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ashok kumar bhatnagar

Romance Tragedy

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ashok kumar bhatnagar

Romance Tragedy

अनकही यादे (द्वितीय खंड)

अनकही यादे (द्वितीय खंड)

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एक सुनहरी शाम को, जब सूरज ढल रहा था और हवा में ठंडक घुल रही थी, गांव का वातावरण अद्भुत था। खूबसूरती और शांति दोनों ही दिल को छू रही थीं। राहुल  मंदिर में योगासन कर रहा था। यह मंदिर गांव के ऊंचे टीले पर स्थित था, जहाँ से पूरे गांव का दृश्य दिखाई देता था।


 हर दिन अनन्या गाँव के प्रसिद्ध मंदिर जाती है, जो पहाड़ियों के बीच स्थित है। वह मंदिर की सीढ़ियों पर चढ़ते समय प्राकृतिक सौंदर्य में खो जाती है। पहाड़ों का हरा-भरा दृश्य, शांत वातावरण और मंदिर का दिव्य माहौल अनन्या के मन को शांति देता है। मंदिर एक शांत और पवित्र स्थान था    जिसके चारों ओर प्राकृतिक सौंदर्य बिखरा हुआ था।  


 उस शाम  भी जब राहुल योगासन कर रहा था अनन्या पहाड़ियों के बीच बने उस छोटे से मंदिर में आई थी, जहां उसे राहुल पहली बार देखता है। राहुल ने योगा खत्म करके जब अपनी आँखें खोलीं, तो उसने देखा कि मंदिर में एक करीब बीस-बाईस साल की लड़की खड़ी थी।


 वह लड़की इतनी सुंदर और सहज लग रही थी कि राहुल कुछ पल के लिए उसे देखता रह गया। उस लड़की की आँखों में एक अद्भुत चमक थी और उसका चेहरा मासूमियत से भरा हुआ था जो राहुल को अपनी ओर आकर्षित कर रहा था  । उसकी आँखों में मासूमियत और जिज्ञासा दोनों की झलक थी, मानो वह इस नई जगह की हर खूबसूरती को अपने दिल में समेट लेना चाहती हो।


राहुल, जो योगासन कर रहा था, इस ध्वनि से जागरूक हुआ और उसकी नजरें अनन्या पर पड़ीं। उसे देख कर वह कुछ पल के लिए ठहर सा गया। अनन्या की मासूमियत और उसकी आँखों में चमक ने राहुल को एक अजीब सी खुशी और सुकून दिया। उसने महसूस किया कि इस शाम का यह अद्भुत दृश्य और अनन्या की उपस्थिति, दोनों मिलकर एक दिव्य अनुभव का हिस्सा बन गए थे।



राहुल के मन में कई सवाल उठने लगे। वोह लड़की इस गांव की नहीं लग रही थी. उसका लिबास उसकी चाल ढाल बता रहे थे कि वोह किसी मेट्रोपोलिटन सिटी की रहने वाली हो. उसने सोचा कि यह लड़की कौन हो सकती है और यहाँ कैसे आई? राहुल की उत्सुकता बढ़ती गई। 


मंदिर के पास ही एक छोटा सा तालाब था, जिसकी शीतल जल में पहाड़ों की परछाई झलकती थी। अनन्या तालाब के चारों ओर घूम रही थी, शाम के चार बजे का समय रहा होगा और धुंधला सा अँधेरा होने लगा था। पहाड़ों में शाम जल्दी हो जाती है, और सूर्य छिपने की कगार पर था। उसकी रोशनी मद्धिम होती जा रही थी, मानो वह इस ब्रह्मांड को अपनी गर्मी, ताजगी और जोश देते हुए स्वयं थका-थका सा महसूस कर रहा हो।



सूर्य की थकान के बावजूद,  सूर्य  के चेहरे पर खुशी की चमक और आतुरता थी, जो एक प्रेमी के चेहरे पर अपनी प्रेमिका से मिलने जाते समय होती है। यह दृश्य राहुल के मन को मोह रहा था। चन्द्रमा भी अपनी ओट से बाहर आने का प्रयास कर रहा था, किन्तु आसमान में मौजूद हल्के-हल्के बादल, जो किसी माशूका के लम्बे-लम्बे केशों की तरह प्रतीत हो रहे थे, चन्द्रमा के खूबसूरत चेहरे को देखने में बाधा पैदा कर रहे थे। यह दृश्य राहुल को किसी दुल्हन के चेहरे को देखने में उसके घूँघट द्वारा पैदा की गई बाधा की तरह लगा।


तारे अभी पूर्ण रूप से चमक नहीं रहे थे, लेकिन उनकी उपस्थिति का आभास हो रहा था। यह संध्या का समय था, जब दिन और रात का मिलन हो रहा था, और इस मिलन की गवाह अनन्या और राहुल थे। अनन्या तालाब के चारों ओर घूमते हुए मंदिर के पास आई और वहां की पवित्रता को महसूस किया। उसने मंदिर की घंटी बजाई, जिससे एक मधुर ध्वनि चारों ओर फैल गई।


उसी समय, राहुल भी मंदिर में प्रार्थना के लिए आता है। वह पहाड़ों की गोद में बसे इस मंदिर में अक्सर योगासन और प्रार्थना के लिए आता था। जैसे ही अनन्या और राहुल की नजरें मिलती हैं, हवाएं थम जाती हैं और दोनों की धड़कनें तेज हो जाती हैं। उनकी आँखों में एक अनकहा आकर्षण उत्पन्न होता है। अनन्या ने देखा कि राहुल उसकी ओर देख रहा है, उसकी आँखों में एक अद्भुत चमक थी। राहुल ने भी अनन्या की मासूमियत और उसकी आँखों की चमक को महसूस किया। उन दोनों के बीच एक अनकहा संवाद शुरू हो गया, जो केवल उनकी आँखों के माध्यम से हो रहा था। वे दोनों इस पल में खो गए थे, समय जैसे ठहर सा गया था।


अनन्या मंदिर के प्रांगण में आकर बैठ  जाती हैं और  तालाब के शांत पानी में अपनी परछाई  देख कर एक मुस्कान उसके चेहरे पर आ जाती हैं राहुल अनन्या को बड़े ध्यान से देखता हैं उसकी आँखें गहरे नीले रंग की थीं। आँखों की पुतलियाँ सफेद रंग की और छोटी-छोटी थीं, मानो किसी कलाकार ने नीले रंग की अंडाकार आकृति बनाई हो और  उसके बैकग्राउंड में सफेद रंग भर दिया हो। उसकी आँखें इतनी चमकीली थीं कि किसी को भी बिल्ली की आँखों की याद दिला देतीं। उसके गाल बड़े-बड़े थे और नाक हल्की सी चिपटी हुई थी। उसके चेहरे पर एक मासूमियत थी जो हर किसी को उसकी तरफ आकर्षित कर देती थी। देखने में वह पहाड़ी प्रतीत होती थी, पर उसने उसे कभी इस गाँव में देखा नहीं था। वह स्वर्ग की अप्सरा प्रतीत हो रही थी, मानो गलती से इस पृथ्वी लोक में आ गई हो।




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