STORYMIRROR

Atiendriya Verma

Abstract Classics Inspirational

4  

Atiendriya Verma

Abstract Classics Inspirational

थोड़ा बहुत

थोड़ा बहुत

1 min
347

थोड़ा बहुत

वक्त अपने लिए भी निकाल लिया करो

अपने ऊपर भी ध्यान दिया करो 

थोड़ा बहुत 

अपने बारे में भी सोच लिया करो


यूं जिंदगी की भाग दौड़ में खुद को कब तक खोते रहोगे 

क्यों जिंदगी के इन बेढंगे सवालों में अपनी खुशियों को ढूंढते रहोगे 

क्यों इन रिश्तों के सवालों में की कोन तेरा कोन मेरा 

क्यों इन रिश्तों की पहेलियां में खुद की आवाज को दबा रहे हो

क्यों तुम खुद से दूर भाग रहे हो 


क्यों अपने आप को अपनी ही बेडियो से बांध रहे हो

क्यों कुछ पल आईने में खुद को देख मुस्कुराते नहीं हो

क्यों जिंदगी की हर उलझन में खुद को उलझा रहे हो

क्यों जिंदगी के इस इम्तहान में अपनी परछाई से भी डर रहे हो


क्यों किसी के जाने से खुद को शोक में डुबाते हो 

जिसे जाना था वो एक बात के लिए चला गया 

जिसे नहीं जाना था वो एक बात के लिए रुक गया 

क्यों व्यर्थ में खुद को तुम गुमनाम करते हो

जिंदगी में इंतजार तेरा कोई कर रहा होगा 


पलकें बिछाए तेरे नाम का सुर गा रहा होगा 

तू उठ खड़ा होजा उसकी तलाश से पहले खुद की तलाश में लग जा

जो हीरा कभी तू बना चाहता था

वो हीरा तू बनके दिखायेगा 


थोड़ा वक्त अपने लिए भी निकाल लिया कर 

थोड़ा प्यार खुद से भी कर लिया कर।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract