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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Tragedy

3.8  

Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Tragedy

एक सबक जीवन का

एक सबक जीवन का

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कॉलेज पहुंच तनु ने सबसे पहले अपनी कक्षा में नजर डाली । उसे वीरा कहीं भी नहीं दिखाई पड़ी उसे थोड़ी सी चिंता हुई आखिर वीरा क्यों नहीं आई । तनु कॉलेज 2 दिन बाद आई थी ।

उसे मां की कही बात याद आने लगी बेटा तनु!! कहीं वीरा को सच में तुम्हारी मदद की जरूरत न रही हो ? तब उसने अपनी सहेली नव्या से पूछा," क्या तुमने वीरा को देखा "? 


उसने कहा अरे तुम्हें कुछ भी नहीं पता वह तो तुम्हारी रूममेट है । तुम दोनों तो साथ ही रह रही थी, बाथरूम में पैर फिसलने से उसके ब्रेन में ब्लड जम गया वह 2 दिन से अस्पताल में है । 


अब तो तनु को भी बहुत चिंता होने लगी आखिर हुआ कैसे ? उसे आंखो के सामने पिछला घटनाक्रम साकार होने लगा । घर जाने से 2 दिन पहले वीरा और तनु में कुछ बात को लेकर बहुत लड़ाई हुई थी । देखा जाये बात कोई बहुत अधिक नहीं थी तनु ने वीरा की होमवर्क की कॉपी मांगी थी ।

वीरा ने कहा मैं पहले अपना होमवर्क खत्म कर लूं फिर तुमको देती हूं ।


बस तनु ने इसको अपनी प्रेस्टीज बना अपमान समझ लिया और उसको बुरा भला कहने लगी । वीरा फिर भी चुप रही ,उठ करके नहाने चली गई उसके इस तरह से चुप रहने से और नहाने चले जाने से तनु और भी क्रोधित हो गई ,उसे लगा कि उपेक्षितकर रही ।


तनु गांव के नजदीक शहर में हॉस्टल में रहकर अपनी पढ़ाई कर रही है । यहां हास्टल में रहना अनिवार्य था । उसके माता-पिता दोनों ही वर्किंग थे ,इसलिए कक्षा 5 से यहां रहकर पढ़ाई कर रही 

थी । वह कक्षा 11 की छात्रा थी । 


तनु अपने माता-पिता की इकलौती संतान होने के कारण एकाधिकार की भावना होने के साथ-साथ बहुत ही जिद्दी ,गुस्सैल व तुनकमिजाज स्वभाव की हो गई थी उसमें सामंजस्य व सहयोग भाव बिल्कुल नहीं था ।


तनु सोफे पर आंख बंद कर लेट गई बाथरूम से पानी के गिरने की आवाज आ रही थी तभी उसे वीरा की धीमी सी आवाज सुनाई पड़ी तनु तनु !!बाथरूम में आओ मेरी हेल्प करो । वीरा को लगा कि तनु झूठ बोल कर उसे बुलाने का नाटक कर रही है और वह मुझसे बोलने के लिए ऐसे प्रयास कर रही है ।तनु टस से मस नहीं हुई और उल्टे रूम का गेट भेड़ कर बाहर निकल आई।


हास्टल वार्डेन के पास जा 4 दिन का अवकाश पत्र दे घर को निकल ली । उसको अचानक आया देख कर उसकी मम्मी को कुछ हैरानी हुई और उन्होंने तनु से पूछा,

"बेटा तुम अचानक कैसे घर आ गयी ? अभी तो कोई त्योहार भी नहीं है । तनु अपनी मां से कुछ नहीं छिपाती थी ,उसने उनको पूरी बात बताई उन्होने उसे कहा , बेटा तुम्हें एक बार बाथरूम जाकर अवश्य देखना चाहिए था शायद वीरा को वास्तव में कोई मददकी जरूरत रही हो । अगर उसे कुछ हो गया तो ----


हमें दूसरे के नजरिया से भी सोचना चाहिए कि उस सिचुएशन में हम क्या करते इतना गुस्सा ठीक नहीं ।


अब तनु को भी अपना व्यवहार कुछ गलत लगा, वह दूसरे दिन ही हास्टल पहुंच गयी । हास्टल वार्डेन गेट पर ही मिल गयी तनु 2 दिन में ही आ गयी ,?सब ठीक है न ? जी मैम कुछ अच्छा महसूस कर रही थी ।तभी उन्हें आभा मैम ने आवाज देकर बुलाया । 


एक-एक चाबी दोनों के पास रहती थी ।तनु अपने रूम आ गयी ।रूम मे वीरा को न देख कुछ अंदेशा हुआ पर थके होने के कारण सो गयी थी ।


तभी नव्या ने कंधे मे हाथ रखते हुए कहा ," कहां खोई हो चलो हम वार्डेन मैम के साथ वीरा को देखने अस्पताल जा रहे हैं तुम भी चलोगी ? तनु ने सिर हिला हामी भरी ।


हास्पीटल पहुंच तनु ने वीरा को देखा जो आंखें बंद किये लेटी थी । तभी डाक्टर ने आकर उसकी मम्मी को सान्त्वना दे कहा ," धैर्य रखिये खतरा टल गया है बहुत ही जल्दी स्वस्थ्य हो जायेगी । तनु ने धीरे से वीरा के उसका हाथ छुआ तो उसने धीरे से आंख खोलीं और तनु से धीमी आवाज में ," तनु " कहते ओंठ हिले । उसकी ये हालत देख ,तनु कुछ न बोल सुबक-सुबक रोने लगी । 


तनु दिल की बहुत कोमल थी पर क्रोध में उसका बस नहीं था । उसे अपने व्यवहार पर बहुत पश्चाताप हो रहा था । वह एक संकल्प भी कर रही थी । आज उसने एक नया पाठ सीखा था विद्यार्थी जीवन का । कभी कोई की मदद की पुकार अपनी एड़ में अनसुनी नहीं करेगी अपनी जिद छोड़ दूसरों को समझने की कोशिश करेगी। 


अपने क्रोध को संतुलित रखने की प्रतिज्ञा कर रही थी । उसे बहुत पश्चाताप हो रहा था ।अगर वीरा को कुछ हो जाता तो अपने को आजीवन माफ न कर पाती भले ही उसे कोई दोषी न ठहराता पर क्या उसकी अपनी आत्मा ? 



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