Sawan Sharma

Tragedy Others


3.4  

Sawan Sharma

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अदरक वाली चाय

अदरक वाली चाय

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माँ,अदरक वाली चाय बनाओ ना, भीग गया बारिश में आपके हाथ में जादू है

बोलते बोलते अंकित किचन में गया माँ नहीं मिली फिर उसे याद आया कि वो तो अकेला रहता है... घर से दूर नौकरी के चक्कर में।

चलो खुद ही बेस्वाद चाय बनाना पड़ेगा अब माँ तो है नहीं, बात भी नहीं कर सकता... उस दुनिया में कॉल कहां लगता है 

काश वो चाय मिल पाती जो अक्सर माँ पिलाया करती थी जब मैं बारिश होते ही बाइक ले कर निकल पड़ता था, वापस आते ही चाय तैयार हो जाती थी तब कदर नहीं थी, वो चाय ओल्ड फैशन लगती थी

मैं अक्सर माँ पर चिढ़ जाया करता था, पर माँ कभी नहीं चिढ़ी उल्टा हंसते हुए कहती "इतना भीग गया है, सर्दी लग जाएगी"

अब जब भी बारिश होती है, वो चाय याद आती है... माँ की बात याद आती है तो सोचता हूं कि कहीं सर्दी लग गई और बीमार पड़ गया तो छुट्टी लेना पड़ेगी... 

क्या करे अब बड़े हो गए सब सोचना पड़ता है पहले शौक से भीगने जाते थे अब भीगना मजबूरी है कितना कुछ बदल देती हैं ये नौकरी... पैसा और इज्ज़त देती है पर दिल को सुकून नहीं, इक नकली हंसी के लिए असली हंसी छिन लेती है 

ये ही सोचते हुए चाय उबल कर उफान आ गई अंकित ने चाय पी और बोला "बहुत गंदी चाय है" जैसे तेसे पीकर ऑफिस का काम करने लगा।  


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