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दो फूल एक माली

दो फूल एक माली

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अहमदाबाद के नजदीकी गाँव, नदी किनारे स्थित था। उस गाँव में संजय और सारिका दोनों सुख चैन से रहते थे। दोनों में गहरा प्यार था। इस वजह से संजय और सारिका ने प्रेम शादी की था। संजय पुलिस की नौकरी करता था। संजय और सारिका एक दूसरे बिना एक पल भी अलग नहीं रह पाते थे। संजय जब नौकरी पर जाता था तब घर से खिड़की में से सारिका संजय को जाते हुए दूर निरखती रहती थी।

एक दिन सारिका की तबियत अचानक ख़राब हो गई। उसे उल्टियाँ होने लगी, संजय घबरा गया। वो सारिका को ऑटो से अस्पताल ले गया। वहाँ डॉक्टर ने जाँचकर के बताया कि, सारिका माँ बनने वाली है। वो सुनकर संजय बहुत खुश हो गया। वो ख़ुशी से नाच उठा। घर जाकर अगल बगल में सभी को अपनी ख़ुशी बाँटने लगा। लोगों ने संजय को ढेर सी बधाइयाँ दी और मुँह मीठा करने के लिए मिठाई माँगी।

सारिका ने सोच कर संजय को बताया कि डॉक्टर ने हमें आराम करने के लिए बताया है, इस लिए आप मेरे मायके जाओ और मेरी छोटी बहन कविता को अपने यहाँ ले आओ। वो यहाँ से पढ़ाई के लिए कॉलेज में जायेगी और घर में आ कर मेरी देखभाल भी करेगी। संजय अपनी ससुराल गया और अपने सास ससुर को ख़ुशी के समाचार दिये। सास-ससुर बहुत खुश हो गए और पूछा सारिका की तबियत कैसी है तो संजय ने बताया कि सारिका को डॉक्टर ने आराम करने के लिए कहा है। इस लिए सारिका ने बोला है कि, कविता को अपने साथ ले आना।

कविता को बताया तो वो भी जीजाजी के साथ अपनी बहन सारिका के घर जाते के लिए राजी हो गई। संजय कविता को ले कर अपने गाँव आया। अब सारिका बीमार होने से संजय की सारी जिम्मेवारी कविता के सिर आ गई। वो संजय के कपड़े, बेल्ट, बूट और टिफिन सभी चीजों का ध्यान रखने लगी और अपनी बहन सारिका को भी संभालने लगी।

कविता बहुत नटखट थी। वो बहुत शौकिन लड़की थी। धीरे-धीरे कविता को अपने जीजाजी संजय के प्रति प्यार होने लगा, वो संजय के प्रति बहुत आकर्षित थी। वो संजय को मनोमन प्यार करती थी लेकिन, सारिका को कविता की हलचल पर शक होने लगा। एक दिन कविता को अपने जीजाजी के साथ रोमांस करते देख लिया, सारिका ने संजय और कविता को बहुत डाँटा और बताया कि, कविता को मेरे मायके वापिस छोड़ आओ, लेकिन, कविता जाने के लिए राजी न थी। अगल-बगल में लोगों को पता चल गया कि, ये दोनों के बीच कोई बात है। साली, जीजाजी की आधी घरवाली होती है ऐसा मुहावरा सच लगता है। कविता, संजय से शादी करना चाहती थी। घर में रोजाना सारिका और संजय के बीच झगड़े होने लगे। संजय और सारिका बात-बात में लड़ पड़ते थे।

दुबारा सारिका ने कविता को अपने जीजा के साथ हाथ में हाथ डालके घर की ओर देख लिया था। तब भी सारिका ने संजय को बहुत डांटा और बोला कि, ये तुम्हें शोभा नहीं देता। सारिका ने अपनी बहन कविता को भी बहुत सामझाया और बताया कि, आप अपने घर चली जाओ।

सारिका ने नौ महीने बाद एक बच्चे को जनम दिया | अब कविता को यहाँ रुकना बहुत जरुरी था क्यों की, सरिता को आराम की जरुरत थी। कविता और संजय एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। इसलिए एक दिन कोर्ट में जा कर सिविल मैरीज कर लिए। संजय सरकारी नौकरी में था तो कानूनन दूसरी शादी नहीं कर सकता था। इस लिए संजय ने एक दिन सारिका को अँधेरे में रख कर डिवोर्स पेपर में उस के हस्ताक्षर करवा लिए। सारिका बहुत दुखी होने लगी लेकिन क्या करे ? वो एक दिन घर से अपने बच्चे के साथ निकलकर अपने मायके चली गई। सारिका ने अपने माता-पिताजी को ये सब कहानी सुनाई। सारिका के माता-पिताजी उलझन में पड गए और सोच ने लगे कि, अब क्या किया जाये ? क्योंकि कविता भी अपनी खुद की लड़की है। थोड़े महीने बाद, सारिका को अपने माता-पिताजी ने समझाया कि, आप और आपके बच्चे की परवरिश कैसे होगी ? इस लिए तुम अपने घर संजय के साथ चली जाओ।

आखिर में सारिका अपने घर संजय के पास जाने के लिए राजी हो गई, क्योंकि अपने बच्चे को पढ़ाना भी चाहती थी। वो अपने बच्चे के साथ अपने घर चली गई। संजय को भी ख़ुशी हुई। कविता और संजय ने सारिका से अपनी गलती के लिए माफ़ी मांगी और तीनों एक साथ सुख चैन से रहने लगे। लोग कहने लगे की ये तो दो फूल और एक माली है।


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