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Abasaheb Mhaske

Action

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Abasaheb Mhaske

Action

कम से कम हमें जीने तो दो

कम से कम हमें जीने तो दो

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इधर के ना उधर के

लगता भी नहीं दिखाएंगे

तुम कभी सुधर के


तुम तो ठैरे हरपनमौला

उसके होंगे ना किसके

झूठ भरा हैं ठुसके- ठुसके


परिवार हैं ना कोई मकान

तुम खुद हो पुडियो की

चलती- फिरती दुकान


जिसके थे उसके नहीं हुए

हमारे क्या खाक होंगे ?

तुम तो पनौती, हम सब राख़ होंगे


बड़ी-बड़ी बातें तुम्हारी लुभानेवाली

उसके विपरीत व्यवहार तुम्हारा

क्या खोवोगे तुम, जो नहीं था तुम्हारा


बस भी करो यार उल्लू बनाना

झूठे मुंगेरीलाली सपने दिखाना

कम से कम हमें जीने तो दो।


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