STORYMIRROR

Atiendriya Verma

Romance

4  

Atiendriya Verma

Romance

यही वो रात है

यही वो रात है

1 min
437

उन्होंने हम से मुस्कुराते हुए पूछा कि 

क्या हुआ है 

हमनें भी हंसकर कहा 

कुछ नहीं हुआ है 

उन्होंने पूछा कि खुला 

आसमान ये चांद ये सितारे 

क्यों पसंद है तुमको 

हमने फिर मुस्कुराते हुए कहा 

ये चांदनी की रोशनी 

तेरे नूर को बढ़ाती है 

ये सितारे तेरे झुमकों की 

रोशनी को बढाते है 

ये आसमान तेरी घनी

ज़ुल्फों को और घना 

कर देता है 

ये जो प्यार तुम मुझसे करती हो 

ये मुझे बेकरार करता है 

ये जो मुस्कान तुम्हारे चहरे पे आति है 

जब तुम मुझे देखती हो 

ये पलके जब झुक के फिर उठकर 

जब देखती है 

मानो चांदनी और बादल लुका छुपी का खेल खेल रहे हो 

ये रात जो तेरे साथ गुजर रही है 

इस रात की सुबह न हो 

इस रात तेरी बाहों में फना हो जाऊँ

तेरी इन आंखों में ढल जाऊँ 

ये रात कभी खतम न हो

यूं ही तेरे चहरे के सामने आती लट को पीछे करता रहूँ 

तुझे बस यूँ ही देखता रहूँ 

तू मुझसे दूर न हो 

यही मेरी आखरी ख्वाहिश 

यही वो रात है जिसके ख्वाब हम देखा करते थे 

यही वो रात है.


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance