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Anagha Dongaonkar

Tragedy Classics

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Anagha Dongaonkar

Tragedy Classics

योद्धा

योद्धा

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वह जानती है कि वह कौन है और अकेले कुछ भी करने से नहीं डरती... पहले भी कई बार उसे ऐसा करना पड़ा है।🌸🌸
दरअसल, काले दिनों ने उसे घुटनों के बल ला दिया था और उसे और मज़बूत और बेहतर बनने के लिए मजबूर कर दिया,,🌸🌸
जब उसके पास कोई नहीं था जो उसका साथ दे, उसके साथ खड़ा हो या उसकी मदद करे...,🌸🌸
उसने अपनी ज़िंदगी का ज़्यादातर संघर्ष अकेले ही तय किया है और इस वजह से वह किसी भी चीज़ या किसी भी व्यक्ति का सामना करने से अब नहीं डरती।🌸🌸
आखिरकार उसके पास कभी कोई विकल्प ही नहीं था-
उसने जो रास्ता तय किया है और जो ज़िंदगी जी है, वह संघर्ष की आग में तपकर आज सोना बनी है।🌸🌸
वह उन लोगों में से नहीं है जो कभी शिकायत करेंगे, निराश होंगे या अपने सामने आने वाली कठिनाइयों पर विलाप करेंगे...,🌸🌸
नहीं, वह एक योद्धा की तरह है, जो असफलता की राख से उठी है, एक अजेय फ़ीनिक्स जो नहीं जानती कि हार मानने का क्या मतलब होता है।🌸🌸
वह किसी चुनौती से पीछे नहीं हटेगी या किसी के द्वारा अपमानित नहीं होगी...
।🌸🌸
 सभी के लिए वह और भी ऊँचे मानदंड रखती है
श्रेष्ठता, सम्मान, शिष्टाचार,
इसलिए 

क्योंकि वह सिर्फ़ एक महिला से कहीं बढ़कर है,
वह एक तेज़, भावुक और मज़बूत महिला है जो जानती है कि वह क्या है..
और वह अब खोने से नहीं डरती।
अब उसे पता है कौन अपना है और कौन पराया है। 
अनघा प्रीतम डोनगांवकर




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