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Vinay Panda

Romance

2  

Vinay Panda

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एक तरफ़ा प्यार

एक तरफ़ा प्यार

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बात उन दिनों की है जब मैं यौवन की दहलीज़ पर था, तूफ़ान सी वह किशोरावस्था। देखा संयोग से एक दिन जब मैं उसका चेहरा। कुछ देर की बात वह सुहानी मुलाक़ात हम तो भूल गये मगर वह मुझे बेतहाशा चाहने लगी। उमंग तो थी मुझ में भी परन्तु कैरियर खराब होने का डर भी, मिलने-मिलाने की बात भी कुछ नहीं थी बस कलम की दोस्ती समझो उसे। अपनी बात हम अपनी शायरियों के द्वारा आसानी पूर्वक एक दूजे से करके दिल का हाल सब समझ लेते थे । दौर चलता रहा वक़्त गुजरता गया जानें कब वो मुझसे प्यार करने लगी। हमने उसे एक दोस्त की नज़रों से देखा मगर दीवानी थी वह मेरी मुझे अपना हमदम मान बैठी थी।

उसके इक तरफ़ा मुहब्बत की राज़ उस दिन जग-जाहिर हुआ जब बाप के द्वारा उसके घर मेरे मिठाई आयी। आव-भगत सेवा सत्कार किये हम भी उनका खूब दोस्ती की जड़ समझकर लेकिन रात में चर्चा छेड़ ही दिए वो दादी का पैर पकड़ कर। ख़ुशी तो हमें भी हो रही थी बात अपनी शादी की सुनकर

मगर घरवाले दो टूक साफ़ कह दिए अभी इसकी उम्र ही क्या है। ठण्ड का महीना था, चाचा के लिए हमने अलाव जलाया साथ उनके बगल में बैठ गया।

दादी से फुरसत पाकर वो चाचा के पास आये। ज्यों ही बात छेड़ी उन्होंने जानते हो मेरे चाचा ने क्या कहा।

" इनकी शादी अभी। कभी नहीं, अरे अभी उस लड़की की माँ की शादी होगी फिर उसकी लड़की से जाकर इनकी शादी होगी। चाचा जी की दो टूक बातें दोस्त के पिता की बोलती बन्द कर दी, सुबह उनके जाने पर हफ्ते बाद उसका ख़त आया, जिसमे मेरी मर्जी का जिक्र था। दरअसल किसी जगह किसी पत्र में उससे प्रभावित होकर मैनें आई लव यू लिख दिया था। मेरा यही आई लव यू मेरे गले का फ़ांस बनता जा रहा था, उधर पढ़ाई के भार से मैं क़िस्मत को कोसता था अपनी। कितनी बार मिले हम लड़े झगड़े ना-नुकुर चलता रह, इन सबसे अनजान बनकर मैं पढ़ता रहा। इंतज़ार उसे भी था मेरी पढ़ाई पूरी होने की और वह अपने ख़्वाबों को हवा देती रही।

क़िस्मत में जो नहीं होता लाख चाह करो मगर मिलता नहीं कभी, एक दिन ऐसा आया जब हम और वो दोनों बंध गये दूसरे के साथ शादी के बन्धन में।

होती है आज भी बात उससे बात अपनी हम बारीक़ी से समझते हैं जानकर भी दिल को दुःख होगा कुछ कहते नहीं हैं। आज देखता हूँ वह शायरी की दुनिया में क्वीन बनती जा रही है, इधर कलम मेरी दिल में लेकर उसे पन्नों पर चिल्ला रही है।

" जिन नज़रों के प्यार थे हम कभी

आज मेरी कलम की आधार है वो।।

बिन मिले कभी बग़ैर छुये उसे

आज भी एक दूजे के प्यार हैं हम। "

यह घटना आज भी झकझोरती है जरा सा गर् याद करा दो उसे, पता नहीं कैसे वह एक तरफ़ा प्यार कर बैठी थी मुझसे।।



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