STORYMIRROR

Abasaheb Mhaske

Tragedy Action

3  

Abasaheb Mhaske

Tragedy Action

वापस चलो रे आगे बहुत खतरा हैं

वापस चलो रे आगे बहुत खतरा हैं

1 min
220

वापस चलो रे आगे बहुत खतरा हैं

कुछ नहीं यार ये तो केवल मोह माया

कुछ करो या ना करो बली का बकरा हैं

ऐसा कोई सगा नहीं जिसको उसने ठगा नहीं


हमसे तो जानवर अच्छा माना अक्ल उसको कम हैं

मगर वो न सगों का खून चूसता हैं ना खा जाता हैं

हम तो जहरीले बन चुके हैं अपनी ही कौम को खा रहे

पशु पक्षी पेड़ पौधों को , खनिज संपत्ति को नष्ट कर रहे हैं


हमसे तो पालतू जानवर ईमानदार हैं बेहतर हैं

जिस मालिक का खाते हैं उन्हीं को प्यार देते हैं

और हम स्वार्थी दल बदलू खूंखार रक्त पिपासु

मानवता का धर्म सब कुछ भूल चुके हैं कसम से


वापस चलो यार आगे बहुत हैं दिक्कतें

फिर से मोगली बन जाते हैं जंगल में

हंसी खुशी जीवन बिताते हैं उन सबके बीच

रहकर दोहराते हैं जीवों और जीने दो बड़े प्यार से


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy