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Rajeev Tripathi

Tragedy

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Rajeev Tripathi

Tragedy

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी

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कहाँ से शुरू करें ज़िन्दगी

शुरू कहांँ से होती है

जितना हम जीते हैं ज़िन्दगी

उतनी ही कम होती है

कहांँ से शुरू करें बंदगी इतनी

सरल नहीं होती है

जितना हम करते हैं कोशिश

उतनी ही अधूरी होती है

 कहांँ से शुरू करें ज़िन्दगी

शुरू कहांँ से होती है

जितना हम जीते हैं ज़िन्दगी

उतनी ही कम होती है

होता है अवसाद निरंतर

इसमें कमी कहांँ होती हैं 

पाने को तो बहुत दूर है मंज़िल 

राहे कहाँ सरल होती है

जितना हम जीते हैं ज़िन्दगी

उतनी ही कम होती है

इसका उसका सब का है वह

फ़िर भी कठिन सारे रिश्ते हैं

जो निभ जाए वह भी कठिन

जो ना निभ पाएं वह भी जटिल

कहांँ से शुरू करें ज़िन्दगी

शुरू कहांँ से होती है

जितना हम जीते हैं ज़िन्दगी

उतना ही कम होती है

प्यार और नफ़रत में जंग सी

हर पल होती ही रहती है

ना तुम जीते ना हम हारे

फ़िर से त्याग और समर्पण की

बली होती है

ना तुम हारे ना हम जीते

ज़िन्दगी कहांँ सरल होती है

कहांँ से शुरू करें ज़िन्दगी

शुरू कहाँ से होती है।


 



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