ये भी तो हमें सताना हुआ ना!
ये भी तो हमें सताना हुआ ना!
खुद से कुछ बात किये हुए अरसा हुआ हमें,
उसकी यादों का आना एक जलसा लगा हमें !
गुज़रे हुए तो उसकी गली से ज़माना हुआ हमें,
लेकिन देखो किस तईं लौटकर आना हुआ हमें !
रहते थे ज़ब साथ यूँ कि अलग देख कर कहीं,
देखता ही न था कोई जाना पहचाना हुआ हमें !
उससे और उमीद और कहाँ तक करें कि जो,
ख़ुद ही बेसहारा है देने मुहाल सहारा हुआ हमें !
ये किसने तुलसी के पास दिये को जला दिया,
चुपके से शाम उसको छत पे बुलाना हुआ हमें !
हमको तो यूँ भी उसको मनाना बेहद ही पसंद है,
ऐसे में नाराज़ उसका होना एक बहाना हुआ हमें !
हाँ और हूँ में देने लगा है वो हर बात का जवाब,
बताओ,ये भी तो इक तरह से सताना हुआ हमें !
उनकी ग़ज़लों में मुसहफ़ी का घराना है मुस्तनद,
इस फ़न में समझा जाता है बड़ा ही माना हुआ हमें !
बातों का उसकी वैसे भी रस खूब रहे है आजकल,
तिस पर भी वो पेश करता है कुछ छाना हुआ हमें !

