यह सूखे होंठ समंदर की मेहरबानी
यह सूखे होंठ समंदर की मेहरबानी
ये सूखे होंठ समंदर की मेहरबानी है।
जो मेरी प्यास बुझा दे कहां वो पानी है।
वह खेलता है समंदर की लहर में लेकिन।
हां मगर प्यास की उस की अजब कहानी है ।
वह अपने लहजे को शायद बदल नहीं पाया।
नई शराब है बोतल मगर पुरानी है।
ज़ुल्म सहना भी ज़ालिम की तरफदारी है।
मुझे तो लगता है खामोशियां बेमानी है।
वह अपनी जात में एकता है मेरा मालिक है।
वहदहू ला शरीक उसका कौन सानी है।
हमारी आंख से नींदे भी रूठ कर अब तो।
चली गई है तुम्हें बात यह बतानी है।
किसे सुनाते हम, हाले दिल तुम्हारे सिवा।
दफन है सीने में पुर दर्द जो कहानी है।
वह समझ जायेगा इस दिल की बेक़रारी को।
हां मगर सच है यही बात तो छुपानी है।
रास्ते प्यार के, हम मानते हैं मुश्किल है।
ताल्लुकात तो हर हाल में निभानी है।
"सगी़र" छोड़ गया, उसको याद क्या करना।
न इंतजार है, आंखों में अब न पानी है।

