मौसी जी, आपको जेल क्यों नहीं हुई?
मौसी जी, आपको जेल क्यों नहीं हुई?
मौसी जी, आपको जेल क्यों नहीं हुई?
इस कहानी को समझने के लिए हमें लगभग 1980 के दशक में लौटना होगा और एक ऐसे ज़िले में जाना होगा जहाँ विकास एक-सा नहीं था।
ज़िले का एक हिस्सा शिक्षा, नौकरी और नई सोच की ओर बढ़ रहा था, जबकि दूसरा हिस्सा अब भी पिछड़ेपन, अशिक्षा और डर से बनी परंपराओं में जकड़ा हुआ था।
उसी ज़िले में दो बहनें थीं।
छोटी बहन सरोज अपेक्षाकृत विकसित इलाके में रहती थी,
जबकि बड़ी बहन कमला आज भी उसी पुराने सामाजिक ढाँचे में जीवन जी रही थी।
कमला के लिए लड़कियों की जल्दी शादी कर देना कोई अपराध नहीं, बल्कि समझदारी थी।
उसके दो बेटे और तीन बेटियाँ थीं।
सरोज ने अपने बेटे की शादी एक पढ़े-लिखे युवक से तय की थी—
दामाद का नाम था विक्रम।
वह फौज में नौकरी करता था, देखने में गोरा-चिट्टा, सधा हुआ और सोच में आधुनिक।
शादी के कुछ दिनों बाद कमला अपनी छोटी बहन के घर आई।
दामाद से बातचीत शुरू हुई।
कमला अपने परिवार के बारे में सहजता से बताने लगी—
“मेरे दो लड़के हैं और तीन लड़कियाँ हैं।”
उसके स्वर में संतोष था।
फिर वह बोली—
“अब मैं बिल्कुल निश्चिंत हूँ।
बेटों की शादी करनी बाकी है,
और लड़कियों की तो मैंने रहते ही कर दी।”
सरोज कुछ समझ नहीं पाई।
विक्रम भी चुपचाप सुनता रहा।
कमला ने आगे जोड़ा, जैसे कोई बड़ी उपलब्धि गिना रही हो—
“आजकल लड़की को ज़्यादा बड़ा करना ठीक नहीं होता।
डर बना रहता है—कब क्या गलत हो जाए।
इज़्ज़त का सवाल होता है।
इसलिए मैंने 13 साल की उम्र में ही उसकी शादी कर दी।
समय रहते काम हो गया।”
उसके चेहरे पर गर्व था।
कमरे में एक पल को सन्नाटा छा गया।
विक्रम ने शांति से उसकी ओर देखा और पूछा—
“मौसी जी, आपकी बेटी की उम्र 13 साल थी?”
कमला ने बिना हिचक सिर हिलाया—
“हाँ।”
विक्रम कुछ क्षण चुप रहा।
फिर बड़े संयत, लगभग काव्यात्मक लेकिन तीखे स्वर में बोला—
“और उसका पति 19 साल का था…”
वह रुका, फिर सीधे शब्दों में कहा—
“आपकी 13 साल की बेटी और 19 साल के दामाद—
दोनों ने मिलकर कानून तोड़ा है।
बस एक बात मेरी समझ में नहीं आती…”
उसने कमला की आँखों में देखते हुए पूछा—
“मौसी जी, आपको जेल क्यों नहीं हुई?”
कमरे में सन्नाटा और गहरा हो गया।
कमला पहली बार असहज हुई।
सरोज की नज़रें झुक गईं।
वह सवाल किसी एक औरत से नहीं था।
वह उस समाज से था,
जो डर को संस्कार, अपराध को समझदारी
और बच्चों की चुप्पी को इज़्ज़त कहकर ढँक देता है।
