STORYMIRROR

Dr J P Baghel

Action

4  

Dr J P Baghel

Action

जाग अरे !

जाग अरे !

1 min
166

जाग अरे..

    रचनाकार : डॉ जे पी बघेल, मुंबई


दिख रहे समय की आहट में 

बरबादी के आसार मुझे, 

वे दिखा रहे हैं सपनों में, 

रंगीनी और बहार तुझे ! 


चल रहे कहीं पर तीर 

इशारे किए जा रहे और कहीं 

सहमी घबराई मानवता, 

मिलता न सुरक्षित ठौर कहीं

कर रही धर्म का नशा कराकर

संज्ञहीन सरकार तुझे !


जब भी तूने रोटी मांगी 

कह दिया उन्होंने राम रटो

हिस्से की बात उठाई तो 

धकियाया कहकर दूर हटो 

जब उठी गले में चीख एक 

तो बता दिया गद्दार तुझे !


डर और वंदनाएं उनकी 

स्वर चौतरफा उनकी जय के 

जग उठा दम्भ, नारे उछले,

बन गए घोर वाहक भय के 

उठते दिख रहे गुलामी के 

फिर से घनघोर गुबार मुझे !


हर और प्रचार झूठ का है 

सच बुरी तरह आतंकित है 

हे युवक, देख ! हो सावधान !

तू ही अब अधिक प्रवंचित है 

सुन, मिला हुआ है संविधान में 

जीने का अधिकार तुझे !


तुझको असमर्थ बनाने की 

उनकी कोशिश है, जाग अरे !

चल, हुआ जरूरी आज 

लगा उन षड्यंत्रों में आग अरे !

अब चूका तो फिर नहीं मिलेगा 

अवसर अगली बार तुझे !


वे दिखा रहे हैं सपनों में

रंगीनी और बहार तुझे,

दिख रहे समय की आहट में 

बरबादी के आसार मुझे ! 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Action