STORYMIRROR

Anjali Sharma

Tragedy

3  

Anjali Sharma

Tragedy

ज़ख्म

ज़ख्म

1 min
237

ज़ख्म सिलते नहीं 

रिसते हैं कुछ वक़्त 

फिर सूख कर मन को सख्त बना देते हैं।

उस सूखेपन में दरारें उभर आती हैं 

ज़रा सी चोट और ज़ख्म फिर हरा 

दर्द ठीक उस दिन जैसा 

इतने बरस बाद भी

यादें फूट फूट कर बहने लगती हैं 

उन ज़ख्मों से।

ज़ख्म सिलते नहीं 

बस ढक दिए जाते हैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy