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anil garg

Crime Thriller

4  

anil garg

Crime Thriller

बदमाश कंपनी-6

बदमाश कंपनी-6

15 mins
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"साली अगर इस बार अपन से उल्टा बकवास किया तो यही खोपड़ी खोल दूंगा" मस्ती ने धीमे किंतु खूंखार स्वर में फरजाना को बोला था। मस्ती की बात सुनकर फरजाना को एहसास हुआ कि वो गुस्से में क्या कर बैठी थी। उसने बेचारगी भरी नजरों से मस्ती को देखा।

"यार तू भी बिना सोचे समझे बोलकर मेरे लिए मुसीबत खड़ी कर रहा है...तू खुद सोच कोई किसी को इतनी बेरहमी से मारकर क्या अपनी खोली में चैन से सोता हुआ मिल सकता है क्या...अगर मैंने कुछ किया होता तो सब कुछ जानते बुझते भी तेरे साथ दोबारा क्यों यहां मरने के लिए आती" फरजाना ने दबे हुए स्वर में मस्ती को बोला तो मस्ती ने भी अफसोस भरी नजरों से उसे देखा। फरजाना की बात में दम था और उसकी बातों के वजन को मस्ती महसूस कर चुका था।

"चल अब तू भी चुप रहना और मैं भी चुप रहूंगा...जब न तूने कुछ किया है और मैंने कुछ किया है तो अपन क्यों खाली पीली डरे" मस्ती ने फरजाना को बोला तो फरजाना ने भी सहमति में सिर को बुलाया।

"साहब !ये एक जोड़ी कपड़े मिले है जो कि खून से लथपथ है" तभी यादव ने इंसेफ्टर राज के पास आकर बोला।

"क्यो बे साले खून करके कपड़े भी यही बदल लिए...इतना बड़ा जिगरा लाते कहाँ से हो बेटा" इंस्पेक्टर राज ने मस्ती की ओर देखकर बोला।

"साहब...मौके पर हमारे मिलने से ही दो जमा दो का हिसाब मत लगाओ...पहली बात तो वो मेरे कपड़े नहीं हो सकते..क्योंकि अपन की अक्खा जिंदगी में छह महीने तो जेल की वर्दी पहनना होता है और बाहर की छह महीने की जिंदगी के लिए सिर्फ दो जोड़ी कपड़े सिलवा कर पहनता है और इस वक़्त एक जोड़ी अपन ने पहना हुआ है और दूसरा जोड़ी अपन के मकान की छत पर सूख रहा है" मस्ती ने अजीब से अंदाज में राज को जवाब दिया तो राज बस उसे अपलक देखता रह गया।

"चलो मान लिया...तुम लोगों ने इस आदमी को नहीं मारा...तो तुम लोग इसके पास करने क्या आये थे" इंस्पेक्टर राज ने इस बार संयत स्वर में पूछा।

"इसका जवाब मैं देती हूँ साहब" मस्ती के मुंह खोलने से पहले ही फरजाना बोल पड़ी थी।

"चलो तुम बताओ" राज इस बार फरजाना से मुखातिब हुआ। उसके बाद फरजाना सिलेसिलेवार तरीके से सारी बात बताती चली गई। सारी बात सुनकर इंस्पेक्टर राज ने उन दोनों के चेहरे पर नजर डाली।

"यादव जिस बन्दे को आज उस मोबाइल को बचते हुए पकड़ा है..उसका क्या नाम है" राज अब यादव से मुखातिब हुआ।

"साहब नासिर नाम है उसका" यादव ने कुछ याद करते हुए बोला।

"इस लड़की के हिसाब से तो इसके साथी का नाम सुल्तान है..तो मोबाइल अगर इन दोनों ने कल रात को इस लड़की से उड़ाया था तो मोबाइल के साथ सुल्तान को पकड़ा जाना चाहिए था..लेकिन मोबाइल मिला है किसी तीसरे बन्दे के पास..ये मामला तो पेचीदा होता जा रहा है यादव...अब ये सुल्तान कहाँ गायब है" राज सोच की गहराई में डूबता हुआ बोला।

"साहब ऐसा तो नहीं है की नौशाद और सुल्तान के बीच उस मोबाइल को लेकर झगड़ा हुआ हो..और झगड़े में सुल्तान ने इसे टपका दिया हो...और अपने किसी तीसरे साथी को उस मोबाइल बेचने के काम पर लगा दिया हो..और खुद फरार हो गया हो" इस बार मस्ती ने बिना पूछे अपनी सोच उन लोगों के सामने रख दी। राज इस वक़्त अपलक मस्ती को ही देखें जा रहा था।

"महान हो गुरु तुम तो..साला केस ही सॉल्व कर दिया तुमने तो..हम तो साला मटर छिलने के लिए महकमे में भर्ती हुए है और ये यादव साहब तो पहले कर्जा लेकर महकमे में भर्ती हुए है और अब महकमे की बैंड बजाकर अपना कर्जा उतारने की जुगत भिड़ाते रहते है" राज पता नहीं क्या बोले चला जा रहा था। उस वक़्त वहां पर सिर्फ यादव के चेहरे पर जलालत भरे भाव थे...बाकी दोनों जन तो असमंजस से बस राज को ही देख रहे थे।

"साहब कुछ गलत बोला क्या मैं....जो मुझे लगा वो आपको बोल दिया" मस्ती ने राज की ओर देखकर बोला।

"यादव मुझे भी इस मस्ती की बात में ही दम लग रहा है...खोली की अच्छे से तलाशी लो...मुझे भी लग रहा है कि इसे सुल्तान ही मार कर फरार हुआ है..क्योंकि वो पहले से ही यहां रह रहा था...तो कपड़े बदलने की सहूलियत भी सबसे ज्यादा उसी के पास थी" राज ने यादव की ओर देखकर बोला।

"साहब फिर अब तो हमारे ऊपर आपका शक नहीं रहा है न" फरजाना उत्साहित स्वर में बोली।

"शक की गुंजाइश तो खत्म हो गई है तुम लोगों पर...लेकिन यहां से जाने कि इजाजत तभी मिलेंगी जब फोरेंसिक वाले तुम लोगों के हाथों के निशान ले लेंगे" राज का समूचा रवैया अब उन दोनों के प्रति बदल चुका था। राज की बात सुनकर अब मस्ती और फरजाना चुप्पी साध कर खड़े हो गए थे।

"साहब अब तो आपका मोबाइल मिल गया है...अब तो मेरे उस चरसी दोस्त को छोड़ दो"मस्ती ने चिरौरी भरें स्वर में कहा।

"मस्ती गुनाहगारों के प्रति अपनी पॉलिसी जीरो टॉलरेंस की है...जिसने गुनाह किया है...वो अपने किये की सजा तो भुगतेगा ही..उस चरसी ने मेरी जेब तराशने का काम तो किया ही है ना..तो उसे उसकी सजा तो मिलेगी...और यही सलाह मेरी तुम लोगो को भी है..जब तक मैं इस इलाके में हूँ...कोई गलत काम मत करना...क्योंकि फिर मैं तुम लोगों को भी नहीं बख्शूंगा" इंस्पेक्टर राज ने चेतावनी भरे लहजे में बोला। राज साहब के तेवर देखते ही दोनों ने अब चुप रहने में ही अपनी भलाई समझी। तभी वहां फोरेंसिक की टीम धड़धड़ाती हुई घुसी और अपने काम मे जुट गई। मस्ती और फरजाना के भी फिंगर प्रिंट लिए गए...उसके बाद ही उन दोनों को वहाँ से मुक्ति मिली। राज का उन लोगो को जाने का इशारा मिलते ही मस्ती और फरजाना वहां से गधे के सिर से सिंग की तरह से गायब हो चुके थे। फरजाना अब अपनी खोली की ओर जा रही थी और मस्ती भी उसके पीछे ही चला आ रहा था। चरसी के छूटने के अभी कोई आसार नजर नही आ रहे थे...और कल्लन ने उसे जल्द से जल्द चौथा आदमी ढूंढ़ने के लिए बोल दिया था। इसी उधेड़बुन में मस्ती अब फरजाना की खोली के सामने पहुंच चुका था।

"यार ...चलो एक कप चाय पीकर चले जाना...इतना पक गए आज तो..न रुपैया न आना..गिलास तोड़ा बारह आना" फरजाना ने अफसोसनुमा स्वर में कहा।

"चलो चाय तो पिला ही दो...देखते है तुम्हें चाय भी बनानी आती है या नही" मस्ती ने मजे लेने वाले स्वर में कहा। फरजाना ने उसे अजीब सी नजर से घूरा और अपनी खोली में घुस गई। मस्ती भी उसके पीछे पीछे खोली में प्रवेश कर गया।

"अकेली रहती हो...और कोई आगे पीछे नहीं है क्या" मस्ती ने खोली में इधर उधर नजर दौड़ाते हुए कहा।

"जब से होश सम्हाला है...तब से अकेली ही हूँ...जिसने जन्म दिया था..वो जन्म देते ही ऊपर चली गईं...जिसने पैदा किया था...वो पैदा होने से पहले ही छोड़कर भाग गया था...बस ऐसी ही अक्खा जिंदगी की कहानी है अपुन की" फरजाना ने चाय को गैस पर बनने के लिए रखते हुए बोला।

"इस चमड़ी के धंधे में कैसे आ गई" मस्ती पता नहीं क्यों फरजाना में इतनी दिलचस्पी ले रहा था।

"शराफत की जिंदगी भी बसर करने की सोची थी....लेकिन साले जितने भी शरीफो के दरवाजे पर गई....साले दरवाजा बंद करते ही शैतान बन जाते थे...फिर जमाने का दस्तूर ही समझ में आ गया...जब साली शराफत की जिंदगी में भी इज्जत ही लूटनी थी तो फिर ये बेइज्जती की जिंदगी ही भली लगी अपन को...अब साला कोई कम से कम अपुन की मर्जी के बिना तो मुझे छू नहीं सकता" फरजाना के स्वर में जिंदगी की ठोकरों का सारा दर्द उभर आया था।

"अब जिंदगी भर इसी रास्ते पर चलने का इरादा है या कुछ और भी कर सकती हो" मस्ती ने अपनी तरफ बढ़े हुए चाय के कप को पकड़ते हुए कहा।

"तमन्ना तो है कि साला कोई जैकपॉट लग जाये और किसी अच्छी सी जगह सेटल हो जाऊं...लेकिन इस खोली और ये बस्ती...साला फुकरो के बीचों में रह रह कर अपुन की किस्मत भी फुकरी ही हो गई है" फरजाना ने व्यंग्य भरें स्वर में कहा।

"जैकपॉट लगते नहीं है...जैकपॉट लगाने पड़ते है...उसके लिए हिम्मत चाहिए होती है...है तुम में इतनी हिम्मत" मस्ती ने फरजाना को गहरी नजरों से देखा।

"हिम्मत की बात मत कर...वक़्त पड़ने पर किसी का भी उस नौशाद जैसा हाल कर सकती हूँ...जिसकी लाश अभी तू भी देख कर आ रहा है" फरजाना एकाएक दंभ भरें स्वर में बोली लेकिन मस्ती की आँखों में शक की एक परछाई तब तक अपना डेरा जमा चुकी थी।

"कहीं तुमने ही तो नौशाद का वो हाल नहीं किया" मस्ती का शक उसकी जुबान पर आ चुका था। फरजाना उसकी बात सुनते ही सकते कि हालत में मस्ती को घूरती रही।

"अगर उसका हाल मैंने किया होता तो वो पुलिसिया न मुझे वहां से आने देता और न तुम्हें" फरजाना ने मस्ती को बोला।

"बात में तेरी दम है..वो साला बहुत तेज पुलिसिया है....लगता है अभी ताजा ताजा सीधे इंस्पेक्टर की पोस्ट पर ही भर्ती हुआ है...इसलिये अभी इतने कड़क तेवर है" मस्ती ने इन्स्पेक्टर राज के बारे में बोला।

"लगता है मस्ती नाम का ये हीरो डर गया उस पुलिसिये से" फरजाना उसकी और देखकर मुस्कराते हुए बोली।

"मस्ती के तो नाम में ही सिर्फ मस्ती है फरजाना डार्लिंग...डरना किस चिड़िया का नाम है...ये तो मैंने जाना ही नही है...अभी इसके इलाके में ही अपन ऐसा काम करने वाला है...जरायम की दुनिया में मस्ती का नाम आसमान में चांद सितारों के बीच में चमकेगा" मस्ती जोश में होश खो चुका था।

"ऐसा क्या तू बैंक मे डालना वाला है....जो तेरी इतनी जय जयकार होने वाली है" फरजाना उसकी तरफ व्यंग्य भरी नजरों से देखते हुए बोली।

"तू जैकपॉट लगने की बात कर रही थी न...चल तेरा जैकपॉट मैं लगवाता हूँ...कब तक ये दो तीन सौ रुपए के लिए लोगों के साथ सोती रहेगी....एक ही बार में तुझे लखपती बनवा दूंगा" मस्ती कुछ सोचते हुए बोला।

"अच्छा..उसके लिए मुझे क्या करना होगा" फरजाना को भी अब मस्ती की बातों में दिलचस्पी होने लगी थी।

"हमारे गैंग में शामिल होना होगा...देख अपन छ महीने अंदर और छह महीने बाहर रहता है...लेकिन इस बार अपन अंदर जाने के वास्ते बाहर नहीं आया है...इस बार अपन कोई बड़ा हाथ मारेगा...उसके बाद इस इलाके को तो क्या इस शहर को ही छोड़कर एक नई दुनिया बसाएगा "मस्ती खुली आंखों से ख्वाब देखते हुए बोला।

"सपना तो बड़ा मस्त दिखाया है तुमने मस्ती...लेकिन तेरी गैंग में तो वो चरसी जैसे चिंदीचोर है...उनके साथ क्या बड़ा हाथ मारेगा" फरजाना पहले अच्छे से मस्ती और उसके साथियों को तौल लेना चाहती थी।

"वो चिंदीचोरी इसलिए करते है क्योंकि अभी तक कोई बड़ा मौका न अपन को मिला और न उन लोगों को मिला...लेकिन अब किस्मत से एक मौका हाथ आया है...लेकिन ऐन वक़्त पर वो चरसी अंदर हो गया है...इसलिए तुझे अपने साथ आने के लिए बोल रहा हूँ...छोड़ ये चमड़े के जहाज कब तक चलाएगी फरजाना...एक दिन ये जवानी ऐसे ही ढल जाएगी...फिर कोई मांगे से भीख भी नही देगा...इसलिए बोलता हूँ...ये जिस्म बेचने का धन्धा छोड़ और मेरे साथ आ जा...जब मैं उन नशेडियों को कभी भूखा नहीं सोने देता तो..भूखी तो तुझे भी मरने नहीं दूंगा" मस्ती ने फरजाना की ओर देखकर बोला...फरजाना उसकी और बिना पलक झपकाए देखे जा रही थी...तभी फरजाना आगे बढ़ी और मस्ती के सीने से लिपट गई। मस्ती को कुछ पल तो समझ ही नहीं आया कि ये सब क्या हुआ...लेकिन फिर उसने भी फरजाना को अपने से लिपटा लिया।

"आज तक ये बात मुझे किसी ने नहीं बोला की तू ये जिस्म बेचने का धंधा छोड़ दे ...मैं तुझे कभी भूखी मरने नही दूँगा..तेरी इस बात ने इस रंडी के दिल को भी टच कर लिया यार...बोल क्या करना होगा मुझे...फरजाना तेरे लिए अब अपनी जान भी दे देगी"फरजाना ने अपने सिर को मस्ती के सीने से हटाकर उसे बाहों में भरे हुए ही उसकी आंखों में झाँकते हुए बोली।

"मेरे ठिकाने पर चलो...वही अपने बाकी साथियों से भी तुम्हें मिलवा दूँगा...और क्या करना है..वो भी बता दूँगा" मस्ती ने फरजाना से अलग होते हुए बोला।

"ठीक है...मैं चलती हूँ तेरे साथ...लेकिन एक बात बोल देती हूँ की कभी मुझे धोखा मत देना...वरना एक रंडी के प्यार और नफरत में कोई फर्क नहीं होता...रंडी का प्यार भी आदमी को बर्बाद ही करता है और नफरत तो है ही बर्बादी की बुनियाद" फरजाना ने एक कुटिल मुस्कान के साथ मस्ती को बोला।मस्ती उसकी बात सुनकर अपलक उसे देखता ही रह गया था।

                                

फरजाना इस वक़्त मस्ती के साथ उस चौक के मकान में प्रवेश कर चुकी थी। मकान में इस वक़्त सिर्फ बेवड़ा ही एक चारपाई पर पड़ा हुआ खर्राटे मार रहा था। गंजेडी उर्फ नाटे का कही अता पता नहीं था। फरजाना ने उस मकान में चारों तरफ नजर दौड़ाई। इस एक मंजिला मकान में चार कमरे बने हुए थे...साथ मे दो रसोई और दो बाथरूम भी बने हुए थे। मकान भले ही पुराने टाइप का बना हुआ था। लेकिन बना हुआ सलीके से था।

"बहुत बड़ा मकान लिया हुआ किराए पर...इतना किराया चुकाता कैसे है तू" फरजाना ने हैरानी से देखकर बोला।

"किराए पर नहीं है...कब्जाया हुआ है...इस मकान का कोई वारिस नहीं है...इलाके के कुछ प्रोपर्टी डीलर इसको जाली कागज बनाकर बेचने की कोशिश कर रहे थे...लेकिन जब से अपन इस मकान में घुसे है...कोई इधर पैर करके भी नहीं सोता" मस्ती ने इलाके में अपनी धमक के बारे में बताया।

"बड़ी वट है तेरी तो इलाके में..इसका मतलब काफी बड़े बड़े कांड किये हुए तुमने इस इलाके में"फरजाना ने मुस्करा कर बोला।

"हाँ..सबसे पहले अपनी ही माशूका के बाप की खोपड़ी खोल दी थी..बस वही से अपनी जेल यात्रा शुरू हुई थी...उसके बाद से सरकार ने अपनी एक खोली जेल में परमानेंट अलॉट किया हुआ है...क्योंकि छ महीने अपन उधर रहता ही है" मस्ती ने साफगोई से अपने बारे में बताया।

"सिर्फ मारामारी में ही अंदर जाता है या..किसी और धन्धे का भी हुनर है" फरजाना ने मुस्करा कर पूछा।

"दुनियां में ऐसा कोई ताला नही बना..जिसे मस्ती न खोल सके...इसलिए किसी न किसी सेठ की तिजोरी को साफ कर ही देता हूँ..जब ग्रह चाल विपरीत होती है तो जेल में...और सीधी होती हैं तो रेल में" मस्ती ने भी मुस्कराते हुए जवाब दिया।

"ये जो चारपाई पर पड़ा है..ये तुम्हारा साथी है" फरजाना ने बेवड़े के ऊपर एक नजर डालते हुए कहा।

"हाँ! अपना ही साथी है...हर वक़्त दारू के नशे में रहता है...यूं समझ लो कि सुबह उठकर मुंह भी दारू से धोता है और कुल्ला भी दारू से ही करता है..लोग साले रोटी के साथ पानी पीते है..ये भाई रोटी के साथ भी दारू पीता है" मस्ती ने बेवड़े की शान में कसीदे पढ़े।

"क्या बात है...तुम्हारे पास तो एक से बढ़कर एक नगीने है..तभी आज तक कोई बड़ा हाथ नहीं मार सके" फरजाना ने मस्ती की बात सुनकर बोला।

"अभी सिर्फ इसके अवगुण बताये है..अब गुण भी सुन लो..फिर सच में इसे नगीना ही बोलोगी।

"ऐसा क्या गुण है इस बेवड़े में" फरजाना ने थोड़ी हैरानी से पूछा।

"इसके चाकू का निशाना अचूक है...ये आवाज सुनकर अँधेरे में भी उस आवाज वाले कि जान ले सकता है" मस्ती ने अब बेवड़े के गुणों का बखान किया।

"एक तालातोड़..एक अचूक निशानेबाज..उसके बाद भी आज तक कोई बड़ा काम नहीं कर पाए....बहुत अफसोसजनक है मस्ती...अब तक तुम्हे इस अपराध की दुनिया का सबसे बड़ा डॉन होना चाहिए था"फरजाना की आवाज से सचमुच मस्ती के लिए दुःख झलक रहा था। अभी फरजाना की बात पूरी हुई ही थी की गंजेडी ने मकान में कदम रखा..उसकी चाल बता रही थी कि बन्दा इस वक़्त फूल तरंग में था। गंजेड़ी धीरे धीरे आगे बढ़ा और मस्ती के सामने आकर खड़ा हो गया।

"मस्ती भाई...अपना चरसी कोतवाली में बन्द है भाई..उसे कोतवाली से छुड़ाओ न मस्ती भाई" गंजेड़ी को उस चरसी के साथ कुछ ज्यादा ही मोहब्बत थी।

"मैं कोशिश कर चुका हूँ...उसके चक्कर मे ही आज अपन मर्डर के केस में फंसने से बचा है" मस्ती ने ये बोलकर एक झुरझुरी ली।

"भाई फिर तो मुझे ही कोतवाली जाना पड़ेगा...चरसी भाई है अपना...उसे ऐसे ही कोतवाली में बन्द नहीं रहने दूँगा" गंजेडी ने तरंग भरी आवाज में बोला।

"क्या करेगा तू" मस्ती ने थोड़ा सा मुस्करा कर पूछा। अभी तक गंजेडी की नजर मस्ती से थोड़ा सा अलग हटकर खड़ी फरजाना पर नहीं पड़ी थी।

"चरसी का कट्टा मेरे पास है...अभी जाकर अपुन कोतवाली पर हमला कर देगा और अपने भाई को बचाकर लाएगा" गंजेडी की बात सुनकर मस्ती के होंठों की मुस्कान और ज्यादा फैल गई।

"लगता है आज असली कटिंग वाला माल पीकर आया है.. तभी आज तरंग में झूम भी रहा है...चल जा सोजा अब...ज्यादा नशे की ऐसी तैसी मत कर...नहीं तो तेरी लाश भी कोतवाली से बाहर नहीं आ पायेगी" मस्ती ने अब उसे हल्का सा हड़काते हुए बोला।

"तो ये है तुम्हारा दूसरा सिपहसालार गंजेडी" इतनी देर से गंजेडी को मुस्करा कर देख रही फरजाना अचानक से बोली। अब गंजेडी की नजर भी फरजाना पर पड़ चुकी थी।

"भाभी प्रणाम" ये बोलकर गंजेडी फरजाना के पैरो में दंडवत प्रणाम की मुद्रा में लेट गया।

"अबे खड़ा हो..हम तो वैसे भी जगत भाभी ही है...पहले के जमाने में लोग हमें नगरवधु बोलते थे..अब नया जमाना नया दौर और नया नाम" फरजाना अपने कदम पीछे हटाते हुए बोली। तब तक गंजेडी भी खड़ा हो चुका था।

"मस्ती भाई...तुमने शादी कर ली और भाई को बुलाया भी नही" गंजेडी ने शिकायत भरे स्वर में बोला।

"चल तू जाकर सोजा...सुबह उठते ही तुम दोनों से बात करनी है मुझे" मस्ती उसे अब एक कमरे की ओर धकेलते हुए बोला। और उसे एक कमरे में चारपाई पर धकेल कर कमरे को बाहर से बन्द कर दीया।

"इस गंजेडी का अवगुण तो देख लिया अब इसके गुण भी बता दो" फरजाना फिर से पूछते हुए मस्कराई।

"इसमे एक ही गुण है..की ये हमारे लिए अपनी जान भी दे सकता है" मस्ती ने गर्वीले अंदाज में बोला।

"सच में ...अगर ये सच है तो मैं कद्र करती हूँ..इसके इस गुण की" फरजाना ने भी मस्ती के सुर में सुर मिलाया।

"अब जो काम हम लोगों को करना है वो तो अब सुबह इन लोगो के होश में आने के बाद ही करोगे"फरजाना ने पूछा।

"हॉं...इन लोगों के सामने ही बात होगी" मस्ती ने साफगोई से बोला।

"ठीक है फिर हमारा कमरा कौन सा है जहाँ हमें सोना है" फरजाना ने मस्ती के गले में अपनी बांहों का हार डालते हुए कहा।

"तुम उस सामने वाले कमरे में सो जाओ" मस्ती ने उसे एक कमरे की ओर इशारा करते हुए कहा।

"मुझे अकेली सोने की आदत नहीं है मस्ती डार्लिंग...इसलिये क्यो अलग अलग चारपाई को तकलीफ दे रहे हो..एक चारपाई में हम दोनों समा सकते है..और एक दूसरे में भी समा सकते है" ये बोलकर फरजाना उसे उसी कमरे की ओर धकेलती हुई ले जाने लगी थी..जिस कमरे में सोने के लिये मस्ती ने इशारा किया था।

क्रमशः



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