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Anagha Dongaonkar

Romance Classics

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Anagha Dongaonkar

Romance Classics

हां मान ती हुं

हां मान ती हुं

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हां मानती हूं हो जाता है प्यार 
जब तुम मुझे मैं तुम्हें जानते तक नहीं थे 
फिर भी हा हो जाता है प्यार ।

मुझे मेरे प्यार को साबित करने की जरूरत ही नहीं पड़ी कभी 
यह मेरी खुशी और सुखद आनंद का एक हिस्सा है 
हां हो जाता है प्यार ।

तुम मुझे स्वीकार करो या अस्वीकार 
मुझे तुमसे है प्यार
 मुझे खुशी देता है यूं तुम्हें प्यार करना 
हां हो जाता है प्यार ।

मैं अपने सपनों की दुनिया में खोई रहती हूं 
ख्वाबों में तुम्हारे प्यार में ना जागे न सोई रहती हूं
 फिर भी अच्छा लगता है तुमसे यू प्यार जताना
 हां हो जाता है प्यार ।

जब मैं तुमसे प्यार करती हूं
 हो जाता है मुझे अपने आप से प्यार
 तुम ही होते हो इस खुशी का राज जो मुझे खुशी दे जाते हो 
हा हो जाता है प्यार ।

ना तुमसे कुछ मांगा 
ना तुमसे कुछ उम्मीद की 
हां यह मेरा प्यार है 
तुम्हारे लिए शाश्वत ,निश्चल और गहरा 
हां हो ही जाता है प्यार 
और
 यह मानने से मैं इनकार नहीं करती हां हो जाता है प्यार।

धीरे-धीरे जाने लगे 
हम एक दूसरे के जज्बात 
समझने लगे हैं 
बिन कहे एक दूसरे के दिल की बात 
तुम्हारी शरारतें आंखों से
 बोल जाते हो कितने गहरे राज 
हां हो जाता है ऐसे ही प्यार।
Anaghajain 
©®
१२/६/ २३


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