माला के बिखरे मोती (भाग ७५)
माला के बिखरे मोती (भाग ७५)
लेकिन ईशा कुछ बोले, इससे पहले शांति भी वहाँ आ गई है। इस बार शांति का यूँ अचानक आना किसी को ख़ला नहीं है, क्योंकि आरती के अलावा सबको पता था कि शांति आज दोपहर में कोठी में आने वाली है।
इसके अलावा, माया भी अपने दोनों बच्चों अजंता और विजयंत को लेकर एक हफ़्ते के लिए आज दोपहर होने से पहले अपने मायके आ गई थी।
ख़ैर, शांति भी वहाँ आकर कुछ सेवकों के साथ ज़मीन पर गद्दे बिछाने में मदद करने लगी है। यह सब देखकर आरती हैरान तो रही है, लेकिन चूँकि आज उसकी तबियत थोड़ी ठीक नहीं है, इसलिए उसने ईशा का कुछ बोलने के लिए खड़े होने पर और ज़मीन पर गद्दे बिछाए जाने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। अब गद्दे बिछ चुके हैं।
ईशा: आज हम सबने कुछ फ़ैसला लिया है। आज हम सब महिलाएं अंताक्षरी खेलेंगी।
चाँदनी: हाँ, आज हमने सोचा है कि हम महिलाओं को काफ़ी समय से साथ बैठने का और क्वालिटी टाइम बिताने का मौक़ा नहीं मिला है। तो क्यों नहीं, आज ऐसा किया जाए!
देविका (हँसते हुए): बिल्कुल सही। इसके लिए अंताक्षरी से बेहतर और क्या हो सकता है भला!
भावना: सही बात है। इसलिए हमने शांति को भी आज दोपहर में यहाँ आने के लिए बोला था।
छाया: अब हम लोग कुल मिलाकर दस लोग हैं...मम्मी, आरती भाभीजी, भावना भाभीजी, चाँदनी भाभीजी, देविका भाभीजी, ईशा भाभीजी, माया दीदी, मैं, काया और शांति। तो हम दो टीमों में बँट जाएंगे और दोनों टीमों में पाँच पाँच खिलाड़ी हो जाएंगे।
काया: बिल्कुल सही। लेकिन किस टीम में कौन होगा, यह फ़ैसला कैसे होगा?
माया: मेरे पास इसका उपाय है। टीम ए में सभी भाभियाँ हो जाएं और टीम बी में मम्मी, मैं, छाया, काया और शांति हो जाएंगे।
शांति (हँसते हुए): नहीं माया दीदी। ऐसा मत करिए। वर्ना हमारी टीम बी हार जाएगी। क्योंकि चाँदनी भाभीजी और ईशा भाभीजी को बहुत सारे गाने मुंह ज़ुबानी याद हैं, क्योंकि ये दोनों भाभियाँ एकेडमी में रोज़ अलग अलग गानों पर डांस सिखाती हैं। बल्कि मैं तो यह कहूंगी कि चाँदनी भाभीजी और ईशा भाभीजी को एक साथ एक टीम में ही मत रखिए। ये दोनों भाभियाँ अलग अलग टीमों में होंगी, तो बैलेंस बना रहेगा।
शांति की यह बात सुनकर सभी महिलाएं ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी हैं। शांति ने अपना दिमाग़ इस बार भी बहुत इस्तेमाल किया है, लेकिन इस बार सही दिशा में। ख़ैर, शांति की बात को सुनकर अब माला बोली हैं।
माला: आज पहली बार शांति ने कुछ क़ायदे की बात की है। तो फिर ऐसा करते हैं। टीम ए में आरती, भावना, चाँदनी, छाया और शांति हो जाएंगी। टीम बी में मैं, देविका, ईशा, माया और काया हो जाएंगी। छाया और काया को भी हम एक ही टीम में क्यों करें! इन दोनों बहनों को भी बहुत सारे गाने आते हैं।
माला की इस बात पर सभी ने हँसते हुए हामी भर दी है। अब ज़मीन पर बिछे हुए गद्दों पर दोनों टीमें आमने सामने आकर बैठ गई हैं।
चाँदनी: तो चलिए, अब अंताक्षरी शुरू करते हैं। शुरुआत टीम ए से करते हैं। समय बिताने के लिए करना है कुछ काम...शुरू करें अंताक्षरी लेकर प्रभु का नाम। अब टीम ए को "म" अक्षर से गाना है।
आमतौर पर हर अंताक्षरी "म" अक्षर से ही शुरू की जाती है। शायद इसलिए शांति पहले से "म" अक्षर से गाना सोचकर आई थी। वह एकदम खड़ी हो गई है और "म" अक्षर से अपना गाना गाते हुए नाचने लगी है।
मैं निकला ओ गड्डी लेके...
मैं निकला ओ गड्डी लेके
ओ रस्ते पर ओ सड़क में...
एक मोड़ आया...
मैं उत्थे दिल छोड़ आया...
एक मोड़ आया...
मैं उत्थे दिल छोड़ आया...
रब जाने...
कब गुज़रा अमृतसर...
ओ कब जाने...
लाहौर आया...
मैं उत्थे दिल छोड़ आया...
एक मोड़ आया...
मैं उत्थे दिल छोड़ आया...
इस गाने शांति ने सन्नी देओल की स्टाइल में पूरी मस्ती के साथ जो डांस किया है, उसको देखकर सब हँसते हँसते लोटपोट हो गए हैं और ख़ूब तालियाँ बजाई हैं। लेकिन आरती अब भी थोड़ी गुमसुम सी बैठी हुई है। ख़ैर, ईशा अपनी टीम से बोली है।
ईशा: टीम बी, हमें "य" अक्षर से गाना है। जल्दी सोचो। अब माला ने गाना शुरू किया है।
ये शाम मस्तानी...
मदहोश किए जाए...
मुझे डोर कोई खींचे...
तेरी ओर लिए जाए...
ये शाम मस्तानी...
मदहोश किए जाए...
माला ने बैठे बैठे यह गाना राजेश खन्ना की स्टाइल में जो गया है, सभी ने ज़ोरदार तालियाँ बजाकर माला का हौसला बढ़ाया है और बहुत तारीफ़ की है।
छाया: अब हमें भी "ए" से या "य" से ही गाना है। जल्दी...जल्दी। अब भावना ने गाना शुरू किया है।
ये रातें...
ये मौसम...
नदी का किनारा...
ये चँचल हवा...
ये रातें...
ये मौसम...
नदी का किनारा...
ये चँचल हवा...
कहा दो दिलों ने...
कि मिलकर कभी...
हम न होंगे जुदा...
ये रातें...
ये मौसम...
नदी का किनारा...
ये चँचल हवा...
भावना की सुरीली प्रस्तुति पर सभी ने भरपूर तालियाँ बजाई हैं। अब टीम बी से देविका ने "व" अक्षर से गाना शुरू किया है।
वाह वाह रामजी...
जोड़ी क्या बनाई...
भैया और भाभी को...
बधाई हो बधाई...
सब रस्मों से बड़ी है जग में...
दिल से दिल की सगाई...
वाह वाह रामजी...
देविका अपने इस गाने पर माधुरी दीक्षित की तरह झूमकर नाची है। सबने ख़ूब तालियाँ बजाई हैं।
शांति (देविका की चुटकी लेते हुए): अरे वाह देविका भाभीजी, आप तो अंताक्षरी में भी भगवान राम को ले आई हैं।
शांति की इस बात का देविका ने बिल्कुल बुरा नहीं माना है। वह बस धीरे से मुस्कुरा दी है, क्योंकि अगर वह शांति को कुछ तीखा जवाब देती, तो इस समय माहौल ख़राब हो सकता था और आरती का मन बहलाने का प्लान ख़राब हो सकता था।
अब टीम ए से छाया ने "ज" अक्षर से गाना शुरू किया है।
जा जा जा कबूतर जा जा जा...
जा जा जा कबूतर जा जा जा...
पहले प्यार की...हो...
पहले प्यार की...
पहली चिट्ठी...
साजन को दे आ...
जा जा जा कबूतर जा जा जा...
जा जा जा कबूतर जा जा जा...
छाया के इस गाने पर भी सबने ख़ूब तालियाँ बजाई हैं। आरती अब भी चुपचाप है। अब टीम बी को भी "ज" अक्षर से ही गाना है। अब माया ने गाना शुरू किया है।
जाने कहाँ...
मेरा जिगर गया जी...
अभी अभी यहीं था...
किधर गया जी...
किसी की अदाओं पे...
मर गया जी...
बड़ी बड़ी अँखियों से...
डर गया जी...
जाने कहाँ...
मेरा जिगर गया जी...
अभी अभी यहीं था...
किधर गया जी... (क्रमशः)
