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Abhishek Gaurkhede

Drama Tragedy Inspirational


3  

Abhishek Gaurkhede

Drama Tragedy Inspirational


ई - पार्ट ४

ई - पार्ट ४

5 mins 73 5 mins 73

रितेश अपने रूम मे अकेला है और सोच रहा है की अगर -

“ अगर ईशा को पता चला की मुझे मिर्गी है तो वो भी मुझे छोड़कर चली जाएगी और मुझसे नफरत करने लगेगी। नहीं नहीं मैं उसकी नफरत बर्दाश्त नहीं कर पाऊगमुझे ही उसे दूर हो जाना चाहिये। क्यूँ न कुछ ऐसा करूँ की वो अपने आप दूर हो जाये और उसको मेरे मिर्गी की जानकारी भी नहीं होगी। रितेश को एक और वॉइस आती है, नहीं रितेश गलत करने से अच्छा होगा उसको सच बता दो अगर वो तुमसे सच में प्यार करती होगी तो वो कभी भी तुम्हें छोड़ कर नहीं जाएगी।

रितेश लेकिन मैं उसके बिना कैसे जी पाऊंगा नहीं मुझसे नहीं होगा।

रितेश ईशा को मिलने के लिए बुलाता है।

रितेश : ईशा मुझे तुम्हें कुछ बताना है।

ईशा : हाँ बोलो।

रितेश : तुम्हें याद है उस दिन पार्क में एक लड़के को मिर्गी का प्रोब्लेम हुआ था।

ईशा : हाँ याद है मुझे लेकिन तुम यह मुझे क्यूँ बता रहे हो।

रितेश : ईशा ईशा, मुझे भी मिर्गी का प्रोब्लेम है।

ईशा रितेश को बस 30 सेकोण्ड्स तक देखती रहती है और वहां से चली जाती है।

रितेश : ईशा प्लीज तुम कुछ बोलो ईशा प्लीज मत जाओ ईशा ( थोड़े दुखी और रोते हुए )

ईशा रितेश को छोड़ के जा चुकी है रितेश अपने रूम में अकेला बैठा है (उदास होकर ) की तभी उसका दोस्त अरुण आता है

अरुण : तू ठीक है न और आज एक्जाम का टाइम टेबल आ गया है।

रितेश : वो मुझे छोड़कर कर चली गयी।

अरुण : कौन ?

रितेश : ईशा

अरुण : क्यूँ ?

रितेश : मैंने उसको सच बता दिया की मुझे मिर्गी का प्रोब्लेम है।

अरुण : तो उसने क्या बोला ?

रितेश : कुछ नही, बस वहां से चली गयी

अरुण : रितेश, तू ऐसे दुखी मत रहे, नहीं तो तुझे प्रोब्लेम होगी।

रितेश : प्रोब्लेम तो हो गयी न यार, जिसे मैं इतना प्यार करता हूँ, वो मुझे छोड़कर चली गयी। यार मैंने जान बूझ कर तो मिर्गी नहीं की न खुद को , इसे अच्छा हो मैं मर जाऊँ क्यूकी जिसको भी पता चलेगा की मुझे ये प्रोब्लेम है वो मुझे छोड़कर चला जाएगा (रोते हुए ) यार आई रिएलि लव हर।

अरुण : (अरुण रितेश को चुप करता है और गले से लगा लेता है ) रितेश भूल कर भी कभी मरने के बारे में नहीं सोचना, कौन कहता है कोई तुझे प्यार नहीं करता। मैं हूँ मम्मी पापा है और तू बस एक लड़की के चले जाने से खुद को खत्म कर देगा, और आंटी जी चाहे तुझे जितनी प्रॉब्लेम्स हो वो तेरे साथ थे, तेरे पापा जो दिन रात बस तुझे कुछ न हो इसलिए तो इतने हॉस्पिटल के चक्कर लगाये और तू मरने की बात करता है।

रितेश : अरुण तू सही बोल रहा है मगर मेरी प्रोब्लेम।

अरुण : तुझे कोई प्रोब्लेम नहीं है, और ज्यादा मत सोच बस इतना कर खुद को ऐसा बना की प्रोब्लेम भी तुझे प्रोब्लेम देने से पहले दस बार सोचे।

रितेश : बट यार आई लव हर

अरुण : अबे प्यार करना है तो पहले खुद को कर जो तुझसे प्यार करते है उनको कर ,

रितेश : हाँ, तू तो बड़ा फिलिओस्फर बना गया है।

अरुण: साले वो छोड़ अब उठ और चल बार घूमके आते है, और आज से नो लड़की ओन्ली फोकस ऑन युर्सैल्फ, खुद को इतना मजबूत बना ले की तुझे प्रोब्लेम आए , तो मगर तुझे हारना नहीं है।

रितेश : ओके गुरु देव ,

और फिर रितेश तैयार होकर आता है और दोनों बार घूमने निकाल जाते है।

४ साल बाद 

रितेश ये कहानी बता रहा है, एक बड़ा सा औडिटोरियम में बहुत सारे लोग है, और बताता है कैसे उसके दोस्त ने, उसके मम्मी पापा ने हेल्प की उसकी और उन सब को थैंक्स बोलता है और उनको भी जो उसको छोड़ कर जाते है।

रितेश : बस इतनी सी ही है मेरी कहानी, आज जो भी हूँ, जैसा भी हूँ,आप लोगो के सामने हूँ। मैं अपने मम्मी पापा का, मेरे दोस्त का, और उन सब का थैंक्स बोलता हूँ, जो मेरे इस journey में मेरे साथ थे, है और हमेशा रहेंगे। मुझे समझने के लिए और मुझ पर विश्वास करने के लिए और उन सब का भी जो मुझे छोड़कर गए , क्यूकी न वो मुझे छोड़कर जाते और न ही मेरा दोस्त मुझे ये विश्वास दिलाता की मुझे खुद पर विश्वास होना चाहिए पहले, मगर मेरे साथ तो मेरा दोस्त था। जिसने मुझे ये विश्वास दिलाया की, तुम्हें हारना नहीं है। लेकिन दुनिया मे कितने सारे ऐसे लोग जो शायद मिर्गी के कारण जिंदगी जीना भूल गए है उन से बस मैं इतना ही कहूँगा कोई तुम्हारे साथ हो न हो, आप अपने साथ रहिए , चाहे जो हो जाए जिंदगी एक बार ही मिलती है। तकलीफ़े तो आएगी मगर खुद को इस तरह बनिए की तुम को तुम पर प्राउड हो।

और हाँ मैं उन सब लोगो से इतना कहना चाहता, छोड़कर जाना आसान है मगर साथ रहना बहुत मुश्किल। बस एक बार मिर्गी के पेशंट को समझने की कोशिश कीजिए। टैबलेट जरूरी है मगर थोड़ा सा प्यार, थोड़ा सा विश्वास देकर देखिये उनको, क्यूकी हमारे अंदर क्या चलता ये शायद नहीं समझा पाये आप लोगो को, हाँ हमारे दिमाग की वाइरिंग रोज थोड़ी बहुत हिलती रहती है और कभी कभी ऐसा हो जाता जो नहीं भी करना चाहते है वो हो जाता है , कभी छोटी छोटी बातें भूल जाते है, और कभी कभी बड़ी सी बड़ी चीज़ आसानी से कर जाते है, क्यूकी शायद से इस तकलीफ़ ने हमे वो दे दिया जो शायद हर किसी को नहीं मिलता, खुद पर विश्वास करने की ताकत, खुद से लड़ने की क्षमता और तुम्हें खुद को को प्रूफ करना है, खुद के लिए ये जज़्बा ... शायद सबसे बड़ा थैंक्स तो मुझे मेरी बीमारी को ही देना चाहिए जिसने मुझे ये बना दिया “थैंक यू सो मच”।

THE END


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