अनसुलझे मर्डर्स अध्याय-2
अनसुलझे मर्डर्स अध्याय-2
(पिछले अध्याय में हमने पढ़ा कि अभिनव ठाकुर का उनके कमरे में खून हो गया है और उस कमरे में उनकी पत्नी नेहा के अलावा कोई नहीं था इसलिए इंस्पेक्टर अमर ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।)
(पुलिस स्टेशन का दृश्य)
(जगत, मालिनी और अभिनव के दोस्त पुलिस स्टेशन जाते है।)
जगत इंस्पेक्टर अमर से- देखिए आपको नेहा को छोड़ना होगा।
अमर- ठाकुर साहब मैं मानता हूं कि नेहा जी ऐसा नहीं कर सकती मैं आपके परिवार को काफी सालों से जानता हूं पर आप ही सोचिए उस कमरे में कोई आया नहीं कोई गया नहीं तो खून और कौन कर सकता है।
जगत- जब तक पोस्टमार्टम की रिपोर्ट नहीं आती तब तक आप कुछ नहीं कह सकते।
करण चौधरी- हाँ इसलिए भाभी जी की आपको छोड़ना होगा।
अफजल खान- जब तक आपके पास कोई ठोस सबूत नहीं है आप उन्हें हिरासत में नहीं रख सकते।
अमर- देखिए आप समझने की कोशिश कीजिए।
जगत- इंस्पेक्टर साहब समझने की जरूरत आपको है (अमर को अपना फोन देकर) लीजिए मंत्री जी से बात कीजिए।
अमर- (फोन पर बात करते हुए) जय हिंद मंत्री जी।
मंत्री जी- देखो जगत जी मेरे पुराने मित्र है जब तक इनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिलता है तब तक इनकी भाभी को जमानत पर छोड़ दो।
अमर- ठीक है मंत्री जी। (जगत को फोन देते हुए) ठीक है मैं नेहा जी को जमानत पर छोड़ रहा हु पर जब तक मैं न कहूं वो इस शहर को छोड़कर न जाए। (फिर एक हवलदार से) नेहा जी को छोड़ दो।
(हवलदार नेहा को छोड़ देता है फिर सभी लोग घर वापस चले जाते है)
अमर (हवलदार से)- रवि तुम्हे क्या लगता है क्या ये नेहा अपने पति का खून कर सकती है।
रवि- साहब मुझे तो उन्हें देखकर नहीं लग रहा कि वो ऐसा कर सकती है।
अमर- मुझे भी ऐसा ही लग रहा रवि लेकिन मैं। ये सोच रहा हूं कि फिर अभिनव ठाकुर का खून किया किसने, वैसे ये पोस्टमार्टम की रिपोर्ट कब आएगी।
रवि- कल शाम तक आ जाएगी।
(इधर सब अभिनव के घर पहुंच जाते है और फिर बैठकर बाते करते है।)
विराज- भाभी जी आपको थोड़ा भी अंदाजा नहीं है कुछ आहट तो सुनी होगी आपने।
नेहा- भैया मुझे कुछ भी याद नहीं है मैं तो जैसे बेहोश ही हो गई थी और मेरी आंख तब खुली जब मालिनी दीदी ने मुझे उठाया।
अफजल- तो अभिनव का खून किया किसने।
संजय- अभिनव के कमरे में आने का एक ही दरवाजा है अब बताओ जब दरवाजा अंदर से बंद था तो उसका खून हुआ कैसे।
जगत- हम क्यों फालतू की बाते कर रहे है बाहर इंस्पेक्टर साहब बैठे थे अंदर से गेट बंद था जबकि अभिनव के शरीर पर ना ही चोट के निशान थे ना ही कोई हथियार के सोचने वाली बात तो यह है कि फिर वो मरा कैसे।
मालिनी- बात तो सही है।
संजय- अभिनव को किसी ने जहर तो नहीं दिया।
जगत- कैसी बात कर रहे हो संजय तुम्हे पता तो है हमारे यहां खाना मालिनी और नेहा बनाते है तो खाने में जहर कौन मिला सकता है।
विराज- तो फिर अभिनव का खून कैसे हुआ।
अफजल- ये तो पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा।
(इधर पुलिस स्टेशन में अमर के पास एक फोन आता है।)
अमर (फोन उठाता है)- हैलो इंस्पेक्टर अमर स्पीकिंग।
डॉ जगदीश- हैलो इंस्पेक्टर मैं डॉ जगदीश बोल रहा हूं आपने आज सुबह एक बॉडी भेजी थी उसी सिलसिले में मुझे आपसे बात करनी है। आप जल्दी से हॉस्पिटल आ जाओ।
अमर- मैं बस दस मिनट में आपके पास पहुंचता हु डॉक्टर। रवि जीप निकलो जल्दी।
(इंस्पेक्टर अमर कुछ देर में हॉस्पिटल पहुंच जाते है और फिर डॉक्टर से बात करते है)
अमर- आपने मुझे इतनी जल्दी में क्यों बुलाया डॉक्टर साहब।
डॉ जगदीश- आपने जो ये बॉडी भेजी है न ही इसकी दम घुट कर मौत हुई है और न ही इसको जहर दिया गया है।
अमर- तो डॉक्टर साहब इसकी मौत हुई कैसे।
डॉ जगदीश- यही तो मैं इसे सुबह से चेक कर रहा हूं पर इसकी मौत की वजह पता नहीं चल रही है।
अमर- क्या ऐसा कैसे हो सकता है आदमी मरा है तो किसी न किसी से तरीके से तो मरा होगा।
डॉ जगदीश- इस बॉडी को मैं सुबह से पचास बार चेक कर चुका हूं ऐसा लगता है मानो इसके शरीर से प्राण अपने आप निकल गए हो।
अमर- पर डॉक्टर साहब ऐसा कैसे हो सकता है क्या इन्हें हार्ट अटैक तो नहीं आया था।
डॉ जगदीश- नहीं इन्हें हार्ट अटैक भी नहीं आया मै इस बॉडी में एक एक चीज चेक कर चुका हूं पर इनकी मौत का कारण पता नहीं चला।
रवि- साहब मैने एक पिक्चर में देखा था एक खूनी ने एक आदमी को ऐसा जहर दिया था जो शरीर में कुछ समय के बाद गायब हो जाता है। कही ठाकुर साहब को भी तो यह जहर नहीं दिया गया।
अमर- रवि पिक्चर और हकीकत में काफी अंतर होता है ऐसा कोई जहर नहीं होता है।
डॉ जगदीश- ऐसा जहर होता है इंस्पेक्टर पर वो भी शरीर में 24 घंटे तक रहता है। और इनके शरीर में ऐसा कुछ भी नहीं है। मैने अपने बीस साल के करियर में ऐसा पहला केस देखा है जिसमें मौत की वजह पता नहीं चल रही है।
अमर- ठीक है डॉक्टर साहब तो मैं अब चलता हूं।
(अमर वहां से सीधे अभिनव के घर जाता है वहां पर अभिनव के दोस्त भी होते है।)
जगत (अमर को देखकर)- इंस्पेक्टर साहब कुछ पता चला।
अमर- हां पर आपको जानकर हैरानी होगी कि ठाकुर साहब की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुछ नहीं आया।
संजय- मतलब।
अमर- मतलब ये कि उनकी मौत कैसे हुई इसका पता नहीं चल पा रहा है।
विराज- ऐसा कैसे हो सकता है इंस्पेक्टर साहब। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तो आसानी से पता चल जाता है कि खून कैसे हुआ है।
अमर- इसी बात ने तो मुझे परेशान कर रखा है और ये पोस्टमार्टम किसी साधारण डॉक्टर ने नहीं बल्कि बीस साल से एक्सपर्ट डॉ जगदीश कुमार ने किया है।
अफजल- मैंने इनका नाम सुना है ये काफी मशहूर डॉक्टर है।
(तभी मोबाइल के मैसेज की रिंग बजती है और ये मैसेज संजय के फोन पर आया था संजय मैसेज पड़ता है और मैसेज पढ़ते पढ़ते चौक जाता है और उसके हाथ से मोबाइल छूट जाता है सब संजय को संभालते है। और इंस्पेक्टर अमर फोन को उठाते है और मैसेज पढ़ते हैं।)
अमर (मैसेज पढ़ते हुए)- संजय आज रात बारह बजे तक तुम मारे जाओगे बच सको तो बचकर दिखाओ।
(अमर फिर इस नंबर पर कॉल करता है और स्पीकर पर रखता है लेकिन जिससे ये मैसेज आता है अब वो नंबर अमान्य बताता है।)
जगत- ऐसा कैसे हो सकता है अभी इस नंबर से मैसेज आया है और अब ये अमान्य बता रहा है।
(तो दोस्तो आपको क्या लगता है ये मैसेज एक अमान्य नंबर से कैसे आया और क्या अभिनव की तरह संजय की भी मौत हो जाएगी ये जानने के लिए आपको पढ़ना होगा अनसुलझे मर्डर्स अध्याय-3)

