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Shelley Khatri

Inspirational

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Shelley Khatri

Inspirational

हिंदी माध्यम

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“ये नीता अभी तक अपने घर में काम कर रही है? दो महीने पहले ही कहा था न उसे निकालो। बात क्यों नहीं समझती हो, बच्चे के भविष्य का सवाल है।“ घर आकर रोहित ने जैसे ही नीता को देखा, शुरू हो गए। बड़बड़ाते हुए ही बेड रूम में चले गए। पति को रोज से जल्दी आया घर देख रीमा खुश हो रही थी पर उनके गुस्से को देख उसका मन खराब हो गया। सहमी सी वह भी पीछे- पीछे बेड रूम में आयी। डेढ़ वर्षीय मोहित नीता के साथ खेल रहा था।

रीमा को देखते ही रोहित फिर शुरू हो गए।“ एक साल के अंदर मोहित का प्ले स्कूल में एडमिशन कराना है। दिन भर तुम उसे नीता के साथ रखोगी तो वह भी हिंदी में ही बात करना सीख जाएगा न। क्या भविष्य बनेगा उसका, हिंदी में बात सुनकर कोई अच्छा स्कूल एडमिशन नहीं देगा तो क्या करेंगे उस समय हमलोगा। मैंने तो पहले ही दिन कहा था कि अच्छी और पढ़ी –लिखी बेबी सीटर रखना पर तुमने नीता को रख लिया। अब बोल रहा हूं कि मोहित बोलना सीख रहा है नीता को हटाकर कोई पढ़ी- लिखी रखो तो हटा नहीं रही हो। अपने ही बेटे का भविष्य खराब करना चाहती हो क्या?” रोहित ने बोलना शुरू किया तो बोलते ही गए।

“पढ़ी- लिखी तो है ही नीता। स्वाभाव की भी अच्छी है और उसे बेबी सीटर के रूप में काम करने का बीस साल का अनुभव भी है इसलिए ही रखी थी उसे।“ रीमा ने सफाई दी।


“क्या पढ़ी है, हिंदी में पढ़ने का क्या मतलब होता है? उसके रेजूयम में बीए लिखा था पर उसने बताया था न कि हिंदी मीडियम में पढ़ी है और उसे इंग्लिश ठीक से बोलनी नहीं आती है। हिंदी में बीए का कोई मतलब थोड़े न होता है।“

"आज इतना जरूरी काम था। दो दिन के बाद एनुएल प्रजेंटेशन है। नए बॉस के सामने इंप्रेशन का इससे बढ़िया मौका क्या मिलेगा। उनका नॉलेज लेवल काफी हाई है। नेशनल इंटरनेशल कंपनीज में काम कर चुके हैं। कई इंटरनेशनल कंपनीज के एडवाइजरी कमेटी में भी हैं। हमारे यहां एमडी के काफी करीब हैं। इसलिए ही सोचा घर पर जाकर आराम से प्रजेंटेशन तैयार करता हूं ताकि सबसे बढ़िया प्रजेंटेशन बना सकूँ। पर तुमने आते ही मूड खराब कर दिया।" रोहित ने कहा तो रीमा का मन भी डूबने लगा।

“खोज ही रही हूं अभी तक मिली नहीं कोई इसलिए नीता को नहीं हटाया। आप इन बातों को छोड़कर अपने काम में मन लगाइए। काफी ला दूँ “ उसने कोमलता से कहा ताकि रोहित नोर्मल हो सके।

"हां एक कप काफी दे दो और दरवाज़ा बंद कर दो," रोहित ने लैपटॉप खोलते हुए कहा।

देर रात तक जग कर रोहित ने प्रजेंटेशन बनाया। रात दो बजे अंगड़ाई लेते हुए रीमा को आवाज़ दी। "अब उठ कर एक कॉफी और पिला दो। बन गया। देखना बाजी मैं ही ले जाउँगा।"

सोमवार को रोहित बन ठन कर ऑफ़िस गए और रीमा को कहते गए आकर सबलोग सेलिब्रेट करेंगे, आज मैं छा जाउंगा।

रीमा ने रात को पहनने के लिए सुंदर सी ड्रेस निकाल ली, पार्लर जाकर फेशियल करा आई। उसने सोचा था छह बजे तक वह तैयार हो जाएगी ताकि आकर रोहित को इंतजार न करना पड़े। तभी गाड़ी का हार्न सुनाई पड़ा। रोहित इतनी जल्दी? उसने घड़ी पर नजर डाली। साढ़े तीन बज रहे थे। उसने लपक कर दरवाज़ा खोला। उतरे हुए चेहरे के साथ रोहित घर में दाखिल हुए और सीधे हॉल के सोफे पर ही ढह गए।

रोहित को इस हाल में देखकर रीमा रूआंसी हो गई, "क्या हुआ रोहित आप ऐसे कैसे हैं," उसने डूबती आवाज़ में पूछा।

"बहुत बड़ी मुसीबत आ गई। इंप्रेशन की जगह मेरा मज़ाक बन गया। अब रात भर में हिंदी का जानकार कहां ढूँढूंगा?" रोहित ने परेशान सा जवाब दिया।

"हिंदी का जानकार मतलब," रीमा की समझ में कुछ नहीं आया।

 “सबसे पहले मैं प्रजेटेशन देने वाला था। प्रोजेक्टर ऑन होते ही बॉस ने कहा ये इंग्लिश में क्यों है?” मैंने कहा, " सर प्रजेंटेशन तो इंगलिश में ही होगा न। आप क्या फ्रेंच में चाहते हैं।" तब कहने लगे, "यही बिजनेस करते हो तुम लोग। हिंदी क्षेत्र है ये, सारे क्लाइंट हिंदी में बात करते हैं। पूरे इलाके में बिजनेस और संपर्क की भाषा हिंदी है और हम अंग्रेजी में व्यापार करेंगे तो क्या उनकी जरूरत समझेंगे और क्या सामान मार्केट में उतारेंगे और कौन सा स्थान मिलेगा बाजार में हमें? तुम लोग क्या बिल्कुल मुर्ख हो।"

फिर कहने लगे। "ऐसा करो, डिसप्ले इंग्लिश में होने दो पर तुम इस हिंदी में समझाओ।"

"रीमा सोचो, मैं क्या हिंदी बोल पाता। मैं तो पहले पेज के ही शब्दों के अर्थ नहीं बोल पाया। फिर कहने लगे आज क्या है इस हॉल में? मैंने कहा, मीटिंग तो बोले हिंदी में बोलो। मुझे मिटिंग की हिंदी कहाँ मालूम थी। तब डांटने लगे किसने तुम्हें नौकरी पर रख दिया। हिंदी ही नहीं आती है तो तुम कंपनी के किस काम के हो। इतना अपमान मेरा जीवन में पहले कभी नहीं हुआ था रीमा," कहते हुए रोहित का चेहरा लाल हो गया। "फिर कहने लगे, आखिरी मौका है कल सारे प्रजेंटेशन हिंदी में ले आना नहीं तो अपना इस्तीफ ….."

रोहित रूआंसा हो चुका था, रीमा भी स्तब्ध थी। हिंदी में? उसे तो खुद भी इतनी हिंदी नहीं आती थी। दोनों किंकर्तव्यविमूढ थे। तभी नीता पास आकर खड़ी हो गई। "मैम आपलोग बुरा न माने तो मैं आप लोगों की सहायता कर सकती हूं। "

तुम??? रोहित और रीमा एक साथ बोले।

"तुम तो अनपढ़ हो, मेरा मतलब हिंदी…" रोहित के शब्द गले में अटक गए।

"आपको तो हिंदी ही चाहिए न। सर, हिंदी वाले अनपढ़ नहीं होते। मैंने बीए तक पढ़ाई की है सायकोलॉजी से। माध्यम हिंदी था बस। खोलिए लैपटॉप बनाते हैं आपका प्रजेंटेशन।" नीता ने आत्मविश्वास से कहा।

रोहित अब तक आवाक् था, "तुम्हें लैपटॉप समझ में आता है?"

"हां, सर। आजकल रोज रात को हिंदी टाइपिंग सीख रही हूं, बेटे से। आपको आज ही पूरा करना है न, ऐसा करती हूं मैं अपने बेटे या बेटी को बुला लेती हूं। अभी सीख ही रही हूं न तो मेरी स्पीड कम है। पावर प्वाइंट में तो कोई दिक्कत नहीं होती है।" नीता बोलती ही जा रही थी।

रोहित और रीमा दोनों के लिए ये सब किसी आश्चर्य से कम नहीं था। "बेटा क्या करता है" रोहित ने धीरे पूछा।

"बेटा मेरा आपकी ही कंपनी में एचआर का इंटरर्नशिप कर रहा है। सुदेश नाम है, आपने शायद ध्यान दिया हो? बेटी एमबीबीएस के फाइनल इयर में है। दोनों ने बारहवीं तक हिंदी माध्यम से ही पढ़ाई की है" रीमा ने जैसे रोहित का मज़ाक उड़ाया। पर ये समय इन सब बातों के बारे में सोचने का नहीं था। "ठीक है बुला लो," उसने सिर्फ इतना ही कहा।

आधे घंटे में सुदेश आ गया। फिर नीता और सुदेश रोहित का लैपटॉप लेकर बैठकर गए। रात आठ बजे जब सुदेश ने आवाज़ दी, "सर एक बार देख लेते।" रोहित दौड़ा, सुदेश ने जब पूरा पढ़कर सुनाया और दिखाया तो रोहित की आँख में आँसू आ गए। जिस हिंदी माध्यम को वह हेय दृष्टि से देखता रहा, उसी ने आज उसकी नौकरी बचा ली।



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