बात बराबरी की हो
बात बराबरी की हो
सुबह का काम निपटा कर शिखा फोन लेकर बेठी थी, सोचा थोड़ा फेस बुक पर नज़र मार ली जाए। फेसबुक खोलते ही उसकी नज़र अपनी सास और ननद की फोटो पर पड़ी जिस पर बड़े बड़े शब्दों में लिखा था, "मेरी बेटी मेरा अभिमान "।
"अरे वाह क्या बात है!" फ़ोटो अच्छी लगी तो लाइक कर के आगे बढ़ गयी। फिर आगे बढ़ी तो नज़र के सामने अपनी सहेली की फ़ोटो थी जिस पर उसकी सास ने लिखा था "मेरी बहू मेरा अभिमान"।
लगता है, सरकार ने बेटी पढ़ाओ की तरह नया अभियान चलाया है, मेरा अभिमान ये मेरा अभिमान वो। बेचारे बेटे उनकी तो उपेक्षा ही कर दी, क्या बेटे वो अपने माँ पिता का अभिमान नहीं? किसी ने ऎसे तो नहीं लिखा मेरा दामाद मेरा अभिमान। चलो छोड़ो, मैं अपना काम खतम करूँ।
शिखा का 2 साल का बेटा है, घर में सास सुधा जी है पति है एक ननद है रश्मि जो अभी डिलीवरी के लिए आई हुई है। शिखा रसोई में खाना बनाने में लग गयी.. तभी दरवाजे की घंटी बजी।
"देख तो शिखा" शिखा की सास ने शिखा को आवाज दी
"जी मम्मी जी "
नमस्ते आंटी जी"
" रमा आंटी आई है मम्मी जी"
रमा जी और सुधा जी सहेलियां है. रमा जी रश्मि का हाल चाल पूछने आई है.
" कैसी तबीयत है रश्मि, रमा जी ने रश्मि से पूछा. "
" ठीक है आंटी, थोड़ा बहुत तो चलता रहता है. "
" ठीक ही है. मुझे तो तुझे देख कर लगता है कि तेरे तो बेटा होगा. रमा आंटी ने कहा "
" तेरे मुंह में घी शकर.. सुधा जी ने खुश होते हुए कहा."
"बेटा हो जाए तो अच्छा है. खानदान का नाम तो बेटो से ही चलता है. बेटियां तो अपने घर चली जायेगी, बुढ़ापे का सहारा तो बेटा ही है."
" रश्मि ने कहा नहीं मुझे तो बेटी पसंद है, लड़के तो होते ही बदमाश है गोलू की तरफ इशारा करते हुए कहा. लड़के बहुत शैतान होते है. बड़े होने के बाद तो वैसे भी अपनी पत्नी की सुनते हैं. बेटियाँ ही माँ बाप के दिल की बात समझ सकती है. बहु नहीं समझ सकती. "
शिखा ने दोनों की बात गौर से सुनी और कहा, "मम्मी जी बेटा बेटी एक समान ही होते हैं, आपको तो खुश होना चाहिए कि रश्मि को बेटी हुई तो, आपने ही तो लिखा था सुबह फेस बुक पर" मेरी बेटी मेरा अभिमान." फिर दोगली बात क्यूँ?"
रश्मि बात तो संस्कारों की है। बेटे भी माँ बाप के दिल की बात समझते हैं, अगर अपनी पत्नी का साथ देते हैं इसका मतलब ये नहीं कि वो अच्छा बेटा नहीं। बहू को बेटी जैसा प्यारा दो बहू भी बेटी बन जाएगी। फिर वो भी लिखेगी "मेरे सास ससुर मेरा अभीमान। "
सही कहा शिखा, बेटियों को ऊंचा दिखाने के लिए बेटों को नीचा दिखना जरूरी नहीं। बात तो बराबरी की होनी चाहिए" रमा जी ने शिखा का समर्थन करते हुए कहा।
