ये लड़कियाँ
ये लड़कियाँ
बिन मन्नतों, कोख में आ जाती हैं
माँ बाप के लिए जान हथेली रख
घर-आँगन की रौनक़ बन,
सूना भी कर जाती हैं
दम्भ भर गगन को छू आती हैं
हर क्षेत्र में नाम स्वर्ण
अक्षरों में लिखवाती हैं
ये लड़कियाँ ही हैं साहब
वक़्त पर स्वरक्षक व
मार्गदर्शक खुद बन जाती हैं।
