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V. Aaradhyaa

Romance

4  

V. Aaradhyaa

Romance

ये भी तो हमें सताना हुआ ना!

ये भी तो हमें सताना हुआ ना!

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4

खुद से कुछ बात किये हुए अरसा हुआ हमें,

उसकी यादों का आना एक जलसा लगा हमें !


गुज़रे हुए तो उसकी गली से ज़माना हुआ हमें,

लेकिन देखो किस तईं लौटकर आना हुआ हमें !


रहते थे ज़ब साथ यूँ कि अलग देख कर कहीं,

देखता ही न था कोई जाना पहचाना हुआ हमें !


उससे और उमीद और कहाँ तक करें कि जो,

ख़ुद ही बेसहारा है देने मुहाल सहारा हुआ हमें !


ये किसने तुलसी के पास दिये को जला दिया,

चुपके से शाम उसको छत पे बुलाना हुआ हमें !


हमको तो यूँ भी उसको मनाना बेहद ही पसंद है,

ऐसे में नाराज़ उसका होना एक बहाना हुआ हमें !


हाँ और हूँ में देने लगा है वो हर बात का जवाब,

बताओ,ये भी तो इक तरह से सताना हुआ हमें !


उनकी ग़ज़लों में मुसहफ़ी का घराना है मुस्तनद,

इस फ़न में समझा जाता है बड़ा ही माना हुआ हमें !


बातों का उसकी वैसे भी रस खूब रहे है आजकल,

तिस पर भी वो पेश करता है कुछ छाना हुआ हमें !


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