Renu Poddar

Inspirational Romance


5.0  

Renu Poddar

Inspirational Romance


जीते हैं, जिस के लिए

जीते हैं, जिस के लिए

10 mins 224 10 mins 224

हर्ष ने कॉलेज से आकर अभी अपनी बाइक अपने घर के आगे खड़ी की ही थी...तभी उसकी नज़र सामने वाले घर के आगे रुके ट्रक पर पड़ी, जिसमें से सामान उतारा जा रहा था। हर्ष उत्सुकतावश उधर देखने लगा दो-तीन सुन्दर सी लड़कियाँ अंदर से बाहर आई और सामान उतार रहे मज़दूरों को कुछ हिदायत देकर अंदर चली गयीं। हर्ष मन ही मन खुश हो रहा था कि चलो इस बार कोई अपनी उम्र का तो आया। वह अपने घर के अंदर जाने के लिए अभी मुड़ा ही था...तभी एक प्यारी सी आवाज़ सुनकर उसके कदम रुक गए। उसने मुड़ कर देखा सामने वाले घर से आई एक बहुत ही शांत सी दिखने वाली लड़की हाथ में एक खाली बोतल लिए खड़ी थी। हर्ष से बेहद ही सुरीली आवाज़ में बोली थोड़ा पानी मिलेगा। हर्ष उसकी बड़ी-बड़ी हिरणी जैसी आंखों में जैसे कहीं खो सा गया। लड़की ने अपना प्रश्न दोबारा दोहराते हुए कहा "हम लोग आज ही यहाँ शिफ्ट हुए हैं, अभी मार्किट का ठीक से पता नहीं है। मेरी बहनों को गर्मी बहुत लग रही थी और प्यास से उनका बुरा हाल हो रहा है...आप मुझे सामने खड़े नज़र आ गए तो मैंने सोचा आपसे ही पानी की पूछ लेती हूँ। हर्ष ने थोड़ा झेंपते हुए कहा "हाँ-हाँ ज़रूर, आप एक मिनट रुकिए में पानी लेकर आता हूँ। हर्ष अंदर से पूरा 5 लीटर वाला ठंडे पानी का थर्मस ले आया और उस लड़की से बोला मैं आपका नाम तो पूछना भूल ही गया। लड़की ने हल्की सी मुस्कुराहट के साथ कहा "रौशनी" हर्ष रौशनी के घर की तरफ चलता हुआ बोला "चलिए मैं रख देता हूँ थर्मस आपके घर में। रौशनी ने कहा "अरे आप तकलीफ़ मत कीजिए आप बस मुझे इस बोतल में पानी दे दीजिए अभी मामाजी आयेंगे वो फटाफट गाड़ी में मार्किट से जाकर पानी की बड़ी बोतल ले आयेंगे। हर्ष ने रौशनी को देखते हुए कहा "इसमें तकलीफ़ कैसी मम्मी-पापा ऑफिस गये हैं और मैं भी खाना खा कर अपनी डांस क्लास के लिए जाऊँगा इसलिए मैंने सोचा एक बोतल पानी तो दो लोग भी ठीक से नहीं पी पायेंगे तो क्यों न आपके घर में पानी का थर्मस रख दूँ।" हर्ष रौशनी के घर के गेट पर रौशनी के हाथ में थर्मस पकड़ाता हुआ बोला "बाय द वे...आई एम हर्ष।" कह कर वह तेज़ी से अपने घर की तरफ चल दिया। रौशनी बस हर्ष को देखती रह गयी, वह उसको शुक्रिया भी नहीं कह पायी। 


रौशनी पानी का थर्मस लेकर जैसे ही अंदर गयी, उसकी मामी की सबसे बड़ी बेटी ख़ुशी ने थर्मस उसके हाथ से खींचते है कहा "इस बात में तो तेरी तारीफ़ करनी पड़ेगी, कहीं ना कहीं से तो हर चीज़ का जुगाड़ कर ही लेती है" कहते हुए उसने गट-गट कर के बहुत सारा पानी पी लिया। ख़ुशी अभी पानी पी कर ही हटी थी, तभी उसकी दोनों छोटी जुड़वाँ बहनें अपनी-अपनी पानी की बोतल में पानी भरने लगी। उनको देख कर ख़ुशी की मम्मी ने कहा "पानी रौशनी लेकर आयी है और उसे ही अभी तक तुमने पानी पीने नहीं दिया।" ख़ुशी ने चिढ़ते हुए कहा "तो पी लेगी, हमने कौन सा मना किया है।" तभी रौशनी के मामाजी सब के लिए पिज़्ज़ा लेकर आ गए। सबने मिल कर पिज़्ज़ा खाया। शाम को रौशनी ने सोचा हर्ष का थर्मस वापिस कर आती हूँ, क्यूंकि सारा सामान फैला हुआ है, कहीं थर्मस इधर-उधर ना रखा जाये। थर्मस के साथ रौशनी ने एक थैंक यू कार्ड और एक चॉकलेट देने का फैसला कर लिया। वह हर्ष के घर जाकर अभी डोर बैल बजाने जा ही रही थी, तभी उसे सामने से हर्ष आता हुआ दिखा। उसने मुस्कुराते हुए कहा "अच्छा हुआ आप मुझे यहीं मिल गए, मैं आपका थर्मस लौटाने आई थी।" रौशनी ने थर्मस के साथ चॉकलेट और कार्ड हर्ष को देते हुए एक बार फिर उसका शुक्रिया किया। हर्ष ने उसकी थोड़ी मिन्नत करते हुए कहा "आओ अंदर आओ, एक कप कॉफ़ी पी कर जाना। मेरे हाथ की कॉफ़ी के सब दीवाने है।" रौशनी ने धीरे से बुदबुदाते हुए कहा "हम तो दो ही मुलाकातों में आपके दीवाने हो गये हैं।" हर्ष को कुछ समझ नहीं आया की रौशनी ने क्या बोला। इससे पहले रौशनी कुछ कहती सामने से उसकी मामी उसे आवाज़ देकर बुला रही थी। हर्ष ने जल्दी से रौशनी से उसका मोबाइल न. पूछा। रौशनी न. देकर तेज़ी से भागती हुई अपने घर आ गयी। एक-दो दिन रौशनी घर से बाहर ज़्यादा नहीं निकल पायी क्यूंकि सामान लगवाने में वो ही अपने मामा-मामी की मदद कर रही थी। रात को ग्यारह बजे रौशनी अपने कमरे में आकर अभी सोने की तैयारी कर ही रही थी, तभी उसके फोन पर हर्ष का मैसेज आया। हर्ष ने लिखा था "पता नहीं क्यूँ, कल से किसी काम में मन ही नहीं लग रहा। तुम्हारे बारे में अभी तो कुछ जनता भी नहीं फिर भी ना जाने क्यूँ, तुमसे मिलने का, बात करने का मन कर रहा है।"


रौशनी हर्ष का मैसेज पढ़ कर धीरे से मुस्कुराई और उसने हर्ष का मन थोड़ा और टटोलने के लिए उसे मैसेज किया की "आज बहुत थक गयी हूँ, कल सुबह आठ बजे अपनी क्लास के लिए भी जाना है। प्लीज़ मुझे बता सकते हो कि के एस. एस. कॉलेज के लिए कैसे जाना है"? हर्ष ने उसे मैसेज किया "कल मुझे पार्क के पास मिलना, तुम्हारा कॉलेज मेरे कॉलेज के पास ही है। मैं तुम्हें ड्रॉप कर दूँगा।" इस तरह रौशनी और हर्ष रोज़ मिलने लगे और कब वो एक-दूसरे से प्यार करने लगे, उन्हें इस बात का एहसास तब हुआ जब एक भी दिन नहीं मिल पाते थे, तो ना किसी काम में मन लगता था, ना खाने-पीने का ही मन करता था। उधर रौशनी की मामी और हर्ष की मम्मी की बहुत अच्छी दोस्ती हो गयी। हर्ष की मम्मी को ख़ुशी बहुत पसंद थी और कहीं ना कहीं वो ख़ुशी को अपने घर की बहु बनाने के सपने देखने लगी। ऐसे ही एक- दो साल निकल गए, हर्ष भी अब जॉब करने लगा। रौशनी की भी पढ़ाई पूरी हो चुकी थी इसलिए वो भी वापिस अपने शहर जा कर ही नौकरी करने की सोच रही थी। एक दिन ख़ुशी ने रौशनी और हर्ष को साथ में देख लिया। वह तो जल के ख़ाक हो गई क्यूंकि वह रौशनी से हर समय होड़ में ही लगी रहती थी। उसने घर में सारी पोल खोल दी। हर्ष की मम्मी को भी पता चल गया, दोनों ही घरों में बवाल खड़ा हो गया। रौशनी के मम्मी-पापा को भी बुला कर बहुत बेइज़्ज़त किया गया। हर्ष की मम्मी को सावंली और ग़रीब परिवार की रौशनी अपने हर्ष के लिए बिल्कुल मंज़ूर नहीं थी। उन्हें तो हर्ष के लिए ख़ुशी पसंद थी, इसलिए उन्होंने ख़ुशी के मम्मी- पापा से हर्ष और ख़ुशी के रिश्ते की बात की। ख़ुशी भी इस रिश्ते के लिए मान गयी, जबकि उसे हर्ष कुछ खास पसंद नहीं था पर वह किसी भी हालत में रौशनी और हर्ष को एक होते हुए नहीं देखना चाहती थी। हर्ष के लाख मना करने पर भी उसके मम्मी-पापा ने उसे अपने मरने की धमकियां देकर हर्ष को विवश कर दिया ख़ुशी से शादी करने के लिए।


उधर रौशनी के मम्मी-पापा ने भी उसकी शादी जबरदस्ती कहीं और तय कर दी, यह कहते हुए की "हमने तुझे तेरे मामाजी के घर पढ़ने के लिए भेजा था और तूने वहां जा कर खानदान की इज़्ज़त मिट्टी में मिला दी।" हर्ष और रौशनी ने भाग कर शादी करने की सोची पर अपने प्यार ले लिए वो अपने माँ-बाप को तकलीफ़ नहीं देना चाहते थे, इसलिए दोनों ने अपने प्यार अपनी भावनाओं को दफ़ना दिया। हर्ष की शादी ख़ुशी से हो तो गयी पर ख़ुशी तो बेहद ही नकचढ़ी और ज़िद्दी लड़की थी। हर्ष से उसे ज़रा भी कोई लगाव नहीं था। उसने कुछ दिन बाद ही घर में सबका जीना मुश्किल कर दिया। हर्ष तो हर समय परेशान रहने लगा क्यूंकि ख़ुशी उसे हर वक़्त उसके और रौशनी के रिश्ते को लेकर ताने मरती रहती थी। हर्ष का बुरा हाल था, वो बिल्कुल डिप्रेशन में चला गया। उसका ऐसा हाल देख उसके मम्मी-पापा खून के आँसू रोते थे कि क्यूँ नहीं हमने हर्ष की शादी रौशनी से की। उधर रौशनी का पति सारांश बहुत ही नेक दिल इंसान था। रौशनी ने उसे अपने और हर्ष के बारे में सब बता दिया था क्यूंकि वह नहीं चाहती थी कि यह बात उसे किसी और से पता चले। रौशनी ने उससे यह भी कह दिया था कि "वो मेरा अतीत था, अब मैं अपने वैवाहिक जीवन में आपको कोई धोखा नहीं देना चाहूँगी" क्यूंकि रौशनी भी सारांश की अच्छाइयों का जवाब उससे छल करके नहीं देना चाहती थी। एक दिन रौशनी और सारांश गाड़ी में मंदिर से आ रहे होते हैं, तभी उनकी गाड़ी के आगे कोई आ जाता है। सारांश बहुत ज़ोर से ब्रेक लगता है। वह शख्स बच तो जाता है पर वह वहीं उनकी गाड़ी के आगे गिर जाता है। वह दोनों बाहर आकर देखते हैं, दाढ़ी-मूंछ बड़े हुए, अपनी दिमागी हालत खोये हुए हर्ष को देखर रौशनी उसे सहारा देकर उठाते हुए बुरी तरह रोने लगती है।


रौशनी सारांश से हर्ष के लिए पानी लाने को कहती है। उसे पानी पिलाते हुए रौशनी बुरी तरह रोती हुई कहती है "ये क्या हालत बना ली तुमने हर्ष ? हर्ष तो अपने होश में ही नहीं था, सारांश उसे अपनी गाड़ी में बिठा कर पास के हॉस्पिटल में ले जाता है। वहां उसे एडमिट कर लेते हैं, रौशनी अपने मामा को फोन कर के हर्ष के मम्मी-पापा से बात करवाने की कहती है, तो वो यह कह कर फोन रख देते हैं कि "उन लोगों से हमारा कोई लेना देना नहीं है।" हमने ख़ुशी और हर्ष का तलाक करवा दिया था क्यूंकि उन सब ने हमारी बेटी का जीना मुश्किल कर दिया था।" जब रौशनी यह सब सारांश को बताती है, तो सारांश उसे सांत्वना देता हुआ कहता है "तुम घबराओ नहीं, हॉस्पिटल से छुट्टी मिलने पर हम हर्ष को अपने घर ले जायेंगे फिर जब वो अपने घर जाने लायक हो जायेगा तो उसे भेज देंगे।" दो-तीन दिन बाद हर्ष उनके घर आ गया। रौशनी हर्ष की देख भाल किसी छोटे बच्चे की तरह करने में लगी रहती थी। हर्ष भी रौशनी के दिन-रात देखभाल करने से थोड़ा थोड़ा ठीक होने लगा था। सारांश जब भी उन दोनों को देखता था, उसे लगता था कि जैसे वो दोनों एक-दूसरे के लिए ही बने हों, हालांकि रौशनी अब किसी हालत में सारांश को धोखा नहीं देना चाहती थी और हर्ष भी उन दोनों के बीच नहीं आना चाहता था। तीनों का एक अजीब सा रिश्ता बन गया था। जहाँ सब एक-दूसरे का दिल नहीं दुखाना चाहते थे। सारांश को उन दोनों को देख कर लगता था, जैसे वो दो प्यार करने वालों के बीच आ गया। ज़रा सी हर्ष की तकलीफ़ को देखकर जब रौशनी तड़पती थी तो उसे लगता था जैसे वो एक मुज़रिम है। वहीं रौशनी को लगने लगा था कि कहीं सारांश को ऐसा ना लगे कि वो उसे धोखा दे रही है इसलिए हर्ष के थोड़ा ठीक होने पर उसे वहां से जाने की कहती है।


एक दिन सारांश उन दोनों के पास आता है और हर्ष और रौशनी का हाथ एक-दूसरे के हाथ में देता हुआ थोड़ा भावुक हो कर बोला "तुम दोनों एक दूसरे के लिए बने हो।" रौशनी ने अपना हाथ खींचते हुए सारांश के क़दमों में गिरते हुए कहा "ये आप कैसी बातें कर रहे हो, आप तो मेरे लिए भगवान हो।" सारांश ने उसे उठाते हुए कहा "भगवान को पूजा जाता है, उनसे प्यार नहीं किया जाता। तुम दोनों ने अब तक बहुत कुछ सहन किया है।" हर्ष ने सारांश को गले लगाते हुए कहा "मैंने आप जैसा व्यक्ति अपनी ज़िन्दगी में नहीं देखा, आप दोनों अब सात जन्मों के बंधन में बंध चुके हो। मुझे यहां से जाने दीजिए। तभी सारांश कहता है "दुनिया ने दो दिलों को अलग कर दिया था, अब मैं उन्हें वापिस एक कर रहा हूँ। प्यार में सिर्फ लिया नहीं जाता इसलिए मैंने रौशनी को तलाक देने का फैसला कर लिया है और तलाक के बाद मैं तुम दोनों की शादी करवाऊंगा।" हर्ष ने अपना सामान उठाते हुए कहा "हम दोनों की किस्मत में एक होना लिखा होता, तो हम कब के हो जाते। अब मैं आपकी ज़िन्दगी अपनी वजह से खराब नहीं होने दूँगा।" कहता हुआ हर्ष घर से बाहर निकलने लगा रौशनी ने उससे कहा "मुझे वचन दो, तुम अपनी ज़िन्दगी में आगे बड़ोगे और अब अपनी ज़िन्दगी किसी वजह से बर्बाद नहीं करोगे।" हर्ष ने उन दोनों को नज़रों ही नज़रों में विश्वास दिलाया और बाहर निकल गया। 


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