ज़िंदगी के लिये जीना मत भूलो
ज़िंदगी के लिये जीना मत भूलो
हाँ मैं जानती हूँ
मैं इतनी भी अच्छी नहीं हूँ
पर हर बात पर ग़लत ठहराना मुझे
मैं अब इतनी भी बच्ची नहीं हूँ
तुम्हे मुझसे नफ़रत है
पर तुम्हारी वज़ह से ये लड़की अभी टूटी नहीं है
क्योंकि वो छोटी सी अच्छाई जो मुझमें है, वो झूठी नहीं है
गैरों से ज़िन्दगी के कई पाठ पढ़े
इन्ही से दर्द को सहन करना सीखा है
इश्क़-मोहब्बत में इन्हीं ने तो पहले कांटे बिछाये
और हमनें इन्ही काँटो पर चलना सीखा है
जीन्दगी ये तू कितने चेहरे लेकर आई है
हर चेहेर ने मुखोटा पहन रखा है
अरे कल ये ऐसा नहीं था जैसा अब है
आखिर ये क्या हो रहा है
हर इंसान को देखने का नज़रिया बदल गया
अब अपनों और गैरों में अंतर नहीं रहा
कैसा मोड़ आया ए-ज़िन्दगी ये, इसकी तो तूने खबर ही नहीं दी
अरे कुछ तो कह ये क्या हो रहा है
हाँ ज़िन्दगी अब तू भी बदल गयी है
तूने आज भी मेरे साथ सुबह के चाय नहीं पी
अब तेरी-मेरी बातें मिलती ही नहीं
अरे वाह यार! तू भी बदल गयी
अब मैं किससे अपनी बातें करूंगी
किसको अपने आँसू दिखाऊँगी
कौन सँभालेगा अब मुझे, कौन लगाएगा गले
अरे कुछ तो बोल मैं कैसे रहूँगी
नहीं...... रुक ज़रा.......
है अभी भी कोई मेरे पास
हाँ, सब जानते है उन्हें, पर वो सिर्फ़ मेरे हैं
कुछ मेरे यार - दोस्त खास
वो उगता सूरज जिसे मैं अपने राज़ बताऊँगी
वो ओंस की बूंद जिसे देख मैं खुश हो जाऊँगी
वो पत्ते वो फूल जिनपर मैं प्यार लुटाऊँगी
वो सरफिरि हवा, जिसके साथ मैं घूमने जाऊँगी
वो बादल जिसके साथ मैं हसूँगी
वो बारिश की बूंदे , जिनके साथ मैं नाचूँगी
वो चिड़िया जिसके साथ मैं गाने गाऊँगी
और वो चाँद, जिसको कहानी सुना मैं साथ सो जाऊँगी
इतने दोस्त हैं मेरे पास
बस उन्हें में तेरे आने से भूल गयी थी
पर उन्हें मैं याद थी, हाँ याद थी उन्हें मैं
मैं ही थी जो उन्हें भुला तेरे नशे में झूम गयी थी
वो सूरज रोज़ उगता है उसी दिशा से
वो ओंस की बूंद भी पत्तों पर ठहर मेरा इंतज़ार करती है
वो पत्तें, वो फूल मेरे प्यार के ही भूखे है
और वो सरफिरि हवा तो मुझसे रोज़ इज़हार करती है
वो बादल भी मुझे रोज़ ढूँढ़कर नम हो जाता है
वो बारिश की बूँद भी अकेली हो जाती है
वो चिड़िया अब बीच में अक्सर लब्ज़ भूल जाया करती है
और वो चाँद भी मुझे न पाकर अकेला सो जाता है
ऐ-ज़िन्दगी, तेरे लिए में इन सुहाने पलों को भूल गयी
तूने आखिर क्या दिया, कुछ पलों में ही धोखा दे रुला दिया
अरे मेरा उनसे सालों का वास्ता है, सच्चे हैं वो
वो आज भी बाहें फैलाये बैठे है , बेशक मेने उन्हें भूला दिया था
हाँ, ज़िन्दगी से प्यार करना कोई गलत नहीं
पर ज़िन्दगी की कशमकश में उन सुहाने पलों को मत भुलाओ
ये ज़िन्दगी है, इसका काम है परीक्षा लेना
पर इतना ग़ुरूर न करो और अपनों को मत रुलाओ
अपने आस - पास देखो कई कहानियाँ मिलेंगी
किसने कहा - "निर्जीव वस्तु में कोई भावना नहीं होती"
एक कवि की नज़र से देखो, हर वस्तु में एक जीवन बसा है
और वैसे भी स्याही,कलम,और कागज़ बिना एक कवि की भी तो ज़िन्दगी पूरी नहीं होती।
