अनसुलझे मर्डर्स अध्याय 1
अनसुलझे मर्डर्स अध्याय 1
(अदालत का दृश्य)
जज- तमाम सबूतों और गवाहों को मद्देनजर रखते हुए यह अदालत इस नतीजे पर पहुंची है कि विकास सिंघानिया की हत्या उनकी पत्नी रश्मि सिंघानिया ने की है और उनके सभी पार्टनर्स पर झूठा इल्ज़ाम लगाने के जुर्म में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाती है साथ ही उनके सभी पार्टनर्स अफजल खान, विराज कपूर, संजय कुमार, करण चौधरी, और अभिनव ठाकुर को बाइज्जत बरी करती है।
(पांचों दोस्त एक दूसरे को गले लगाते है उसके बाद वह अपने वकील के पास जाते है।)
अभिनव- वकील साहब आपने तो आज बचा ही लिया वरना तो हमे लगा कि हम विकास के कत्ल में फंस हीं जाएंगे।
वकील- अरे! ठाकुर साहब आप इतनी बड़ी रकम दोगे तो क्या नहीं हो सकता।
विराज- मैं तो कहता हूं कि अब कंपनी हमारी है इसलिए हम पांचों बीस बीस प्रतिशत के हिस्सेदार है।
वकील- चलिए अब आप लोग मुझे जाने की आज्ञा दीजिए।
(वकील साहब चले जाते हैं)
संजय (अफजल से)- अफजल यार ये तेरा वकील बाद में हमे फंसा ना दे।
अफजल- चिंता मत करो बहुत पुरानी जान पहचान हैं हमारी ही वजह से वकील बना है नमक हरामी नहीं करेगा।
(उसके बाद सब चले जाते हैं और फिर एक साल बाद)
दिनांक-1 जनवरी
(अभिनव ठाकुर का घर)
(घर में कुल आठ लोग है। अभिनव, उसकी पत्नी नेहा, बड़े भाई जगत, भाभी मालिनी, दो नौकर रानी और राकेश, गार्ड विजय और अभिनव का आठ साल का लड़का रोहन)
सुबह का समय अभिनव, जगत, मालिनी और रोहन डाइनिंग टेबल पर बैठकर नाश्ता कर रहे है तभी उनका नौकर राकेश एक चिट्ठी लाता है।
राकेश- साहब आपके लिए एक चिट्ठी है।
(अभिनव चिट्ठी पढ़ता है और उसे पढ़कर चौक जाता है।)
जगत (अभिनव से)- क्या हुआ अभिनव।
अभिनव- आप ही देखो भैया।
(जगत चिट्ठी पढ़ता है)
जगत-(चिट्ठी पढ़ते हुए) अभिनव ठाकुर आने वाली सात तारीख को तुम मारे जाओगे बच सको तो बच कर दिखाओ (फिर अभिनव कि ओर देखते हुए) अभिनव ये कौन हो सकता है इस चिट्ठी पर तो कोई नाम भी नहीं है।
अभिनव- पता नहीं भैया जब से हमारी कंपनी ने मार्केट में जगह बनाई है तब से मेरे और मेरे साथियों के कई दुश्मन है।
जगत- राकेश तुम्हे यह चिट्ठी किसने दी।
राकेश- बड़े साहब मुझे तो यह आंगन में पड़ी हुई मिली इसमें छोटे साहब का नाम लिखा था तो मैं देने चला आया।
(तभी अभिनव कि पत्नी नेहा रसोई में से आती है और पूछती है कि क्या हुआ अभिनव उसे चिट्ठी दिखाता है और सब बताता है)
नेहा- अभिनव आप जल्द से जल्द पुलिस स्टेशन जाओ और इसकी रिपोर्ट लिखवाओ
मालिनी- हां अभिनव तुम्हे रिस्क नहीं लेना चाहिए तुम जल्द से जल्द अपने बड़े भाई के साथ पुलिस स्टेशन जाओ।
(अभिनव और जगत पुलिस स्टेशन जाते है और इंस्पेक्टर अमर से मिलते है और उन्हें चिट्ठी दिखाते है और सब बताते है।)
इंस्पेक्टर अमर- (चिठ्ठी देखते हुए अभिनव से) ठाकुर साहब आपके साथ कोई मजाक भी तो कर सकता है।
अभिनव- नहीं इंस्पेक्टर साहब जब से हमारी कंपनी ने कार का नया मॉडल जारी किया है तब से हमारी कंपनी के कई दुश्मन है, हो न हो उनमें से ही किसी का ही यह काम है।
अमर- आपको किसी पर शक है।
अभिनव- अब ऐसे तो कई लोग है अब व्यापार में तो बहुत से दुश्मन होते है।
अमर- तो ठीक है ठाकुर साहब मैं आज से ही आपकी सिक्योरिटी दोगुनी कर देता हूं और सात तारीख को मैं आपके पास मौजूद रहूंगा।
(तभी पीछे से आवाज आती है)
अफजल- अभिनव मैं ये क्या सुन रहा हूं।
संजय- हमारे पास भाभी जी का फोन आया और हम सीधे चले आए। विराज और करण को कुछ काम था तो वो सीधे तुम्हारे घर ही आ जाएंगे।
अमर- आप दोनों की तारीफ।
अभिनव- यह मेरे दोस्त है और हम एक ही कंपनी में पार्टनर्स है।
अमर- ठीक है ठाकुर साहब अब आप निश्चिंत रहिए और मैं सात तारीख को आपके घर आ जाऊंगा और उस दिन कुछ भी हो आप घर से बाहर नहीं जाएंगे।
अभिनव- अच्छा इंस्पेक्टर साहब।
(अभिनव अपने बड़े भाई और दोस्तों के साथ घर चला जाता है, तब तक उसके दोनों भी उसके घर आ जाते है। अभिनव अपनी पत्नी और अपने दोस्तों को इंस्पेक्टर अमर से हुई बातचीत को बताता है। कुछ समय बाद उसके चारों दोस्त चले जाते हैं और शाम से दो पुलिस हवलदार अभिनव के घर की निगरानी करते है। छह दिन ठीक रहते है उसके बाद सात तारीख आती है।)
दिनांक- 7 जनवरी (अभिनव का घर)
समय- सुबह 10
इंस्पेक्टर अमर अपनी टीम के साथ अभिनव के घर पहुंचते है।
अभिनव (इंस्पेक्टर अमर को देखकर)- इंस्पेक्टर साहब आपने आने में इतनी देर कैसे कर दी। मेरी तो आज जान ही निकली जा रही है।
अमर- मुझे कुछ काम था ठाकुर साहब लेकिन कोई बात नहीं अब मैं यहां आ गया हूं मैंने दो हवलदार गेट के बाहर तैनात कर दिए हैं जो घर के पास से आते जाते लोगो पर नजर रखेंगे और ये महिला पुलिसकर्मी आपके खाने बनने से लेकर टेबल तक आने तक सब कुछ इनकी निगरानी में होगा।
मालिनी- पर खाना तो मैं और नेहा बनाते है इसमें नजर रखने की क्या जरूरत है।
अमर- देखिए आप हमे अपनी ड्यूटी निभाने दीजिए।
जगत- तुम्हे क्या प्रॉब्लम है मालिनी इंस्पेक्टर साहब ने कहा है तो उन्हें अपनी ड्यूटी करने दो।
अभिनव- भैया भाभी ठीक ही तो कह रही है खाने की चेकिंग की क्या जरूरत है।
अमर- ठाकुर साहब आपके लिए यह जरूरी न हो पर इसमें आपको कोई परेशानी नहीं होगी।
अभिनव- ठीक है इंस्पेक्टर साहब आपको जो करना है वो करो।
अमर- ठाकुर साहब आज आप बाहर नहीं जाओगे।
जगत- लेकिन अभिनव तुम्हारी तो आज शर्मा इंडस्ट्रीज के मैनेजर के साथ मीटिंग है।
अभिनव- अरे मीटिंग की तो मैं भूल ही गया मैं वहां जाना तो नहीं चाहता लेकिन नहीं गया तो मेरा करोड़ों का नुकसान हो जाएगा।
अमर- ठाकुर साहब करोड़ों रुपए आपकी जिंदगी से ज्यादा है।
नेहा- इंस्पेक्टर साहब ठीक कह रहे हैं अभिनव तुम इस मीटिंग को कैंसल कर दो।
अभिनव- ठीक है तो मैं फोन करके मना कर देता हूं (फिर नेहा की तरफ देखकर) नेहा इंस्पेक्टर साहब कितनी देर से आए हुए है तुमने इनके लिए चाय नहीं बनाई जाओ सबके लिए चाय बनाकर लाओ।
नेहा- मैं तो भूल ही गई मैं अभी चाय बनाकर लाती हूं।
मालिनी- मैं भी चलती हूं नेहा।
(इंस्पेक्टर अमर इशारे से महिला पुलिसकर्मी को उनके पीछे भेज देते है।)
मालिनी- मैडम आप तो हमारे पीछे पीछे ही आ गई।
महिला पुलिसकर्मी- मैडम आप हमे अपनी ड्यूटी करने दीजिए आपको हमारे यहां होने से कोई परेशानी नहीं होगी।
इधर अमर अभिनव से- ठाकुर साहब आपका लड़का रोहन कही दिखाई नहीं दे रहा।
अभिनव- वो अपनी मौसी के यहां गया है दो दिन वही रहेगा।
फिर अमर जगत से- ठाकुर साहब आपके कोई बच्चे नहीं है।
जगत- एक लड़का था बारह साल का लेकिन दो साल पहले उसकी एक्सीडेंट से मौत हो गई।
अमर- सुनकर दुख हुआ।
(फिर तभी नेहा और मालिनी सबके लिए चाय और नाश्ता लेकर आते है, सब चाय पीते है। समय ऐसे ही बीत जाता है और फिर रात हो जाती है।)
समय रात 9 बजे
अभिनव- मुझे तो अब लगता है कि अब कुछ होने वाला नहीं है। पूरा दिन तो ऐसे ही निकल गया
अमर- ठाकुर साहब अभी तो पूरी रात बाकी है।
अभिनव- मैं तो अब सोने जा रहा हूं आज आप यही रुक जाएगा नेहा इंस्पेक्टर साहब के रुकने का इंतेज़ाम करो।
अमर- मैं तो यहां सोफे पर बैठकर पूरी रात निगरानी करूंगा आप जाकर आराम से सो जाइए।
(अभिनव और नेहा अपने कमरे में सोने चले जाते है मालिनी भी अपने कमरे में सोने चली जाती हैं जगत कुछ देर इंस्पेक्टर अमर से बाते करकर वह भी सोने चला जाता है। पूरी रात ऐसे ही बीत जाती है और फिर सुबह।)
समय- 8 बजे
अमर- ठाकुर साहब क्या इतनी देर तक सोते हैं।
जगत- नहीं नेहा और अभिनव 7 बजे तक उठ जाते है पता नहीं आज इतनी देर तक क्यों सो रहे है। मालिनी जाकर दोनों को आवाज लगाओ।
(मालिनी गेट खटखटाती है लेकिन अन्दर से कोई जवाब नहीं देता है फिर कुछ देर बाद अमर और जगत भी दरवाजा खटखटाते है लेकिन जब अंदर से कोई जवाब नहीं देता है तो अमर और जगत दरवाजा तोड़ देते है तब पता चलता है कि दोनों सो रहे है मालिनी नेहा को जगाती है पर अभिनव तो गहरी नींद में सो गया था जो अब कभी नहीं उठने वाला था।
(सब रोने लगते है अमर अभिनव की बॉडी ऊपर से नीचे तक देखता है उस बॉडी पर न ही कोई चोट का निशान है न ही बॉडी को देखकर ऐसा लगता है कि उसे जहर दिया गया है।)
मालिनी- ये कैसे हुआ नेहा।
नेहा- पता नहीं दीदी मुझे कभी ऐसी नींद नहीं आई मुझे पता ही नहीं चला कि इन्हें क्या हो गया।
अमर- मुझे इस वक्त कहना तो नहीं चाहिए लेकिन नेहा जी को मुझे हिरासत में लेना होगा।
जगत- ये आप क्या कह रहे हो इंस्पेक्टर साहब।
मालिनी- आपको पता भी आप क्या कह रहे है नेहा अभिनव की पत्नी है वो उनका खून क्यों करेगी।
नेहा- इंस्पेक्टर साहब मैं अपने पति से इतना प्यार करती हूँ भला मैं उनका खून क्यों करूंगी।
अमर- मैं पूरी रात कमरे के बाहर निगरानी करता रहा कमरे में कोई आया नहीं है और तो और कमरे में खिड़की भी नहीं है उनका खून हुआ कैसे। और देखिए मैं आप पर इल्ज़ाम नहीं लगा रहा हु बस ये मेरी ड्यूटी है और मुझे आपको हिरासत में लेना होगा हवलदार इन्हें हिरासत में लो और बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेजो।
(क्या लगता है आपको अभिनव का खून उसकी पत्नी नेहा ने किया या फिर किसी और ने, और अगर किसी और ने किया तो कैसे किया ये जानेंगे हम अध्याय 2 में।)

