हम तुम [19 जून]
हम तुम [19 जून]
मेरी प्यारी संगिनी
हम तुम एक हैं, तुम मेरी ही आत्मा हो, जो मेरी सारी भावनाओं को समझती हो।
जानती हो संगिनी, सिवाय ईश्वर के अंतिम क्षणों तक, हमारा साथ कोई नहीं निभाता, शैशव काल से लेकर मृत्यु पर्यंत, रिश्ते नाते, समय-समय पर साथ निभाते हैं, सिर्फ ईश्वर ही हैं, जो आरंभ से अंत तक, और शायद मृत्यु के बाद भी, हमारे साथ रहते हैं, इसीलिए क्यों ना उन्हीं में ध्यान लगाया जाए, सत्कर्म किए जाएं, क्योंकि यही सत्कर्म, परम तत्व में विलीन होते समय, हमारे साथ जाएंगे।
आज का "जीवन संदेश"
मन कर्म वचन से, कभी किसी का दिल ना दुखाएं, जानबूझकर तो कभी नहीं, क्योंकि ईश्वर ग़लतियां तो माफ करते हैं, साजिशें नहीं।
आज के लिए बस इतना ही, मिलती हूँ कल फिर से, मेरी "प्यारी संगिनी।"
