हँसता हुआ भूतिया बंगला
हँसता हुआ भूतिया बंगला
जब अजय छोटा था, तब उसने अपने दादाजी के द्वारा गाँव में ख़रीदे हुए बंगले के बारे में सुना था। वह वहाँ कभी गया तो नहीं था, लेकिन उसने किसी से सुना था कि वह बंगला भूतिया था।
अब अजय बड़ा हो गया था और सब दूसरे शहर आकर बस चुके थे। एक दिन वह दादाजी से उस बंगले के बारे में पूछ बैठा।
तब अजय के दादाजी ने बताया,
"अजय बेटा, मैंने जिस व्यक्ति से यह बंगला ख़रीदा था, उसका नाम ठाकुर वीरेंद्र सिंह था। उसका बेटा पुष्पेंद्र चार्ली चैपलिन का बहुत बड़ा प्रशंसक था। पुष्पेंद्र बचपन से ही चार्ली चैपलिन की अच्छी नक़ल करता था। चार्ली की तरह ऊँटपटांग हरक़तें करना, चलते हुए गिरते पड़ते रहना और उछलकूद करना, पुष्पेंद्र को बहुत अच्छा लगता था। एक दिन बंगले की छत पर पुष्पेंद्र ऐसी ही उछलकूद कर रहा था। अचानक उसका ध्यान भटका और वह छत से सीधा नीचे ज़मीन पर गिर गया और उस चार मंज़िला बंगले की छत से गिरकर मर गया। पुष्पेंद्र के मरने के कुछ दिनों बाद ठाकुर साहब को अहसास हुआ कि बंगले में कुछ अजीब घटनाएं हो रही हैं। वे समझ गए कि पुष्पेंद्र की आत्मा ही वह सब कर रही है। पुष्पेंद्र की आत्मा किसी को नुक़सान नहीं पहुँचाती थी। लेकिन बंगले के कर्मचारियों और बंगले में हर आने जाने व्यक्ति को पुष्पेंद्र की आत्मा चार्ली चैपलिन की तरह ही हरक़तें करवाने लगी। कभी किसी को चलते हुए गिरा देना या कभी किसी को हवा में उठाकर नचा देना। पहले तो लोग डरे, लेकिन बाद में इससे सबको मज़ा आने लगा। जो लोग उस अनुभव से गुज़रे, वे हँसते हुए लोटपोट हुए बिना नहीं रहे।"
दादाजी आगे बोले,
"हमने तुम्हें तुम्हारे बचपन में उस बंगले के बारे में इसलिए नहीं बताया क्योंकि तब तुम बहुत छोटे थे और आत्मा के बारे में जानकर तुम डर जाते। बाद में हमने उस बंगले को आम जनता के मनोरंजन के लिए खोल दिया। अब लोग उस बंगले में आते हैं और हँसते हुए लोटपोट होकर जाते हैं...हाहाहा।"
दादाजी की इस बात पर अजय भी ज़ोर से हँस पड़ा।

