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Kumar Vikrant

Tragedy Crime

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Kumar Vikrant

Tragedy Crime

अंतिम दलील : हीरो

अंतिम दलील : हीरो

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"सभी पक्ष ध्यान दें 'दिलीप भास्कर बनाम स्टेट' में दोनों पक्षों की दलीले और गवाहों के बयान सुने जा चुके है। अब दोनों पक्षों के वकीलों को अपनी अंतिम दलीले पेश करने का अवसर दिया जाता है। पहले सरकारी वकील अपनी अंतिम दलील प्रस्तुत करें।" कहकर जज दिवाकर राव अपने सामने रखी फाइल के पेज पलटने लगे।

सरकारी वकील सूर्य कान्त उठे और कठघरे में खड़े प्रोफेसर दिलीप भास्कर की तरफ इशारा करके बोले, "योर ऑनर कठघड़े में खड़ा यह शख्स देखने में एक जिम्मेदार शहरी और शरीफ आदमी लग सकता है लेकिन जो कारनामे इसने किए है वो अच्छे खासे आदमी को सोचने पर मजबूर कर सकते है कि अगर यह शरीफ शहरी है तो कातिल कैसे होते होंगे?

माय लॉड इस इंसान ने २०११ में इसकी बेटी के साथ हुए बलात्कार के कथित बलात्कारियों राहुल, सुमित, जिम्मी, बिल्ला और दलजीत के खिलाफ अपनी बेटी के बलात्कारी होने का इल्जाम लगाकर मुकदमा लड़ा लेकिन जब कोई ठोस सबूत उनके खिलाफ न मिल सका तो वो अदालत से बा इज्जत बरी हुए। यह शख्स इसे बर्दाश्त न कर सका और इसने चार साल पूरी मुकम्मल तैयार करने के बाद २०१५ में सोच समझ कर अपने होशो हवास में हिंदुस्तान के चार अलग अलग शहरों में उन पाँचों में से चार की हत्या इस की है तथा पाँचवें व्यक्ति एक कनेडियन नागरिक को भी इस शख्स ने बेरहमी के साथ कत्ल किया है। क्योंकि यह मुकदमा केवल हिंदुस्तानी नागरिकों के कत्ल के विषय में है इसलिए मैं अपनी बात सिर्फ हिंदुस्तानी नागरिकों तक सीमित रखना चाहूंगा और अदालत से दरख्वास्त करूँगा के इसके हत्या स्वीकार करने के बयान और गवाहों के बयानों के आधार पर इस शख्स को फाँसी देने की दरख्वास्त करता हूँ, बस इतना ही कहना चाहूँगा माय लॉड।"

"अब बचाव पक्ष के वकील अपनी दलील पेश कर सकते है।" जज दिवाकर राव अपने सामने रखी फाइल के पेजों में उलझे-उलझे बोले।

बचाव पक्ष के वकील श्रीधर शांत भाव से उठे और बोलना शुरू किया, "माय लॉड सबसे पहले एक महत्वपूर्ण बात पर गौर किया जाए कि प्रोफेसर दिलीप भास्कर को किसी कत्ल के जुर्म में गिरफ्तार नहीं किया गया है बल्कि यह कत्ल का मुकदमा सिर्फ इनके खुद को पुलिस के सामने समर्पण कर दिए गए बयान के आधार पर चल रहा है। इनके विरुद्ध कोई चश्मदीद गवाह पेश नहीं हुआ है।

मैं यह बिलकुल भी नहीं कहूँगा कि यह व्यक्ति अपने होशो हवास खो बैठा है जो पाँच कत्ल अपने सिर ले रहा है। लेकिन एक बात तो तय है इसकी बेटी जूही, जो आज भारतीय विदेश सेवा में कार्यरत है और जर्मनी में पोस्टेड है, के साथ बलात्कार हुआ था और उसने मकतूल राहुल, सुमित, जिम्मी, बिल्ला और दलजीत को अपने बलात्कारियों के तौर पर पहचान भी लिया था। लेकिन किन कारणों से ट्रायल जज ने उन अपराधियों को बरी किया उस पर मेरा टिप्पणी करना उचित नहीं है।

मेरे मुवक्किल पर सिर्फ इल्जाम ही इल्जाम है लेकिन उन इल्जामों को साबित करने वाले सबूत नहीं है इन पर इल्जाम है कि इन्होंने ४ साल तैयारी कर कत्लो को अंजाम दिया। हाँ हुजूर मेरे मुवक्किल ने चार साल तैयारी जरूर की लेकिन अपनी पीड़ित बेटी के करियर को बनाने की न कि उसके बलात्कारियों के कत्ल करने की। जिसमे यह कामयाब भी रहे इन्होने ट्रायल कोर्ट के निर्णय के खिलाफ अपील दायर करके टाइम बर्बाद करने की बजाय अपनी बेटी के करियर के लिए समय दिया और सफल रहे। हुजूर दिलीप भास्कर हर पिता की तरह अपनी बेटी के लिए वह हीरो है जिसने अपनी बेटी को अवसाद से निकाल कर एक अच्छे जीवन की और अग्रसर किया।

हुजूर उन कथित बलात्कारियों को किसने मारा यह जानने के लिए जिन सबूतों, हथियारों की सबूत के तौर पर जरूरत है ऐसे कोई सबूत इस अदालत के सामने पेश नहीं किए गए है और मेरे मुवक्किल के इकबालिया बयान को गंभीरता से न लिया जाए क्योंकि हर पीड़ित पिता की तरह दिलीप भास्कर भी अपनी बेटी के बलात्कारियों को सजा दिलवाना चाहते थे अब वो कैसे मरे, किसने मारे यह तो एक पहेली ही है। मेरे मुवक्किल ने किन भावनाओं में बहकर उन कत्लों को अपने सिर ले लिया यह आसानी से समझा चाहता है, इन्होने यह इकबालिया बयान सिर्फ आत्म संतुष्टि के लिए दिए है।

मेरी अदालत से दरख्वास्त है कि मेरे मुवक्किल के इकबालिया बयानों को दरकिनार सबूतों पर ध्यान दिया जाए और चूकि मेरे मुवक्किल के खिलाफ अदालत के समक्ष को ठोस सबूत पेश नहीं किए गए है इस लिए मेरी मुवक्किल को निर्दोष करार देकर बा इज्जत बरी किया जाए।

"माय लॉड क्या दो शब्द मुझे भी कहने की इजाजत है?" कठघरे में खड़े दिलीप भास्कर ने हाथ जोड़कर कहा।

"अदालती कार्यवाही समाप्त हो चुकी है अब तुम क्या कहना चाहते हो?" जज ने अपने सामने रखी फाइल को बंद करते हुए कहा।

"माय लॉड, मेरे वकील साहब ने अपनी अंतिम दलील में जो भी कहा उसके लिए मैं उनका शुक्रिया अदा करता हूँ लेकिन मैंने उन पाँचों दरिंदों को मारा है, अच्छी तरह योजना बना कर मारा है, मैं अपने इस बयान पर अब भी कायम हूँ।" दिलीप भास्कर ने हाथ जोड़कर कहा।


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