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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Tragedy Inspirational

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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Tragedy Inspirational

आखिर क्यों (भाग 11)

आखिर क्यों (भाग 11)

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मधुरा सभी को मासिकधर्म के समय के स्वच्छता के महत्व को समझाती है।

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सिया व शिंजो पूंछतीं हैं

"सच कहें मम्मी जी हमें तो लगता है इस समयावधि में प्रत्येक महिला या लड़की को स्कूल या वर्कप्लेस से दो या तीन दिवसीय छुट्टी मिलनी ही चाहिए। 

मधुरा

"हां बेटा इस पर भी बहस चल रही है।

आज महिलाओं में अधिकारों के प्रति जागरूकता देखने को मिल रही है। उसी के परिणाम स्वरूप सबसे पहले बिहार में 1992 लालू प्रसाद यादव की सरकार ने महिलाओं की 32 दिन की हड़ताल के बाद में मेन्स्ट्रुएशन लीव की व्यवस्था की थी"। 

"बिहार भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है जो 1992 से महिलाओं को दो दिन का विशेष मासिक धर्म अवकाश प्रदान कर रहा है"। 

एक समाचार के अनुसार

1912 में, कोच्ची (वर्तमान एर्नाकुलम जिला) की तत्कालीन रियासत में स्थित त्रिपुनिथुरा में सरकारी गर्ल्स स्कूल ने छात्रों को उनकी वार्षिक परीक्षा के समय 'पीरियड लीव' लेने की अनुमति दी थी।

2017 में मुंबई की डिजिटल मीडिया कंपनी कल्चर में 1 दिन की पीरियड लीव की शुरुआत की गई। इसके बाद मातृभूमि, फ्लाई माय , जोमैटो, स्विगी आदि ने भी पहल की।

यूनाइटेड किंगडम, चीन, वेल्स, जापान, ताइवान, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, स्पेन और जाम्बिया जैसे देशों में पहले से ही पीरियड्स लीव दी जा रही है।

पिछले साल देश में यह बहस का अहम मुद्दा बना था ,अभी इस पर कोई सही निर्णय नहीं आया है। विचाराधीन चल रहा है। कुछ विचारकों की राय में इससे महिलाओ को कार्यस्थल में काम देने से हिचकेंगे। 

दादी जी

"ऐसी भी सोच नहीं होगी मधुरा बहू यदि सभी पुरुष वर्ग महिलाओं के लिए सोच बदलते है तो आसानी ही होंगी क्योंकि आज के जमाने में अधिकांश सभी के घरों की महिलायें (बहन,बेटी,मां,पत्नी) छोटी-बड़ी जाॅब कर ही रहीं हैं। धीरे-धीरे सभी की सोच में बदलाव होता जायेगा। समाज का निर्माण सभी से मिलकर होता है।

फिर हमने भी तो पुरुष वर्ग को ,ये कहकर दूर रखा ,तुम्हारे काम की चीज नहीं उन्हें कभी संवेदना का अहसास ही नहीं हुआ"। 

शिंजो

"जैसे अपने अभी अमित भैया व सुमित को बोला" हंसते हुए बोली। 

दादी जी

"यही तो मधुरा बहू की बातें सुन मेरा नजरिया बदल गया।अब मैं यही बातें गांव की दूसरी महिलाओं को बताऊंगी।

मधुरा

"मम्मी जी इसमे आपका क्या दोष हम कभी इस विषय पर खुलकर अपने बच्चों से बात ही नहीं कर पाते खुद ही अपराध बोध से जैसे संकुचित हो जाते हैं। पर अब शिक्षा की हवा से व सरकार की पहल से वातावरण बदलाव ले रहा है।

"डॉक्टरों का भी कहना है कि इस समय आराम करना बेहद जरूरी है। इस समय फिजिकल व मेंटल स्ट्रेस का दबाव महिला शरीर के लिए हानिकारक है। एक्टिविटी कम होने से ब्लड लॉस कम होगा क्योंकि इससे रक्त स्त्राव कम होता है "।

आज हर एक चीज को आधुनिकता की होड़ में हम अंधविश्वास का नाम दे देते हैं और इसका भुगतान हमें आगे चलकर चुकाना पड़ता है। महिलाओ की गिरती सेहत का स्तर इस बात का सूचक है।जबकि पहले से रहन-सहन के स्तर का ग्राफ बढ़ा ही है।

मेरे विचार से प्रत्येक महिला को खुद अपने मासिक धर्म चक्र , आत्मज्ञान स्त्रीत्व, स्वभाव ,व्यक्तिगत विकास प्रक्रिया, ऊर्जा व शक्ति को जानने की प्रति जागरूक होना चाहिए। 80 % महिलायें इस से संबंधित समस्याओं से जूझती रहती है। इसकी जानकारी होने से वे गर्भावस्था व रजोनिवृत्ति काल में होने वाली परेशानियों से भी बच सकती हैं। साथ ही पुरुषों को भी ज्ञान होने से उनका अच्छे से सहयोग व देखभाल कर सकते हैं। 

मासिक धर्म के कारण ही महिलाओं में पुरुषों की अपेक्षा अधिक आत्मविश्वास व आत्मसम्मान होता है यह भी शोधन का विषय हो सकता है।

जैसे विश्व पर्यावरण दिवस पृथ्वी के लिए जून में वैसे ही अंतर्राष्ट्रीय मासिक धर्म स्वच्छता दिवस महिलाओं के लिए 28 मई को मनाया जाता है।

दक्षिण भारत के ये उत्सव का रूप अपने-आप में एक आदर्श मिशाल है , कच्ची उम्र में मासिक धर्म के प्रति सकारात्मक भाव पैदा करने के लिए। 

छोटी बच्चियों में अचानक के बदलाव से उसे कोई भय या संकोच का भाव न हो, "ये उत्सव पर्व एक पीढ़ीगत पारम्परिक ज्ञान की अद्भुत पाठशाला हैं " कहना अतिशयोक्ति न होगी।

दक्षिण से अन्य राज्यों को सीख लेते हुए एक स्वस्थ्य परम्परा की शुरुआत की पहल करना चाहिए। वयस्क होते लड़कों को पिता या बड़े भाई व लड़कियों को मां ,भाभी ,बड़ी बहन द्वारा आवश्यक व महत्वपूर्ण विषय की जानकारी सहजता व सरलता से दी जा सकती है।

दादी जी

"मधुरा बहू तुम तो सच में बहुत गुनागर हो आज तो तुमने अपने तर्क-वितर्क से दोनों पीढ़ी मुझे और सिया संजो को बखूबी समझा तथ्यों से अवगत करा दिया। हमेशा खुश और स्वस्थ्य रहो बहुरिया "।

मधुरा

"मां जी सब आप का आशीष है आपने हमेशा नयी बात को अच्छे से सुन-समझ अपनाया।मुझे समझने प्रोत्साहित करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद कह पैर छूती है "।

दादी जी

"तुम्हारी यही बातें मुझे मोह लेतीं हैं ,अब रुलायेगी क्या ? सिर में हाथ रखती हैं।

सिया शिंजो

सिया शिंजो के मन में एक और प्रश्न उठता है मधुरा से पूंछतीं हैं कि

आखिर 28 मई को ही मनाने का क्या कारण है ? इसका भी सम्बन्ध चन्द्र-मास से तो नहीं ?

शेष आगे का भाग कल पढ़ें तर्क-वितर्क के साथ।


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