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Sangeeta Aggarwal

Tragedy Inspirational Children

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Sangeeta Aggarwal

Tragedy Inspirational Children

औरत कमजोर नहीं

औरत कमजोर नहीं

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"मिसेज रीमा आपको ये फाइल आज ही कंप्लीट करके मुझे मेल करनी है!" ज़ूम मीटिंग में रीमा के बॉस रघुनंदन जी बोले।

" जी सर शाम तक आपको ये फाइल मिल जाएगी!" रीमा ने आत्मविश्वास के साथ कहा।

" गुड! आपका यही आत्मविश्वास है जो इतना बड़ा प्रोजेक्ट आपको मिला है!" रघुनंदन जी बोले।

" थैंक यू सर!" रीमा हल्की मुस्कुराहट के साथ बोली।


रीमा एक मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजिनियर है लॉकडाउन की वजह से घर से काम कर रही है। वो दो बच्चों कि मां भी है बेटा किंशुक तीन साल का बेटी आदया छह साल की। रीमा के पति भी सॉफ्टवेयर इंजिनियर ही हैं पर लॉकडाउन से पहले लंदन गए थे और वहीं फंस गए। रीमा एक महत्वाकांक्षी औरत होने के साथ साथ एक बेहतर मां और पत्नी भी है। इन दिनों काम वाली भी नहीं आ रही फिर भी रीमा ने अकेले घर और ऑफिस बहुत अच्छे से संभाला हुआ है। पर एक औरत को इतना कामयाब होता देख उसके ऑफिस के कुछ पुरुष सहकर्मी उसे पसंद नहीं करते हैं।


" मम्मा आकर देखो ना वहां कींशुक ने मेरी कॉपी फाड़ दी!" मीटिंग के दौरान है उसकी बेटी आदया जो अपनी क्लास ले रही थी रोते हुए आई।

" मम्मा दीदी ने थप्पड़ मारा मेरे!" तभी किंशुक़ भी रोता हुआ आया।

" मम्मा चलो ना देखो अब मैं काम कैसे करूं!" आदया रीमा का हाथ पकड़ कर खींचती हुई बोली।

" बेटा आप चलो मैं आती हूं!" रीमा ने झेंपते हुए कहा।

" मम्मी दीदी को मारो!" तभी किंशुक रोते रोते बोला।

" हां बेटा मैं मारूंगी दीदी को आप जाओ टॉयज से खेलो!" रीमा ने उसे भी बहला कर भेजा।

" घर इनसे संभलता नहीं आई हैं इतने बड़े प्रोजेक्ट संभालने!" तभी उसका एक सहकर्मी उसपर व्यंग्य कसते हुए बोला।


" सही कहा आपने तिवारी जी ये औरतें घर बच्चे ही संभाल लें बहुत है ऑफिस इनके कहां बस की है भले ये कितनी बराबरी की बात करें पर हैं ये कमजोर ही।" दूसरे सहकर्मी ने पहले का साथ देते हुए कहा और सभी हंस पड़े।

" सही कहा आपने मिस्टर तिवारी जी और गुप्ता जी हम औरतों के बस की कुछ नहीं हैं ना घर बच्चे संभालना ना ऑफिस!" अचानक रीमा बोली।


हंसी का ठहाका और तेज हो गया।


" ये जो आप यहां बैठ कर औरतों पर तंज कस रहे हैं मिस्टर तिवारी भूल रहे हैं आपकी बीवी के कारण आप फ़्री माइंडेड हो काम कर पा रहे हैं... और आप मिस्टर गुप्ता आपकी तो बेटी डॉक्टर है क्या उसके लिए भी आपकी ऐसी ही सोच है!" रीमा फिर बोली।


" वो....वो ..!" गुप्ता जी हकलाने लगे।


" एक औरत को घर और ऑफिस दोनों की जिम्मेदारी उठानी पड़ती वो उठाती भी है भले कितनी मुश्किल आए पर इस लॉकडाउन ने मुझ जैसी कितनी औरतों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं ।घर में बाई आ नहीं रही पति बाहर फंसे हैं तो छोटे बच्चों को भी देखना पड़ता और ऑफिस भी फिर भी मेरे काम में कोई चूक नहीं होती...अफसोस होता है मुझे ये पुरुष प्रधान समाज औरत को कभी बराबरी का हक देना ही नहीं चाहता जबकि औरत पुरुषों से कहीं आगे है...एक सवाल पूछती हूं मैं आप सबसे क्या आप औरत की बराबरी कर सकते हैं?" रीमा दुखी हो बोली।


" मेरा वो मतलब नहीं था!" अचानक तिवारी जी बोले।


" तिवारी जी , गुप्ता जी औरत कमजोर नहीं है बहुत मजबूत है तभी वो सब संभाल सकती है औरत के बल पर ही पुरुष तरक्की पाता है। औरतों पर तंज कसने से पहले एक बार ये भी सोचिए कि मौत के मुंह से वापिस आ आपको जन्म देने वाली भी एक औरत है!" आज जैसे रीमा के सब्र का बांध टूट गया था।


" वेल डन मिसेज रीमा !" रघुनंदन जी तालियां बजाने लगे और उनकी तालियों में बाकी लोगों की तालियां भी जुड़ गई। तिवारी जी और गुप्ता जी शर्मिंदा हो गए।


" सच कहा आपने रीमा जी हम यहां शांति से अपने काम कर पा रहे वो सिर्फ इसलिए कि हमारा घर और बच्चे हमारी पत्नियों ने संभाले हैं। फिर आपको तो सब अकेले संभालना पड़ रहा!" गुप्ता जी बोले।


" हां रीमा जी हम माफ़ी मांगते हैं और अपने शब्द वापिस लेते हैं औरत कमजोर नहीं बल्कि सृष्टि की सबसे ताकतवर हस्ती है औरत!" तिवारी जी बोले।


" मम्मा देखो मैंने कॉपी चिपका ली अपनी आप भैया की पिटाई मत करना अब!" तभी आ दया आ बोली।

" मम्मा मैने दीदी को सॉरी भी बोल दिया दीदी ने मुझे प्यार किया!" किंशुक अपनी तोतली भाषा में बोला तो सभी हंस दिए।

रीमा फिर से अपने काम पर फोकस करने लगी।


ये सच है दोस्तों हमारे आस पास के कुछ लोगों को औरतों की तरक्की हजम नहीं होती भले वो कितना अच्छा काम कर ले पर ये लोग उन्हें कमजोर ही समझते। ऐसे पुरुष भूल जाते औरत कमजोर नहीं है बल्कि औरत सा मजबूत कोई नहीं है।



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