होली में रंग गयी पिया संग
होली में रंग गयी पिया संग
रेखा सूरज की तरफ मुंह करके गुम सुम सी बैठी थी।मानो सतरंगी सूरज के उजाले में अपना रंग जैसे की तलाश रही हो। शादी के बाद कल उसका पहला जन्मदिन था।
उसने अपने जन्मदिन पर पीले रंग की साड़ी पहनकर जब पूजा करके जब वह प्रसाद लेकर शुभम के पास गई।तो वह बोला- " कैसे रंग की साड़ी पहन ली है ।ये रंग तुम्हारे लिए बना ही नहीं है ।ये रंग गोरे लोगों पर अच्छा खिलता है।"
शुभम ने जैसे दिल पर वार कर दिया हो।उसके दिल से ज्यादा आत्मसम्मान को ठेस पहुंची।आज उसे समझ आया कि शुभम उससे क्यों खिंचा- खिंचा सा रहता है।उसे अपनी जिंदगी पतझड़ में गिरे सूखे पत्तों के समान प्रतीत होने लगी।
अभी कुछ दिन पहले ही उसकी शादी हुई।ये सुनकर वो धक रह गई!ये क्या कह दिया शुभम ने
फिर उसने दूसरी खिलते रंग की साड़ी पहन ली। और आज अंदर से बिल्कुल भी खुश नहीं थी। उसे लग रहा था।कि शुभम को मैं पसंद ही नहीं हूं।पर जब शादी हुई तब तो वह खुश था। इसे क्या हो गया?
रेखा ने अपने जन्मदिन पर सबके सामने चेहरे पर झूठी मुस्कान दिखाई कि जैसे उसे हुआ ही न हो।सबके सामने केक भी काटा । सबके सामने सामान्य होने की कोशिश करती रही।पर दिन में उसे तो कभी सहेलियों के, कभी मायके से फोन आते रहे ।सब जन्मदिन की बधाई देते रहे।इस तरह दिन निकल गया।
पर रात में सुबह की बात याद करके आंसू बह रहे थे।वह अपने आपको रोकते हुए सोने की कोशिश कर रही थी।पर नींद कोसों दूर थी।वह सोच रही थी। शुभम को मैं क्या अच्छी नहीं लगती क्या?
मेरा रंग सांवला है इसलिए मैं उनकी पसंद नहीं हूं क्या?इसी उधेड़बुन में रात निकल गई।
सुबह उठी तो ननद ने उसकी आंखें लाल देखी तो मजाक में पूछा-क्यों भाभी रात भर जन्मदिन मनाया?
और उसने हल्की मुस्कान दी , फिर कुछ नहीं कहा वह किचन के काम में लग गई।तब सासुमां ने कहा - "आज तुम्हें मायके जाना है तुम्हारी पहली होली है। तुम्हारे पापा का फोन आया है। रेखा तुम मायके जाने की तैयारी कर लो।"
उसके भैया लेने आए तो वह मायके चली गई।अब शुभम रात को कमरे में सोने आया तो कमरा सूना -सूना लग रहा था। उसने चैनल बदल- बदलकर टीवी भी देखना चाहा ,पर उसका मन नहीं लग रहा था। वह रेखा के बारे में सोचने लगा कि कैसी चूड़ी पायल की खन-खन बजती थीं। थोड़ी देर करवट बदलते- बदलते नींद लग गई।
सुबह उठा तो वहीं छींक का दौर चालू हो गया।जो पहले रोज ही तेज पंखे या ऐसी में पूरी रात सो जाने पर हो जाता था।पर कमाल की बात है इन पंद्रह दिनों में एक बार भी ऐसा नहीं हुआ था वह सुबह उठता तो एसी धीमा होता ,तन कंबल से ढका होता।रेखा के घर पर आने से मां के चेहरे की भी रंगत बदल गई थी। इन सब की वजह वह जादूगरनी ही है। उसकी उपेक्षा के बाद भी उसने कभी शिकायत नहीं की ,केवल अपना फर्ज निभाती रही।
जब उसे रेखा की याद आने लगी तो वह एल्बम लेकर बैठ गया।आज उसे वह खूबसूरत लग रही थी।आज उसे एहसास हुआ कि रंग ही खूबसूरती का पैमाना नहीं होती है मोर भी रंग बिरंगे पंखों के कारण प्रभावित तो करता है।पर पर कोयल की आवाज भी सुरीली होती है।
बस मन की आंखों में जो बस जाए।यही सोच रहा था। फिर उसने एलर्जी की गोली ढूंढने की कोशिश की, पर नहीं मिली।
आज शुभम को लगा कि फोन करके पूछे पर नहीं उसने नहीं पूछा ।जब मां चाय देने लगी तब शुभम को बताया कि 'रेखा के पापा ने तुम्हें होली में बुलाया है।'
तो शुभम ने एक बार में ही हां कह दी।उसे भी रेखा से मिलने का बहुत मन हो रहा था।
होली की रात जब वह रेखा के घर गया वह कमरे में खिड़की के पास खड़ी थी ।बाहर की ओर देख रही थी। फिर पीछे से शुभम ने उसके गालों पर गुलाल लगा दिया।रेखा ने जब मुड़ कर देखा तो हैरान रह गयी। फिर आंख से आंसू निकल पड़े इस बार आंसू खुशी के निकले थे। फिर शुभम ने गले लगा लिया।वह अंदर से मुस्करा उठी, उसे अपने हिस्से के खुशी के रंग जो मिल गये थे।इस तरह होली में रंग गयी पिया संग।आज उसे पति के प्यार का एहसास हुआ।जब उसकी नजर में सच्चा प्यार महसूस कर रही थी।
दोस्तों-चेहरे के रंग को देखकर किसी को कोई भी बात कहना जिससे मन दुखी हो जाए।तो ऐसी बात कहने से पहले दस बार सोचना चाहिए। क्योंकि जिंदगी में सूरत से ज्यादा सीरत मायने रखती है। इंसान को सूरत से नहीं सीरत से प्यार करना चाहिए। तभी हमें सामने वाली की अच्छाई नजर आती है।

