अनसुलझे मर्डर्स अध्याय-7
अनसुलझे मर्डर्स अध्याय-7
(पिछले अध्याय में हमने पढ़ा कि अफजल खान की भी रहस्यमय तरीके से मौत हो चुकी है और अब खूनी विराज कपूर को मारने की धमकी दे रहा है। इंस्पेक्टर भारत और अमर विराज को बचाने के लिए अफजल के घर से निकलते हैं और अब आगे।)
भारत- अमर रवि को बुलाकर तुम बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाओ।
अमर- मैने फोन कर दिया है रवि बस आता ही होगा।
(कुछ देर में रवि आ जाता है फिर भारत और अमर विराज के घर पहुंचने के लिए निकल जाते है और कुछ देर में वो पहुंच भी जाते है।)
विराज (अमर को देखकर)- इंस्पेक्टर साहब आप इतनी अर्जेंट में मुझसे क्यों मिलना चाहते थे और ये आपके साथ कौन है।
भारत- हेलो मिस्टर विराज मैं सीआईडी ऑफिसर भारत हूं और मैं आपकी सिक्योरिटी के लिए यहां आया हूं।
विराज- पर मुझे कोई धमकी नहीं मिली है।
भारत- हमे मालूम है आपको कोई धमकी नहीं मिली है पर आपके दोस्त अफजल खान की मौत हो चुकी है।
विराज- क्या अब खान साहब भी नहीं रहे।
भारत- और उनके घर पर ही हमे दीवार पर खून से मिली आपके नाम की धमकी मिली थी जिसमें लिखा था कि वह खूनी आपको आज रात बारह बजे तक मार देगा।
विराज- ये कौन हमसे बदला ले रहा है जिसने एक एक करके मेरे सभी दोस्तों को मार दिया। मेरे को मिल जाए तो मैं उसे जिंदा नहीं छोड़ूंगा।
भारत- घबराइए नहीं मैं जब तक यहां हूं आपको डरने की जरूरत नहीं है।
विराज- खान साहब की मौत कैसे हुई और आपको इसका कैसे पता चला।
अमर- मेरे पास उनका फोन आया था वो काफी घबराए हुए भी थे उन्होंने हमे अपने घर बुलाया था पर हम जब उनके घर पहुंचे वो जा चुके थे।
भारत- ये बताइए विराज आपके घर में कौन कौन है।
विराज- मेरे घर में दो नौकर के अलावा कोई नहीं है।
भारत- ये आपके पीछे तस्वीर किसकी है।
विराज- ये मेरी पत्नी की है उसकी दो साल पहले एक एक्सिडेंट में मौत हो गई थी।
भारत- हो! आई एम सॉरी सुनकर काफी दुख हुआ।
विराज- कोई बात नहीं।
(तीनों सोफे पर बैठकर बाते करते हैं बीच में विराज को प्यास लगती है तो वो पानी के जग में से पानी ग्लास में पलटकर पीने ही वाला होता है कि तभी भारत उसे रोक देता है।)
भारत- रुक जाइए विराज आप इस जग में से पानी मत पीजिए।
विराज- पर क्यों।
भारत- देखिए आपके सभी दोस्तों की मौत रहस्यमय तरीकों से हुई है, आपके एक दोस्त की मौत पानी पीने से हुई है मैं नहीं चाहता आप अपने घर की इस वक्त कोई चीज इस्तेमाल करें।
विराज- आप कह तो ठीक रहे है पर मुझे तो प्यास लगी है।
भारत- अमर इनके लिए बाहर से पानी की बोतल लेकर आओ।
(अमर पानी की बोतल लेकर आता है भारत विराज को अपने घर का कुछ खाने भी नहीं देता वो खाना भी अपने घर से मंगवाता है। ऐसे ही पूरा दिन बीत जाता है और फिर रात के पौने बारह बज जाते हैं।)
विराज- मेरी तो सांसे तेज होती जा रही है और डर भी बढ़ता जा रहा है।
भारत- मैने अभी तक आपको कुछ नहीं होने दिया और आगे भी कुछ नहीं होने दूंगा आप चिंता मत कीजिए।
(तभी बाहर तेज हवाएं चलने लगती है उन हवाओं की वजह से घर के खिड़की दरवाजे जोर जोर से आवाज करने लगते है।)
विराज- मेरे तो रोंगटे खड़े हो रहे है जैसे जैसे घड़ी की सुई बढ़ रही है मेरी सांसे अटकती जा रही है।
(तभी एक चाकू उड़ते हुए आता है और विराज को लगने ही वाला होता है कि भारत उस चाकू को बीच में ही रोक लेता है।)
भारत (चिल्लाते हुए)- कौन है सामने आओ।
(घोर सन्नाटा। कोई आवाज नहीं आती।)
भारत- दम हो तो मेरे सामने आओ ऐसे पीठ पीछे क्यों हमले कर रहे हो।
(तभी कमरे में एक सफेद साड़ी में एक औरत की आत्मा का प्रवेश होता है उसके बाल खुले हुए है और वह हवा में उड़ रही है।)
अमर (डरते हुए)- भूत।
आत्मा- विराज मुझे पहचाना।
विराज- रश्मि तुम।
आत्मा- पहचान लिया मुझे भूले नहीं हो।
भारत- रश्मि तुमने तो खुदकुशी की थी तुम इन लोगो के पीछे क्यों पड़ी हो।
आत्मा- पूछो इस विराज से इसने और इसके दोस्तो ने मिलकर कैसे मेरे पति को फंसाया और बाद में उनका खून कर दिया।
भारत- ये रश्मि सही कह रही है विराज।
विराज- (चुप रहता है।)
भारत (तेज आवाज में)- रश्मि ठीक कह रही है विराज।
विराज- हां एक साल पहले मैंने और मेरे दोस्तों ने मिस्टर सिंघानिया को एक कार का मॉडल डिजाइन करने के लिए बुलाया था उस डिजाइन के बदले वो बहुत ज्यादा मोटी कीमत मांग रहे थे इसलिए हमने उन्हें मार दिया और उनका डिजाइन चुरा लिया लेकिन जब रश्मि ने हम पर केस किया तो हमने उलटा इसे ही फंसा दिया और इसको आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
आत्मा- मुझे पता था कि उनका खून तुम्ही लोगो ने किया है जिंदा रहकर तो मैं उनका बदला नहीं ले पाई पर मरने के बाद मैंने सबसे बदला ले लिया और अब तुम्हें मारकर मेरा बदला पूरा हो जाएगा।
भारत- रश्मि जी आप इसे छोड़ दीजिए मैं कानून से इसको सख्त से सख्त सजा दिलवाऊंगा।
आत्मा- तुम्हारा कानून उसे पहले तो सजा दे नहीं पाया अगर कानून पहले ही मेरे पति के मुजरिमों को सजा दे देता तो आज मुझे मरना नहीं पड़ता। मुझे अपना बदला खुद ही लेना है।
(ऐसा कहकर रश्मि की आत्मा ने विराज को मार दिया। विराज को मारकर रश्मि की आत्मा वहां से चली जाती है।)
भारत- देख रहे हो अमर कानून जिसको सजा नहीं दे पाया उसके लिए उसने भूत बनकर अपने पति का बदला लिया ऐसा केस मैंने अपनी जिन्दगी में पहली बार देखा है।
अमर- मैंने भी ऐसा केस सपने में भी नहीं सोचा था पर आज ये हकीकत में देख लिया।
(तो दोस्तों आपको यह कहानी कैसी लगी दोबारा मुलाकात होगी एक और नई कहानी के साथ।))

