अपना पराया
अपना पराया
नरेश और रीता अपने दोस्तों की हर पार्टी में जाते थे। महंगे उपहार साथ में लेकर जाते थे। ख़ुद भी आये दिन अपने घर पर पार्टी करते थे और अपने सभी मित्रों को बुलाते थे। देर रात तक खाने पीने और डांस का कार्यक्रम चलता था।वे दोनों सोचते थे कि यही समाज और यही मित्र तो उनके अपने हैं।
लेकिन जब नरेश की तबियत ख़राब हुई और उसका काम बंद हो गया, तो उनमें से किसी मित्र ने मदद नहीं की। जबकि नरेश के बरसों पुराने एक कर्मचारी राजपाल ने मदद की, जिसको नरेश अक्सर डांटता रहता था।
