एक रात की बीबी। *भाग 1*
एक रात की बीबी। *भाग 1*
एक छोटे से कस्बे में नारायण दास और उसकी सुलक्षणा पत्नी नारायणी रहा करती थी। दोनों के कोई संतान न थी। थोड़ी बहुत खेती और मेहनत मजदूरी कर जो कुछ भी वह कमाता उससे घर का खर्चा ही चल पाता। संतान ना होने पर जब भी उनके मन व्यथित होते.. इसे अपने पूर्व जन्म के कर्म मानकर... मन शांत कर लेते और इस जन्म में अपने सत कर्मों से इहलोक ही नहीं परलोक को सुधारने का प्रयास करते ।
नारायण दास ने कस्बे के कुछ लोगों के साथ समय व्यतीत करने के उद्देश्य से अपने घर पर सत्संग करना प्रारंभ कर दिया था। सत्संग के प्रारंभ में तो कुछ ही लोग उसके घर आया करते थे। वह सब मिलकर प्रातः भक्ति गीत और भजन गाते और व्यवहारिक ज्ञान का आदान प्रदान करते। उन सत्संगीयों के लिए उनकी पत्नी नारायणी जलपान की व्यवस्था करती। धीरे-धीरे लोगों में नारायण दास के सत्संग की चर्चा होने लगी जिससे सत्संगीओं की संख्या धीरे-धीरे बढ़ने लगी। नारायणदास एक गरीब इंसान था मगर दिल से बहुत पवित्र और नेक था। मेहनत मजदूरी से जो भी कुछ वह कमाता ...अपनी पत्नी नारायणी के हाथ में सब रख देता । घर और सत्संग के जलपान का इंतजाम कैसे करना है वह सब नारायणी पर ही छोड़ देता ..।
एक रोज की बात है ...नारायणी गांव के लाला ठगिया राम की दुकान पर घर के राशन के लिए गई। तो लाला ठगिया राम ने उसे राशन देने से इनकार कर दिया। जब नारायणी ने ज्यादा अनुनय विनय किया तो उसने कहा.. "देख नारायणी तुझ पर पहले का ही काफी पैसा उधार है और फिर से मैं तुझे उधारी दे दूं ......तो भला यह कैसे चलेगा..? पहले पिछला उधार चुका दे... तब नए उधार की बात करना...!"
नारायणी ने कहा ..."लाला जी आप तो जानते हैं कि अगर आज आपने मुझे राशन न दिया तो मेरे सत्संगियों का क्या होगा ...? मेरे पति को कितनी जलालत झेलनी पड़ेगी..? उनके मन को ठेस पहुंचेगी ...? यह सारी व्यवस्था तो मैं करती हूं और... मैं आपका उधार इमानदारी से चुका दूंगी! लाला ने कहा..... नारायणी... अब और उधार में नहीं दे सकता ...? कल का क्या भरोसा...? अब तेरे पति की इज्जत तू जाने...! उससे मेरा क्या वास्ता..! मैं तो यहां पैसा कमाने के लिए बैठा हूं.... कोई खैरात बांटने के लिए नहीं ....!!!"
नारायणी की आंखें भर आई। वह हाथ जोड़कर बोली... "लाला कुछ तो रहम करो ....इस नेक काम में... कुछ तो सहयोग करो...."
लाला ने कहा ...."तो ठीक है.... एक नेक काम में तू मेरा सहयोग कर ....तो दूसरे ने कम में मैं तेरा सहयोग कर सकता हूं ...!!"
नारायणी ने कहा ...."जल्दी कहो लाला ....मुझे क्या करना होगा....?? मैं हर तरह से तुम्हारा सहयोग करने के लिए तैयार हूं ...??"
लाला ठगिआ राम के दिल की बात जुबान पर आने को बेताब हो रही थी । उसकी आंखों में अजीब सी चमक उत्पन्न हो गई । वह बोला..... "नारायणी ...तू मेरी " एक रात को बीवी बन जा" सच कहता हूं इसके बदले मैं तेरा सारा उधार माफ कर दूंगा और आज का राशन भी तुझे मुफ्त में दे दूंगा ।"
नारायणी मजबूर थी। लाला की बातों ने उसको स्तब्ध कर दिया । वह एक क्षण शांत रही और फिर आंखें बंद कर परमात्मा को याद किया ...कि "हे परमात्मा अब तू ही मेरा मार्गदर्शन कर ...मैं क्या करूं ..?" नारायणी आत्मा की पवित्र थी । उसने अपनी आत्मा की पुकार सुनी और थोड़ी देर में आंखें खोलते हुए कहा ....लाला ठीक है मुझे राशन दे दो...! मैं आज रात के लिए तेरी बीवी बनने को तैयार हूं..!! भला इतनी छोटी सी बात के लिए इतना तकल्लुफ क्यों किया....?? पहले ही कह दिया होता..!
लाला ठगिया राम ने कहा...."ले जा राशन नारायणी.. पर वादा से मुकर मत जाना ..!"
नारायणी ने कहा ..."लाला नारायणी वादा से कभी मुकरती नहीं ....!!" नारायणी राशन लेकर घर पहुंची और शाम के वक्त गोधूलि बेला में वह सजने संवरने लगी।
हारा थका नारायण दास जब घर पहुंचा तो उसने नारायणी को यूं सजते संवरते देखा तो पूछा ..."क्या कोई विशेष उत्सव है आज... नारायणी... जो तू सज संवर रही है ..??"
नारायणी ने कहा... "स्वामी आज सच में एक विशेष उत्सव है और वह भी सिर्फ मेरे लिए ....."
पर कौन सा नारायणी ...
नारायणी ने कहा ......"क्षमा करें स्वामी....."
क्या बताएगी नारायणी सच-सच बातें... या होगी अभिलाषा पूरी लाला ठगिया राम की...?? जानने के लिए पढ़िए धारावाहिक का अंतिम भाग... क्रमशः
