महान राजा के अनोखे पुत्र
महान राजा के अनोखे पुत्र
यह कहानी समुद्र के निकट बसे महानगर के महान राजा महाराज सागर की है। महाराज सागर कोई साधारण राजा नहीं थे, वह जल को नियंत्रित कर सकते थे इसी वजह से उनका नाम सागर पड़ा। महाराज सागर के तीन पुत्र थे अग्नि, वायु और इंद्र।जैसे महाराज सागर के पुत्रों के नाम थे वैसे ही उनमें गुण भी थे उनका बड़ा पुत्र अग्नि आग को नियंत्रित कर सकता था और वायु हवा को नियंत्रित कर सकता था तथा छोटा पुत्र इंद्र तूफान को नियंत्रित कर सकता था। एक बार महाराज सागर काफी बीमार हो जाते है तब उनके राजवैद्य उनके पुत्रों को बताते हैं कि महाराज को बचाने के लिए एक जड़ी बूटी लानी होगी जो दूर समुद्र को पार करकर एक बड़े पर्वत के ऊपर मिलेगी। यह बात सुनकर तीनों भाई उस जड़ी बूटी को लेने के लिए चल पड़ते है पर राजवैद्य ने उन्हें रोककर कहा कि उन्हें यह जड़ी बूटी कल सूरज अस्त होने से पहले लानी है यह बात सुनकर तीनों भाई तुरन्त वहां से समुद्र की और प्रस्थान करते है। तीनों भाई एक बड़े जहाज में बैठकर समुद्र की यात्रा करते है। कुछ आगे पहुंचने पर उन्हें पता चलता है कि हम इस जहाज से कभी भी समुद्र पार नहीं कर सकते तो मझले भाई वायु ने उपाय सुझाया कि मैं तुम्हें वहां तक उड़ा कर ले जा सकता हूँ फिर यह कहते ही वह आसमान की ओर देखता है और वायु को नियंत्रित करता हैं जिससे वह तीनों भाई उड़ने लगते है। जल्द ही वह तीनों समुद्र पार करके उस पर्वत पर पहुंच जाते है जहां पर उन्हें वह जड़ी बूटी मिलती लेकिन उस जड़ी बूटी की रक्षा एक आंख वाला बीस फुट लंबा एक भयानक राक्षस कर रहा था। बड़े भाई अग्नि ने कहा मैं इसका ध्यान बटाता हूँ तुम दोनों जड़ी बूटी को लेकर आओ यह कहकर अग्नि उस राक्षस के पास जाता है और उस राक्षस पर हमला करता है लेकिन उस राक्षस का उसपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है वह बहुत शक्तिशाली था। राक्षस अग्नि को अपने हाथों में उठा लेता है और उसे खाने ही वाला होता है कि तभी इंद्र उसपर बिजली से हमला करता है जिससे वह अग्नि को छोड़ देता है। वायु उसे अपनी शक्तियों से उसे गिरने से बचा लेता है अब तीनों भाई उस राक्षस पर हमला करते हैं लेकिन किसी की शक्तियां उस राक्षस पर असर नहीं करती है। वह राक्षस अपने हाथ में इंद्र को उठा लेता है और उसे खाने ही वाला होता है कि तभी एक समुद्र की एक बड़ी सी लहर आती है जिससे राक्षस नीचे गिर जाता है और वो लहर के जनक महाराज सागर थे महाराज सागर ने आते ही उस राक्षस को अपनी शक्तियों से समुद्र में नीचे ले गए और वहीं पर उसे बंद कर दिया और ऊपर आकर अपने तीनों बेटों से कहा कि मैं तुम तीनों की परीक्षा ले रहा था मुझे कुछ नहीं हुआ मैं यह देख रहा था कि तुम तीनों भाई एक साथ कैसे काम करते हों। तुम तीनों ने मिलकर काम तो किया पर अभी तुम्हें और परीक्षण की आवश्यकता है जिससे तुम तीनों भाई एक दिन मेरी तरह महान राजा बनोगे।
