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Dipesh Kumar

Drama


4.7  

Dipesh Kumar

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जब सब थम सा गया (सत्रहवाँ दिन)

जब सब थम सा गया (सत्रहवाँ दिन)

5 mins 214 5 mins 214

प्रिय डायरी,

दिन धीऱे धीऱे बीत रहे थे। मायूसियत और छाती जा रही थी। मन में बस यही विचार आ रहा था कि ये सब कब खत्म होगा। सच बताऊ तो ये प्रश्न सभी के मन में चल रहा होगा,क्योंकि कोरोना संक्रमितों की बढती संख्या और सरकार द्वारा लॉक डाउन और अधिक संक्रमितों वाले क्षेत्र को पूर्ण रूप से सील करना कोई अच्छे संकेत नहीं हैं। लेकिन इस संक्रमण का यही एक मात्र इलाज हैं। मैं सोच रहा था कि देश की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा। बच्चो के पढाई और वार्षिक सत्र का क्या होगा। साथ ही साथ बोर्ड परीक्षा के विद्यार्थियों का बची परीक्षा कैसे होंगी। नए सत्र के कॉलेज विद्यार्थियों का क्या होगा?

इस प्रकार के विचारों और प्रश्नों के साथ सुबह हुई। मैं उठ कर अपने दैनिक क्रियाएं पूरी करने लगा। सूर्य नमस्कार,प्राणायाम के बाद मैं नीचे गया। पूजा पाठ समाप्त करने के बाद। टीवी पर खबर देखा तो कोरोना संक्रमितों की संख्या और नए मरीजो की संख्या बढ़ती जा रही थी। साथ ही साथ अन्य देशों की भारत द्वारा की गयी मदद की प्रशंशा हर देश अपने अपने स्तर पर कर रहा था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को दवाइओ की मदद के लिए बहुत बहुत धन्यवाद दिया और कहा कि ,"भारत के इस मदद को अमेरिका हमेशा याद रखेगा। साथ ही साथ ब्राजील ने कहा कि जिस तरह हनुमान जी ने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी के प्राण बचाये थे उसी प्रकार मोदी जी ने हमको संजीवनी बूटी दी हैं। अन्य देश जैसे नेपाल और श्री लंका ने भी भारत के मदद की प्रशंशा की। लेकिन एक प्रश्न मेरे मन में आ रहा था कि इस संक्रमण की कोई दवाई क्यों नई बन पा रही हैं?

कुछ देर बाद नाश्ता करके मैं गेट के बाहर कुछ देर के लिए सड़के और आस पास का माहौल देखने लगा,क्योंकि मेरे घर के सामने कोई घर नहीं हैं बस दूर दूर तक खेत हैं,और कॉलोनी पिछले हिस्से में हैं। लेकिन वास्तव में मेरा घर बहुत ही सुंदर स्थान पर हैं। गर्मी और तापमान दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहा था। शुरुवात में ये खबर आई थी की जब तापमान में बढ़ोतरी होगी और गर्मी आएगी,तो कोरोना वायरस खुद पे खुद अपने आप खत्म हो जायेगा। लेकिन गर्मी और तापमान में बढ़ोतरी तो हो रही हैं पर कोरोना संक्रमण के केस काम नहीं बढ़ रहे हैं। मैं तो बस यही प्रार्थना कर रहा हूँ की सब जल्दी से खत्म हो जाये और सब अपनी साधारण जिंदगी जीना वापस चालु कर दे।

वैसे तो सरकार अपने स्तर पर सबको घर में रहने की अपील कर रही हैं लेकिन जो दिहाड़ी मजदूर हैं ,और जो रोजाना काम कर खाने वाले हैं। उनका क्या होगा?,क्योंकि न तो वो पेट भर के खाना खा पा रहे हैं और न ही कुछ कमा पा रहे हैं। लॉक डाउन के बाद भी आगे का समय उनके लिए बहुत ही परेशानियों और समस्याओं से भरा होगा। यही सब मैं बहार खड़े होकर सोच रहा था। मैं अपने कमरे में आ कर पढ़ने बैठ गया और पढ़ते पढ़ते मैंने विचार बनाया की क्यों न एक छोटा सा परीक्षा लू अपना की अभी किस स्तर की तैयारी करनी हैं और साथ ही साथ किस चीज़ की कमी हैं और किस विषय पर ज्यादा ध्यान देना हैं। एक घंटे का प्रश्न पत्र था ,तो मैं उस प्रश्न पत्र का हल करने लगा। लगभग साढ़े बारह बजे मैंने परीक्षा पूरी की। फिर मैं सभी प्रश्नों को जांचने लगा। कुछ चीज़ों की कमी अभी बहुत थी। लेकिन इससे एक अनुमान मिल गया कि मुझे किस विषय पर ज्यादा मेहनत करनी हैं। कुछ देर बाद दोपहर के भोजन के दौरान पता चला की दो दिन के लिए हमारे जिले नीमच मैं पूर्ण रूप से बंद रहेगा। न कोई किराने की दूकान खुलेगी और न ही कोई सब्जी की दूकान। कोई अपने घर से नहीं निकल पायेगा। हालांकि ईश्वर की कृपा से हम लोगो के क्षेत्र में अभी कोई कोरोना संक्रमण का मामला नहीं आया हैं ,लेकिन फिर भी माननीय मुख्यमंत्री जी के आदेश पर कलेक्टर महोदय ने ये आदेश जारी किया हैं।

भोजन के बाद मैं अपने कमरे में जा रहा था कि अचानक अग्नि समन के गाडी और घंटी की अवाज़ आने लगी मैं तुरंत खिड़की से देखने लगा। मैं सोचने लगा की आग कहाँ लगी हैं। लॉक डाउन के चलते कही जा भी नहीं सकते हैं। हो सकता हैं कही सॉर्ट सिर्किट या अन्य किसी कारण से खेत में आग लग गयी हो। लेकिन ईश्वर से यही प्रार्थना कर रहा थी की इस प्रकार किसी का नुक्सान मत करना। कमरे में आकर बैठा तो अभी पढ़ने का मन नहीं कर रहा था। तो मैंने विचार किया कि क्यों न किसी से फ़ोन करके बात की जाये। तो मैं विचार करने लगा की किसे फ़ोन करु?मोबाइल पर व्हाट्सएप्प पर स्टेटस देखा तो आज साले साहब नीलेश का जन्मदिन था। मैंने तुरंत फ़ोन किया और नीलेश से कहा कि,"जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं और बताओ क्या हाल चाल,पार्टी कहा दे रहे हो(मजाक में)? नीलेश ने जवाब दिया,"जीजा जी धन्यवाद,सब समाचार बढ़िया हैं,और बात पार्टी की तो घर में तैयारी पूरी हो चुकी हैं,बस आपका इंतेजार हो रहा हैं। मैंने कहा बहुत खूब अच्छा मजाक कर रहे हो। बाते खत्म हुई तो मैंने अंग्रेजी साहित्य के महान लेकर एवं कावि विलियम शेक्सपियर की "वेनिस का सौदागर"पढ़ना प्रारम्भ किया। दरहसल जब मैं काशी हिंदू विश्वविद्यालय में बी.ए.प्रथम वर्ष में था उस समय ये हमारे पाठ्यक्रम में था। वैसे मैंने इसको कई बार पढ़ रखी हैं,लेकिन इसको पढ़ने का आनन्द ही कुछ और हैं।

पढ़ते पढ़ते शाम के पांच बज गए। लेकिन कहानी अभी आधी समाप्त हुई थी। लेकिन मैं किताब बंद करके नीचे गया और अपने पेड पोधो की देख रेख करने लगा,मुझे सबसे ज्यादा आनंद इसी काम मैं मिलता हैं। शाम की आरती के बाद भोजन के पश्चात मैं छत पर आ गया। साथ मैं पिताजी चाचाजी और भाई रूपेश और सावन भी छत पर आ गये और आज हम लोगो की चर्चा छत पर हो रही थी। चर्चा के बाद सब अपने कमरे में चले गये। मैं भी अपने कमरे में आकर "वेनिस का सौदागर"को फिर से पढ़ना प्रारम्भ किया। कहानी समाप्त करके मैं अपनी कहानी में आज की दिनचर्या को लिखने लगा। अब इसकी आदत बन गई हैं। इसके बाद मैं बिस्तर पर लेटा और मोबाइल चलाने लगा।

इस प्रकार लॉक डाउन का आज का दिन भी समाप्त हो गया। बस अब उम्मीद लगाकर सब बैठा हैं की सब जल्दी से ठीक हो जाये। लेकिन कहानी अभी अगले भाग में जारी है।


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