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Vasu Sharma

Horror Crime Thriller

3  

Vasu Sharma

Horror Crime Thriller

अनसुलझे मर्डर्स अध्याय-3

अनसुलझे मर्डर्स अध्याय-3

5 mins
187

(पिछले अध्याय में हमने पढ़ा कि संजय को एक अमान्य नंबर से मैसेज आता है कि आज रात बारह बजे तक वह मारा जाएगा और अब आगे।)


इंस्पेक्टर अमर- ऐसा कैसे हो सकता है, एक अमान्य नंबर से मैसेज कैसे आ सकता है।


संजय- इंस्पेक्टर साहब क्या अभिनव की तरह मैं भी मारा तो नहीं जाऊंगा।


करन- ऐसा क्यों कह रहे हो संजय।


अफजल- हां संजय हम तुम्हें कुछ नहीं होने देंगे।


संजय- मुझे काफी डर लग रहा है दोस्तों।


अमर- हां कुमार साहब मैं यहां हूं मैं आपको कुछ नहीं होने दूंगा।


संजय- आप तो अभिनव के साथ भी थे लेकिन आप उसे बचा तो नहीं पाए।


विराज- थोड़ा धीरज रखो संजय तुम डरो मत और हम सब जानते है कि अभिनव का खून एक बंद कमरे में हुआ है। हमने अभिनव को तो अकेला छोड़ दिया था पर तुम्हें नहीं छोड़ेंगे।


अमर- हां कुमार साहब आप चिंता मत करो मैं आपको एक पल के लिए भी अकेला नहीं छोड़ूंगा।


जगत- पर ये मैसेज कर कौन रहा है अभिनव को भी एक गुमनाम चिट्ठी मिली थी लेकिन तुम्हें तो एक अमान्य नंबर से मैसेज आया है।


अमर- मैं इस नंबर का पता लगाता हूं, कुमार साहब आप मुझे यह नंबर दीजिए।


विराज- पर ये नंबर जब मौजूद ही नहीं है तो आप इस नंबर को कैसे निकलवाएंगे।


अमर- मुझे अभी याद आया ये हैकर लोग मैसेज भेजने के बाद सिम को खुद ही बंद कर देते है और जब चाहे इस नंबर को चालू कर सकते है। पर मोबाइल कंपनियां आराम से इस नंबर से यह पता कर सकती है कि ये नंबर किस नाम से रजिस्टर्ड है।


संजय- लिखिए नंबर 95........ । (नंबर देने के बाद) मैसेज में लिखा था कि वह मुझे बारह बजे तक मार देगा।


अमर- आप चिंता मत कीजिए कुमार साहब मैं आपके पास ही रहूंगा और आपके दोस्त भी तो आपके पास है।


अफजल- हां संजय हम तुम्हारे साथ है खुदा कसम हमारे रहते हम तुम्हें कुछ नहीं होने देंगे।


विराज- हां संजय जब तक हम यहां है तुम्हें डरने की कोई ज़रूरत नहीं है।


संजय- पर ये अभिनव का घर है मुझे अभी घर भी जाना है मुझे डर लग रहा है कि जैसे ही मैं घर से निकलूं मुझे कोई गोली न मार दे।


जगत- तो तुम सब आज यही रुक जाओ।


संजय- नहीं मेरा घर जाना जरूरी है।


अमर- मैं आपको आपके घर छोड़ दूंगा कुमार साहब (फिर अपने हवलदार रवि से)- रवि इस नंबर को चेक करवाओ कि ये किसके नाम पर रजिस्टर है।


रवि- अभी लीजिए सर।


संजय- अभी आठ बजे है और बारह बजने में चार घंटे बाकी है।


करन- तुम चिंता मत करो संजय।


अफजल- तो फिर हम संजय के यहां चलते है।


अमर- बस आधे घंटे रुक जाइए अभी रवि गया है नंबर को चेक करवाने की यह किस नाम से रजिस्टर्ड है अगर हमें यह पता चल जाए तो हम उस आदमी को घर से उठा लेंगे।


विराज- जगत भैया एक कप चाय हो जाए।


जगत- ठीक है मैं अभी सबके लिए चाय बनवाता हूं।


(जगत अपनी पत्नी मालिनी से चाय बनाने की बोलकर आता है कुछ देर बाद मालिनी चाय लेकर आती है और फिर सब चाय पीते है जैसे ही सब चाय का गिलास रखते है तभी हवलदार रवि भागता हुआ अंदर आता है।)


अमर- क्या हुआ रवि तुम ऐसे भागकर क्यों आए हो।


रवि- साहब ये नंबर किसी के नाम पर भी रजिस्टर्ड नहीं है।


अमर- पर ऐसा कैसे हो सकता है तुमने अच्छे से चेक तो करवाया था रवि।


रवि- हां साहब मैंने बहुत अच्छे से चेक करवाया था लेकिन ये नंबर किसी के नाम पर भी रजिस्टर्ड नहीं है।


करन- जब ये नंबर एक्जिस्ट ही नहीं करता तो इस नंबर से मैसेज आया कैसे।


विराज- ये मिस्ट्री तो अभिनव की मौत से भी ज्यादा रहस्यमयी है।


संजय- अब तो मुझे और भी डर लग रहा है इंस्पेक्टर साहब ये कही भूत प्रेत का तो चक्कर नहीं है।


अमर- आप भी कुमार साहब इतने पढ़े लिखे होकर आप ऐसी बात कर रहे हो, मुझे यह लगता है ये कुछ ज्यादा ही शातिर दिमाग खूनी है। या तो ये या फिर इसका कोई करीबी हैकर है जिसकी मदद से इसने एक फेक सिम कार्ड बनाकर उससे मैसेज किया इसलिए ये किसी नंबर किसी भी कंपनी में रजिस्टर्ड नहीं है।


अफजल- अब तो साढ़े नौ बज चुके है अब हमें संजय के घर चलना चाहिए।


संजय- हां अब हम घर ही चलते है। इंस्पेक्टर साहब आप हमारे साथ चल रहे हो ना।


अमर- हां मैं आपके साथ चल रहा हूं आप अपने दोस्तों के साथ गाड़ी में आगे जाओ मैं अपनी जीप पर आपके पीछे पीछे आता हूं।


(संजय, करन, विराज और अफजल एक गाड़ी में और उनके पीछे इंस्पेक्टर अमर और हवलदार रवि जीप में संजय के घर जाते है, गाड़ी संजय चलता है और फ्रंट सीट पर विराज बैठा हुआ होता है। करीबन एक घंटे बाद वो संजय के घर पहुंचते है सब गाड़ी से बाहर निकलते है लेकिन संजय गाड़ी से बाहर नहीं निकलता है तभी विराज संजय को आवाज लगाता है लेकिन संजय कोई जबाब नहीं देता है। फिर अमर संजय को देखने गाड़ी के पास आता है और पता चलता है कि संजय अब इस दुनिया को छोड़कर चला गया है। अभी एक सेकंड पहले ही वह गाड़ी चलाकर लाया है फ्रंट सीट पर उसका दोस्त बैठा है लेकिन जब सब गाड़ी से उतरते है उसकी मौत हो जाती है। और उसकी मौत भी अभिनव की तरह ही हुई है शरीर पर किसी भी चीज का कोई निशान नहीं है। अब आगे क्या होगा इसके लिए हमे पढ़ना होगा अनसुलझे मर्डर्स अध्याय-4)



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