मेरा सुपरमार्केट
मेरा सुपरमार्केट
"वाह सीमा! सब्जी का स्वाद कितना अच्छा है और सलाद कितना ताजगी भरा। तुम कौन से सुपर मार्केट से खरीदती हो? अपने एरिया में तो एक ही सुपर मार्केट है, लेकिन वहाँ की सब्जियों का स्वाद इतना ताजगी भरा नहीं होता है। तुम किसी दूर के सुपर मार्केट जाकर लाती हो क्या?"
सीमा के यहाँ किटी पार्टी में आई सखियों ने पूछा।
"असल में मेरे सुपर मार्केट की हर बात हटके है।"
"कोई नया सुपर मार्केट खुला है क्या?"
"यह सुपर मार्केट सूर्य की रोशनी से प्रकाशित रहता है, यह किसानों का सुपरमार्केट है, जो सड़क के किनारे अपनी टोकरियाँ लगाकर बैठते हैं। एक-दो घंटे में ही उनकी सारी सब्जियाँ और फल बिक जाते हैं। कोई कृत्रिमता नहीं, कोई लूटमार नहीं। जैसा दिखता है, वैसा बिकता है। वैसे गांव तो कभी जाते नहीं लेकिन इनकी सब्जियों का इतना आकर्षण है, कि इस बार की छुट्टियाँ हमने गांव में, खेतों में किसानों के बीच ही मनाने का निर्णय लिया है। तुम सब भी चाहो तो हमारी खुशियों में शामिल हो सकती हो।"
तुम्हारी खुशियों में तो शामिल होंगे ही, लेकिन सबसे पहले हम सब आज से ही इस सुपर मार्केट से फल और सब्जियाँ लेना शुरू कर देंगे।"
सभी सखियों ने एक स्वर में कहा।
