Dr Jogender Singh(jogi)

Inspirational


4.0  

Dr Jogender Singh(jogi)

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चंदा

चंदा

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चंदा !! चंदा !! चंदा !! चारों तरफ़ से लड़के लड़कियाँ चिल्ला रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट लेवल का फ़ाइनल है , बास्केटबाल का । ज्ञान भारती की टीम जीत रही है । चंदा और प्रियंका बहुत अच्छा खेल रही हैं । मिसेज़ मालती ज्ञान भारती स्कूल की स्पोर्ट्स टीचर का सीना गर्व से चौड़ा हो गया । फ़ाइनल विसल बजने तक स्कोर ज्ञान भारती अस्सी सेंट मैरी बयालीस । 

"चंदा और प्रियंका " बहुत अच्छे बेटा , खूब मेहनत करती रहो ।" मिसेज़ मालती मैच खतम होने के बाद बोली । बाक़ी लड़कियाँ भी बहुत अच्छा खेली । "सब लोग ऐसे ही खेलते रहे तो इस बार स्टेट चैम्पीयन्शिप ज़रूर जीतेंगे ।" 

"जी मेम !!!" सब ने एक साथ बोला ।

चंदा का असली नाम जहानवी है । चंदा नाम उसकी ख़ूबसूरती को देख माँ रितिशा ने रखा है ।चंदा की आँखे बहुत सुंदर हैं । एक इंद्रधनुष सा फैला है उसकी आँखो में इस छोर से उस छोर तक । एक नहीं , इंद्रधनुषों की बारात । किसीडिस्को की रंग बिरंगी रोशनी की तरह । खुली आँखो से रंगीले सपने जो देखती रहती । बात करते करते पुतलियों को ऐसे फैलाती , मानो पूरी दुनिया को आँखो में उतार लेगी ।सुतवाँ नाक, हलके भरे गुलाबी गाल । होंठ मानो किसी चित्रकार की चित्रकारी का उत्कृष्टतम रूप। माथा चौड़ा , बाल लड़कों जैसे कटे हुये ।पहनावा शॉर्ट्स और स्कर्ट खेलते हुये ।स्कूल ड्रेस सलवार कुर्ता । पार्टी में कभी साड़ी पहन लेती , बिंदी लगा लेती तो एकदम बदल जाती ।रितिशा के नैन नक़्श मिले हैं चंदा को, साथ में लम्बाई पापा दिनेश की पा गयी ।

दिनेश सिंह बैंक में सीनियर मैनेजर हैं , रितिशा गृहणी ।इकलौती बेटी है चंदा । अलमस्त चंदा , बहुत कम बोलती , बस मुस्कुराती रहती । दिनेश मज़ाक़िया स्वभाव के , रितिशा उस से चार क़दम आगे , बात बात पर फुलझड़ियाँ छोड़ती रहती ।

" नाश्ता दे दो !" तैयार हो कर दिनेश डाइनिंग टेबल पर बैठते हुये बोला ।

"अभी लायी ।"

"यह लीजिये हाज़िर है ,गर्मा गर्म पाव भाजी और चाय " रितिशा ने डाइनिंग टेबल पर कसेरोल रखते हुये बोला ।

" फीकी चाय " थोड़ी चीनी डाल दो प्लीज़ ।

"नहीं !!! डॉक्टर मेहरा ने चीनी के लिये मना क़िया है । नो शुगर मतलब नो ।" रितिशा हँसते हुये बोली ।

"यह तो अत्याचार है , बेचारे पति पर , पास आ कर बैठ जाओ , कुछ तो मीठापन आ जायेगा ", आँख मारते हुये दिनेश बोला।

"कुछ तो शर्म करो , घर में जवान लड़की है" , रितिशा फुसफुसाई । 

"चंदा , बेटा नाश्ते में आमलेट खायेगी '।

"नहीं माँ , उबला अंडा , ब्रेड मक्खन और जूस दे दो ।"

"ठीक । तू तैयार हो कर आ जा , तब तक अंडे उबल जाएँगे ।'

"मैं ड्रेस पहन कर आती हूँ ।" चंदा बोली ।

"मेरा रूमाल नहीं मिल रहा , देखना ज़रा ।" दिनेश की आवाज़ आयी ।

"अभी देती हूँ । यह लो रूमाल , सामने ही तो रखा है । "

"लाओ दो , दिनेश रितिशा को अपनी तरफ़ खींच कर बोला ।

"सटक गए क्या , छोड़ो चंदा आ जायेगी ।"

"अभी ड्रेस बदल रही है ,दिनेश उसके गाल चूमते हुये बोला ।"

"आ जायेगी , छोड़ो ।" रितिशा हाथ छुड़ाते हुए बोली ।

"माँ नाश्ता !" 

'देती हूँ । यह लो , ब्रेड मक्खन ,जूस । मैं अंडे छील देती हूँ ।'

"मैं जा रहा हूँ । बाई "

"बाई पापा ।'

"नाश्ता कर चंदा ने बैग उठाया , "बाई माँ "

"देख टिफ़िन और बोतल रख ली ना ।"

"हाँ माँ बाई ,"

"बाई , संभल कर स्कूटी चलाना ।"

"दो साल से चला रही हूँ , चिंता न करो , शाम को बास्केटबाल की प्रैक्टिस के बाद आऊँगी ।"

"अंधेरा होने से पहले आ जाना ।"

"ओके माँ ।बाई "

पाँच बजे सभी लड़कियाँ बास्केटबॉल कोर्ट पर पन्हुच गयी ।मिसेज़ मालती ने सब को बुलाकर समझाया ,

"देखो अभी स्टेट चैम्पीयन्शिप में एक महीना बाक़ी है , खूब मेहनत से तैयारी करनी है । चंदा और प्रियंका नैशनल खेल चुकी है ।बाक़ी लोग भी अच्छा खेल रही हैं ।ठीक , चलो अब प्रैक्टिस शुरू करते है ।"

"ऐसे । चंदा तुम लम्बे थ्रो की प्रैक्टिस करो । प्रियंका को देखो , कितनी सफ़ाई से पास करती है ।"

सात बजे चंदा स्कूटी ले कर निकली ।स्कूटी बहुत संभाल कर चलाती है । पापा ने एक बार कहा था , हुनर स्कूटी या कोई भी गाड़ी तेज चलाने में नहीं , कंट्रोल में चलाने में है । चंदा ने यह बात गाँठ में बाँध ली । कभी भी तेज स्कूटी नहीं चलाती ।स्टेट चैम्पीयन्शिप के बारे में सोचती चंदा माल रोड से अपने घर की तरफ़ मुड़ रही है , तभी धाड़ !! पीछे से आती तेज रफ़्तार कार ने स्कूटी को टक्कर मार दी , चंदा और स्कूटी हवा में उछल कर दूर जा गिरे ।कार बेक़ाबू हो डिवाइडर से टकराई , फिर सीधी हुयी और यह जा वोह जा , ग़ायब । भीड़ इकट्ठी हो गयी । चंदा के माथे से खून बह रहा है , पैर में बहुत तेज दर्द हो रहा है । दर्द के मारे चंदा को बेहोशी आ गयी ।लोगों ने एक सौ बारह नम्बर डायल किया । चंदा को लेकर पास के निजी नर्सिंग होम में भर्ती करा दिया । 

"हेल्लो ! दिनेश जी बोल रहें हैं ।"

"जी ! बोल रहा हूँ , आप कौन? "

"आप अम्बर नर्सिंग होम आ जाइए , आप की बेटी का ऐक्सिडेंट हो गया है , मैं और मेरे साथियों ने उसको यँहा भर्ती कराया है ।"

"आप कौन बोल रहें हैं ? "

 "मैं तेजिंदर सिंह सिपाही एक सौ बारह से बोल रहा हूँ ।"

दिनेश ने रितिशा से कहा , "जल्दी चलो ।"

"क्या हुआ ?"

"रास्ते में बताता हूँ , चंदा का ऐक्सिडेंट हो गया , पुलिस वालों ने उसे अंबर नर्सिंग होम में भर्ती कराया है ।वँही चलना है ।"

दिनेश गाड़ी निकालता हुआ बोला , रजनीश को फ़ोन कर दो , वो भी पन्हुच जाए ।

"हेल्लो रजनीश !!"

"हाँ दीदी बोलो ।"

"तुम जल्दी से अम्बर नर्सिंग होम पन्हुच जाओ ।"

"क्या हुआ दीदी ?" 

"चंदा का ऐक्सिडेंट हो गया है" , रोते हुये रितिशा बोली ।

"घबराओ नहीं दीदी मैं , पहुंच रहा हूँ ।"

"हे भगवान , मेरी बच्ची की रक्षा करना" , हाथ जोड़ रितिशा बुदबुदाई।

"दौड़ते हुये दिनेश रितिशा अम्बर नर्सिंग होम की इमर्जेन्सी पन्हुचे ।"

रजनीश पहले ही पन्हुच गया ।

"कैसी है चंदा , कँहा है ?" रितिशा बोली

'लेटी है दीदी , माथे पर हल्की सी चोट आयी है , पर डॉक्टर बता रहें हैं कि दाहिने पैर की बड़ी हड्डी टूट गयी है।वो देख़ो डॉक्टर साहब इधर ही आ रहें हैं" ",रजनीश ने बताया ।

"डॉक्टर साहब , कैसी है मेरी बेटी ?" दिनेश बोला ।

"दिनेश जी आप की ही बेटी है ? दाहिने पैर की फ़ीमर (सबसे बड़ी हड्डी )कई जगह से टूट गयी है । ऑपरेशन करना पड़ेगा । डॉक्टर बत्रा आते ही होंगे ।" 

"ठीक तो हो जायेगी न डॉक्टर साहेब ? रितिशा रोते हुये बोली । वो चुपचाप क्यों लेटी है?"

"देखिये अभी उसे दर्द और नींद का इंजेक्शन दिया है । आप चार डोनर खून देने के लिये बुला लीजिये , डॉक्टर बत्रा भी आ गये ।"

"सर , यह एक्सरे है , ड्यूटी डॉक्टर ने डॉक्टर बत्रा को दिखाते हुये बोला ।

प्लेट डालनी पड़ेगी चार जगह से टूटी है फ़ीमर , ऐक्सिडेंट कैसे हुआ ? 

तेज़ रफ़्तार कार ने टक्कर मारी ।

ओह इसलिए , देखिये ऑपरेशन तो करना ही पड़ेगा , और कोई चारा नहीं है।डॉक्टर बत्रा बोले ।

ठीक हो जायेगी न डॉक्टर साहब रितिशा ने रोते हुये पूछा ।

देखिये ! कोशिश करना हमारा काम है , ठीक ऊपर वाला करता है , ऑपरेशन के अलावा कोई चारा नहीं है ।आप लोग पेपर साइन कर दीजिये और काउंटर पर पैसा जमा कर दीजिए । बेहोशी वाले डॉक्टर को बुला लीजिये डॉक्टर बत्रा ने ड्यूटी डॉक्टर से बोला।

जी सर!!!

चार घंटे ऑपरेशन चला । 

डॉक्टर साहब , कैसी है चंदा ? 

शी इस स्टेबल नाउ , जान का ख़तरा नहीं है , रात भर आइ सी यू में रखेंगे , सुबह रूम में शिफ़्ट कर देंगे । रात में एक आदमी रुके बाक़ी लोग घर जा सकते हैं , डॉक्टर बत्रा बोले ।

डॉक्टर साहेब , वो फिर से बास्केटबाल खेल पायेगी ? दिनेश ने पूछा 

देखिये मिस्टर दिनेश मैं कोई भविष्यवक्ता तो हूँ नहीं , पर मेरा अनुभव कहता है , फिर से बास्केटबाल या कोई भी खेल खेलना लगभग असम्भव है । मैं झूठा आश्वासन नहीं दे सकता । लेट्स होप फ़ोर द बेस्ट ।दिनेश के कन्धे पर हाथ रखते हुये डॉक्टर बत्रा ने कहा।

थैंक्स डॉक्टर साहब ।

सुबह आठ बजे सिस्टर बुलाने आयी । दिनेश , रितिशा दौड़े दौड़े चंदा के पास पन्हुचे ।

सिर पर छोटी सी पट्टी बंधी है , दाहिना पैर तकिया लगा कर ऊँचा किया गया है , चंदा मुस्कुरा रही है ।

कैसी है मेरी चंदा , अभी भी मुस्कुरा रही है , पगली रितिशा बोली।

कैसे हो गया बेटा यह सब ?

पता नहीं माँ , धाड़ की एक आवाज़ आयी ,फिर मैं बेहोश हो गयी ।

दर्द हो रहा है बेटा?

थोड़ा थोड़ा सा।कितने दिन में ठीक हो जाऊँगी मैं सिस्टर जी , चंदा ने सिस्टर से पूछा ।

थ्री मन्थ्स कम से कम सिस्टर बोली।

चंदा सोच में पड़ गयी , एक महीने बाद स्टेट चैम्पीयन्शिप है , मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ ?

यह नहीं हो सकता । ऐसा कैसे हो सकता है ? अब मैं क्या करूँ , चंदा को रोना आ रहा है ,पर वो मुस्कुराती रही ।

कोई नहीं अगले साल स्टेट खेल लूँगी , चंदा ने ख़ुद को समझाया ।

पाँच दिन बाद अस्पताल से छुट्टी हो गयी ।

एक फ़िज़ीओथेरपिस्ट को मैं आपके घर भेज दूँगा , वो सारी कसरत बतायेगा और करवायेगा । मनोज नाम है ।चाहें तो उसका मोबाइल नम्बर नोट कर लीजिये ।डॉक्टर बत्रा ने नम्बर बताया । पंद्रह दिन बाद दिखाने आयिएगा , फिर सहारे से चलाना शुरू करेंगे। 

थैंक्स डॉक्टर साहब ।

चंदा को ले कर घर आ गये । मनोज दूसरे दिन से आने लगे । अंकल मैं फिर से बास्केटबाल खेलूँगी ना ।

हाँ बेटा ज़रूर , पर उसके लिये बहुत मज़बूत बनना पड़ेगा ।

रितिशा ने मनोज से कहा , क्यों झूठा दिलासा दे रहें हैं आप ? डॉक्टर बत्रा कह चुके है कि इसका दोबारा खेलना असम्भव है ।

वो कोशिश तो करेगी इसी बहाने , और क्या पता खेलने भी लगे ।

पंद्रह दिन बाद चंदा सहारे से चलने लगी , अंकल अब तो मैं पक्का खेलूँगी ।

अगर एक महीने में तुम बिना सहारे के चलने लगी तो ।

ओके अंकल ।मनोज से मानो चंदा ने वादा कर लिया ।

मिसेज़ मालती का फ़ोन है 

कैसी हो चंदा ? हम लोग सेमीफ़ाइनल में क्लोज़ मार्जिन से हार गये । 

कोई नहीं मेम अगले साल ट्रोफ़ी हमारी होगी , इस साल प्रियंका अकेली पड़ गयी होगी।

हाँ बेटा अगले साल पक्का , रुँधे गले से मिसेज़ मालती बोली वो जानती है कैसे खेल पाएगी चंदा , बाई बेटा।

बाई मेम।

"सुनो यह मनोज पता नहीं क्या क्या सपने दिखा रहा है चंदा को रोकिये उसको , बाद में कितना दुःख होगा चंदा को , डॉक्टर बत्रा साफ़ साफ़ बोल चुके हैं कि चंदा फिर से नहीं खेल पायेगी ।" रितिशा ने दिनेश से कहा। 

"वक़्त आने पर बता दिया जाएगा चंदा को ।"

चंदा सब सुन कर चुपचाप वापिस आ , बिस्तर पर लेट गयी ।उसकी मुस्कुराहट खो गयी ।शाम को मनोज से चंदा ने पूछा , "अंकल आप झूठ तो नहीं बोलोगे ? "

"नहीं बेटा ।क्या बात है ? "

"आप को सचमुच लगता है , मैं फिर से खेलूँगी ?" 

"सौ प्रतिशत , बस तुम ठान लो , मेहनत करनी पड़ेगी ।"

"मैं करूँगी मेहनत ।"

चंदा के जबड़े भींचे रहने लगे , उसने मुस्कुराना छोड़ दिया ।महीने भर बाद बिना सहारे के चलने लगी ।मनोज अंकल उसको पूरा सहयोग करते ।

पाँचवे महीने तक चंदा लंगड़ा कर दौड़ने लगी ।बास्केटबाल टीम में उसका चयन मुश्किल से हो पाया , वो भी मिसेज़ मालती की पैरवी से ।

"देखो अख़बार में क्या छपा है !"! रितिशा दौड़ती हुयी आयी ज्ञान भारती स्कूल ने बास्केटबाल की स्टेट चैम्पीयन्शिप जीत ली ।

दिखाओ दिनेश बोला , "अरे वाह बड़ी अच्छी खबर है ।"

"आगे देखो बेस्ट प्लेअर ओफ़ मैच जहानवी सिंह" ज्ञान भारती की छात्रा होगी दिनेश बोला 

"भुलक्कड़ दास , अपनी चंदा है जहानवी सिंह ।"

दोनो ख़ुशी से रोने लगे ।तभी घंटी बजी , सामने मुस्कुराती चंदा खड़ी है , हाथ में बेस्ट प्लेअर ओफ़ मैच की ट्रोफ़ी लिये ।मुस्कुराती चंदा , और उसके पीछे खड़े हैं मनोज अंकल । संबल बन कर ।

"क्यों रो रहे हो" हीररांझा चंदा बोली ।सभी ज़ोर से हँस दिये ।



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