधाई देने को ,लेकिन उसमें भी "कटाक्ष" था।भाभी "तुम कब से लेखिका बन गई ...।

मैंने हंसते हुए कहा, यही तो तेरी योग्यता साबित हुई है... अब तुझ को आगे बढ़ते जाना है....।

वेरी गुड....।


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Inspirational