STORYMIRROR

Man Singh Negi

Crime Inspirational Thriller

4  

Man Singh Negi

Crime Inspirational Thriller

चोर vs चोरी

चोर vs चोरी

6 mins
373

अमित आजकल गोदाम में चोरों का आतंक मचा हुआ है। अमित ने कहा कहना क्या चाहते हो। 

मान ने कहा पिछले 10 दिनो से लगातार गोदाम से माल चोरी हो रहा है।

उससे मैं डर सा गया हूं कहीं इन चोरों की चोरी से हमारी बदनामी ना हो जाए।

उससे मैं डर सा गया हूं कहीं इन चोरों की चोरी से कही हमारा अर्थ ना कट जाए। 

सुमित ने कहा करे कोई भरे कोई क्या यह उचित है।

अमित ने कहा भैया यह उचित तो नहीं है।

परंतु कंपनी ने अपने बड़े भाई मान सिंह नेगी टीम लीडर डी एल ओ निर्माण रिटेल होल्डिंग्स नजफगढ़ शाखा का कार्यभार दिया हुआ है।

यदि गोदाम से माल कम पड़ता है। या गोदाम से माल चोरी होता है। दोनों ही स्थिति में टीम लीडर डीएलओ ही जिम्मेदार होगा।

जैसे अपने घर में पापा ही प्रधानमंत्री होते हैं। घर की गृहमंत्री अम्मा होती है। 

संपूर्ण रुप से बच्चों की जिम्मेदारी माता पिता पर होती है। 

परंतु घर के सदस्य के रूप में बच्चे या बच्चियां अपने घर में चोरी नहीं करते। 

मान ने कहा अमित आप सही कह रहे हो।

परंतु गोदाम एक कार्यालय के रूप में स्थापित है।

इसीलिए यहां कोई ना कोई कर्मचारी गोदाम का माल बहुत ही आसान तरीके से माल को चुरा कर बाहर भेजने में सफल हो रहा है।

पुष्पा ने बीच में टोकते हुए कहा माल निरीक्षण कराते समय आपको सब पर चील की तरह नजरें रखनी चाहिए। 

याद है आपका पुराना बॉस कहता था। भरोसा मतलब धोखा। इसलिए विश्वास सब पर करो। परंतु हर समय अपनी तार्किक बुद्धि का प्रयोग बहुत ही बारीकी से करो। 

जिससे सांप भी मर जाय और लाठी भी ना टूटे। 

आपको याद है स्वर्गीय पापा जी अक्सर क्या कहते थे। 

कार्यालय में चार आंख करके रहना पड़ता है। 

जिससे कोई चोर चोरी को अंजाम न दे सके।

मान ने कहा कह तो आप बिल्कुल सही रहे हो।

परंतु जब भी सामान सुबह गोदाम से निरीक्षण के दौरान बाहर निकलता है। 

उस समय व्यक्ति विशेष को पकड़ पाना अत्यधिक कठिन है।

उस समय व्यक्ति विशेष को पकड़ पाना टेढ़ी खीर है। 

क्योंकि माल का निरीक्षण करने वाला ही उसे इजाजत दे रहा है। इस व्यक्ति को जाने दिया जाए। इसका माल संपूर्ण रूप से निरीक्षण हो चुका है और सही मात्रा में है। 

सुमित ने कहा समस्या बहुत ही गंभीर है। इस प्रकार की चोरी को पकड़ने के लिए बहुत ही सावधानी बरतनी पड़ेगी।

भैया कहीं आप अपने सीधे होने के कारण भूलवश यह तो नहीं कहते। 

मान ने अश्चर्चकित होकर पूछा क्या। 

सुमित ने कहा बकरे की मां कब तक खैर मनायेगी एक दिन तो चापड के नीचे आएगी।

मान ने कहा यह बात मैं अक्सर अपनी टीम के सदस्यों से कहता रहता हूं।

सुमित ने कहा भैया आपके बार-बार बोलने से वह चोर सावधान हो चुका है।

भैया अभी मैंने आपसे कुछ भी नहीं पूछा है।

फिर भी मैं आपको आपके पूछने से पहले बता दू। जो भी गोदाम में चोरी कर रहा है। वह बड़े तरकीब से चोरी कर रहा है। वह हर दिन एक ही माल की चोरी नहीं करता होगा।

वह इस बात का विशेष ध्यान रखता है। आज मुझे कुरकुरे आइटम से चोरी करनी है। वह इस बात का भी अक्सर ध्यान रखता है। आज मुझे लेस का सामान ही चोरी करना है।

मान ने कहा आपको यह सब कैसे मालूम।

इस बारे में तो मैंने आपसे कभी बात नहीं की। 

सुमित ने कहा मैं बाजार में रहता हूं। आए दिन ना जाने कितने लोगों से प्रतिदिन मिलता हूं। जो एक दूसरे से बिल्कुल अलग है। जो ठीक उसी प्रकार अलग है। जैसे हमारी पांचों उंगलियां बराबर नहीं हो सकती।

यह बाजार का अनुभव कह रहा है। जो भी आपका गोदाम में चोर है वह बहुत ही शातिर है। वह कुछ समय के लिए बिल्कुल चोरी भी नहीं करता होगा।

जिससे आपके मन में यह धारणा पनप सकें। पेटियों में ही माल कम आ रहा है। 

मान ने कहा आप सही कह रहे हो। आपका अनुभव बहुत सटीक बैठ रहा है। 

हमारे गोदाम की कार्यशैली के लिए।

मान ने कहा जो जो माल कम होता है। उन उन पेटियों का वजन भी करवाता हूं। परंतु वह कम नहीं निकलता। 

सुमित ने कहा भैया आप यकीन करो या ना करो कोई ना कोई आपके आस्तीन का सांप है।

कोई न कोई आपके भरोसे का फायदा उठा रहा है।

कोई ना कोई आपको विश्वास में लेकर आपकी ही जड़े काटने में लगा हुआ है।

कोई ना कोई ऐसा है जो तनख्वाह के अतिरिक्त पैसा कमाना चाहता है।

कोई ना कोई आपके साथ आपका बन कर लालच से सराबोर होकर अपनी षड्यंत्रकारी नीतियों के अनुसार गोदाम से चोरी कर रहा है।

भैया आप इतने सीधे हो की आपकी बार-बार चेतावनी के बाद वह चोर सावधान हो जाता है। 

जिसके कारण आप उसे पकड़ पाने में असमर्थ हो रहे हो।

अमित ने पूछा क्या आपको किसी पर संदेह है।

मान ने कहा संदेह होना भी संदेह ही होता है। जब तक की संदेह पूरा यकीन में ना बदल जाए। 

अमित ने कहा समस्या गंभीर है आपके गोदाम की। 

क्योंकि आपके गोदाम में जो भी शख्स चोरी कर रहा है। वह बहुत ही चालाक लोमड़ी है। 

मान ने कहा महेश भोले का भक्त हमारे साथ काम करता है।

वह बहुत ही मेहनती है। वह बहुत ही तेज तर्रार है काम करने में।

जब किसी से हमारी चोरी के विषय में बात चल रही थी।

वह भी कह रहा था चोरी करना स्वास्थ्य और अपने लिए हानिकारक है।

क्योंकि चोरी का पैसा मोरी में ही जाता है।

कहने का तात्पर्य वह लगातार कह रहा था।

यदि जिस थाली में खाते हो उस थाली में छेद करोगे तो नुकसान ही होगा।

महेश लगातार अपने प्रवचन से कह रहा था। वहां चोरी नहीं करनी चाहिए। जहां आप काम करते हो। 

क्योंकि डायन भी साथ घर छोड़कर डाका मारती है। 

किसी को भी उस घर में चोरी नहीं करनी चाहिए।

जिस घर से अपना घर परिवार चलता हो। 

पास में ही खड़ा रोशन उसे बहलाने फुसलाने की कोशिश कर रहा था। 

परंतु महेश अपनी बात को रखने के लिए बार-बार यही कह रहा था। चोरी करना पाप है। 

अपने गोदाम या कार्यस्थल से चोरी नहीं करनी चाहिए।

बाजार में आप क्या करते हैं इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

परंतु अपने कार्यस्थल पर चोरी करना महापाप है।

जब हमें महसूस हुआ वह महेश को चुप कराने की कोशिश कर रहा है।

तब हम ने जोर देकर कहा गोदाम से जो भी चोरी कर रहा है। वह एक ना एक दिन इसका भुगतान अवश्य करेगा। 

यदि हम ने उसे पकड़ लिया तो हम उसे खींचकर दो चांटे अवश्य लगाएंगे और धक्का देकर कंपनी से बाहर कर देंगे।

हां अंत में हम यह अवश्य कहेंगे महेश एकदम सही कह रहा है। 

उस घर में चोरी कभी नहीं करनी चाहिए। जिस घर से अपना घर बार चलता हो।

उस घर से चोरी कभी नहीं करनी चाहिए। जिस घर से हमें रोजी रोटी मिलती हो।

उस घर में चोरी कभी नहीं करनी चाहिए। जिससे हमें दोस्तों में रिश्तेदारों में पड़ोसियों में मान सम्मान मिलता हो।

हम यहां पर यही कह सकते हैं। मेहनत की कमाई में बरकत है। बरकत से हम आगे बढ़ते है। बरकत से घर परिवार खुशहाल बनता है।  

जबकि चोरी की कमाई में अपने घर परिवार के सदस्यों का ही नुकसान होता है।

इसलिए चोरी ना करें चोरी करना अच्छी आदत नहीं है। 

चोरी करने से सिर्फ और सिर्फ निराशा बेरोजगारी और बदनामी ही मिलती है।

इसलिए चोरी करने की बुरी आदत से बचें जनहित में जारी।


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Crime