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Vasu Sharma

Horror Crime Thriller

3  

Vasu Sharma

Horror Crime Thriller

अनसुलझे मर्डर्स अध्याय-5

अनसुलझे मर्डर्स अध्याय-5

6 mins
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(पिछले अध्याय में हमने पढ़ा कि इंस्पेक्टर अमर डीएसपी श्रीकांत शर्मा के ऑफिस में है तभी उनके पास करन चौधरी का फोन आता है और करन उन्हें जल्द से जल्द अपने घर आने के लिए कहता है और डीएसपी श्रीकांत इंस्पेक्टर अमर को तुरन्त करन के घर जाने का ऑर्डर देता है, और अब आगे।)


(अमर और हवलदार रवि अपनी जीप से करन के घर जा रहे है।)


अमर- रवि तुम्हें क्या लगता है इस करन ने हमें इतनी जल्दी क्यों बुलाया होगा।


रवि- पता नहीं साहब, लेकिन जिस आवाज में वो बात कर रहे थे ऐसा लगता है कि उन्हें भी धमकी मिली है।


अमर- मुझे भी ऐसा ही लगता है रवि, पर ये कौन सख्श है जो इन पांचों दोस्तों के पीछे पड़ा हुआ है।


रवि- साहब मैंने कल रात एक पिक्चर में देखा था कि पांच दोस्त जंगल में शिकार पर जाते है वहां पर उन्हें इच्छाधारी नाग और नागिन मिलते है उन पांच दोस्तो में से एक गलती से उस इच्छाधारी नाग को गोली मार देता है और नागिन फिर उनसे बदला लेती है और सबको मार देती है।


अमर- तो तुम कहना क्या चाहते हो रवि।


रवि- यही की इन लोगों ने किसी नाग को तो नहीं मार दिया फिर उस नाग का बदला नागिन इन लोगो से ले रही हो और एक एक करके रहस्यमय तरीकों से खून कर रही हो।


अमर- फिल्में देखना बंद कर दो रवि तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है भला इच्छाधारी नाग नागिन होते है क्या।


रवि- होते है साहब मेरे गांव में कई लोगों ने इच्छाधारी नाग नागिन देखे है।


अमर- तुम और तुम्हारा गांव मेरी समझ से बाहर है पर ये काम किसी नाग नागिन का नहीं बल्कि किसी प्रोफेशनल किलर का है जो इतनी सफाई से खून करता है कि उसका पता ही नहीं चलता है।


(कुछ देर में करन का घर आ जाता है दोनों जीप में से उतरते है और रवि डोर बैल बजाता है। और गेट खोलने करन की पत्नी सीमा आती है। सीमा कुछ घबराई हुई सी होती है।)


सीमा (इंस्पेक्टर अमर को देखकर)- आइए आइए इंस्पेक्टर साहब। (फिर करन से) करन इंस्पेक्टर साहब आ चुके है नीचे आ जाओ।


(करन नीचे आ जाता है उसके साथ उसका बेटा निखिल भी नीचे आ जाता है करन भी घबराया हुआ है।)


अमर- आप दोनों इतने घबराए हुए क्यों है।


करन- बात काफी घबराने की है इंस्पेक्टर साहब। (फिर अपने बेटे से) निखिल आप ऊपर जाकर टीवी देखो मैं इंस्पेक्टर अंकल के साथ कुछ जरूरी बात कर रहा हूं।


(निखिल ऊपर चला जाता है।)


अमर- आप क्या कह रहे थे चौधरी साहब।


करन- ये डायरी देखिए इंस्पेक्टर साहब, ये डायरी हमेशा इस टेबल पर पड़ी रहती है निखिल मेरा बेटा इस पर कुछ न कुछ लिखता ही रहता है आज जब वो कुछ लिख रहा था उसने मुझे पहला पेज दिखाया तब मैने डायरी देखी तो उस पर यह लिखा था आप खुद पढ़िए।


अमर (डायरी पढ़ता है)- करन आज शाम पांच बजे तक तुम मारे जाओगे। बच सको तो बचकर दिखाओ।


सीमा- जब से मैने ये डायरी देखी है मेरी तो जान ही निकली जा रही है कही इनके दोस्तों की तरह इन्हें तो कुछ नहीं हो जाएगा।


करन- मुझे भी बहुत डर लग रहा है मेरे घर में कोई घुसकर इस डायरी में कोई कैसे लिख सकता है।


अमर- आपके घर में कौन कौन है चौधरी साहब।


करन- मैं, सीमा और निखिल के अलावा और कोई नहीं है।


अमर- आपने यह लिखा हुआ कब देखा था।


करन- मैने ये सुबह दस बजे देखा था और कल ये डायरी मैने सुबह देखी थी तब तक तो इस डायरी में कुछ नहीं लिखा था।


अमर- तो इसका मतलब ये काम कल दोपहर से लेकर रात तक के बीच में हुआ है। इस बीच आपके घर में कौन कौन आया था।


करन- मैं तो आप लोगो के साथ ही था वैसे कोई आता जाता तो नहीं है बस सुबह दूध वाला और अखबार वाला आता है जो वो भी दस बजे से पहले ही आता है उसके बाद कोई नहीं आता।


अमर- तो फिर इस डायरी में लिखा तो लिखा किसने (फिर अचानक से किसी चीज को देखकर) चौधरी साहब आप हमारे साथ थे आपका कमरा ऊपर है तो जाहिर सी बात है सीमा जी आप तो दोपहर में ऊपर अपने कमरे में ही रहती होंगी।


सीमा- हां।


करन- तो इस डायरी का सीमा के ऊपर वाले कमरे में होने का क्या कनेक्शन है।


अमर- कनेक्शन है चौधरी साहब आप एक बार उस खिड़की को तो देखिए कोई भी आराम से उस खिड़की से अंदर आकर डायरी में लिखकर आराम से जा सकता है और किसी को पता भी नहीं चलेगा कि डायरी में लिखा तो लिखा किसने। सीमा जी क्या आपने दोपहर में कोई आवाज सुनी थी।


सीमा- हां मैने यही कोई तीन बजे कुछ आवाज तो सुनी थी मैने नीचे आकर देखा पर मुझे कुछ नहीं दिखा फिर मुझे लगा कोई बिल्ली होगी और मैं फिर ऊपर आ गई।


करन- तो किसी आदमी की इतनी हिम्मत हो गई कि वह मेरे घर में घुसकर डायरी में लिखकर आराम से चला गया और किसी को कुछ पता ही नहीं चला।


अमर- और ये काम आपके किसी करीबी का है क्योंकि किसी अनजान को क्या पता की आपकी पत्नी ऊपर वाले कमरे में ही रहती है। वैसे एक बात और मेरे समझ में नहीं आई कि आपने ये खिड़कियां ऐसी क्यों बनवाई है कि इनमें से कोई अंदर आराम से आ जा सके।


करन- पता नहीं ये मैने क्या सोचकर बनवाई है वैसे ये हमेशा अंदर से बंद रहती है लेकिन पता नहीं इनमें से ये वाली खुली रह कैसे गई।


अमर- आपको क्या लगता है चौधरी साहब की आपकी जान का दुश्मन कौन हो सकता है।


करन- मुझे नहीं पता कि कौन है मेरा दुश्मन मैंने तो किसी का कभी बुरा नहीं चाहा।


रवि- करन साहब आप कभी जंगल गए हो क्या।


अमर (गुस्से में चिल्लाकर)- रवि चुप हो जाओ।


करन- मैं कभी जंगल नहीं गया हूं पर ये आप क्यों पूछ रहे हो।


अमर- अरे इसका दिमाग खराब हो गया है ये सोच रहा है ये काम किसी इच्छाधारी नाग नागिन का है।


करन (थोड़ा मुस्कुराकर)- रवि आपको लगता है इच्छाधारी नाग नागिन होते है अगर आपको लगता भी है वो होते है तो मैंने और मेरे दोस्तों ने एक मच्छर तक नहीं मारा इच्छाधारी नाग नागिन की तो दूर की रही।


(कुछ देर बाद करन के दोस्त भी आ जाते है करन ने उन्हें भी फोन करके सब बता दिया था और अब वो इंस्पेक्टर अमर से हुई बाते भी उन्हें बता देता है।)


विराज- मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है है कि हमारे साथ हो क्या रहा है। ये एक साथ कौन सी परेशानी हमारे गले पड़ गई है।


अफजल- सही कह रहे हो विराज अल्लाह ने हमारे मुकद्दर में न जाने किस बला का प्रवेश करवा दिया है जो हमारे पीछे हाथ धोकर पड़ गई है।


विराज- मुझे तो प्यास लग रही है करन एक ठंडे पानी की बोतल मंगाओ।


(करन अपनी पत्नी सीमा से पानी की बोतल लाने के लिए कहता है पहले उस बोतल से विराज पानी पीता है और उसके बाद करन लेकिन पानी पीते पीते करन मारा जाता है करन के हाथ से बोतल छूट जाती है और वह सोफे से नीचे गिर जाता है। तो दोस्तो क्या होगा उस पानी की बोतल में जिसे पीकर करन मारा गया लेकिन उसी बोतल से तो विराज ने भी पानी पिया था उसे तो कुछ नहीं हुआ, अब आगे क्या होगा यह जानने के लिए हमे पढ़ना होगा अनसुलझे मर्डर्स अध्याय-6)



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