यादें बीते दिन की
यादें बीते दिन की
यादें बीते दिन की
बचपन की वो यादे
कुछ ऐसी होती हैं
जो भूले ना भूलाए जाए
आज भी वो यादे -याद आती है।
जब सब मिल जुल कर गलियो में खेला करते थे।
आस -पडोसी के बच्चे मिल कर
एक दूसरे के साथ मस्ती किया करते थे।
टीवी चैनल शो देखने के लिए
सारे एक ही घर में जा कर
टीवी देखा करते थे।
एक -दूसरे के घर जा कर सो जाया करते थे।
वो बचपन की यादें याद आती हैं।
पहले पड़ोस के घर भी अपने घर से हुआ करते थे
ना कोई रोक ना कोई टोक
एक रिश्ते में सब बंधे ना होने पर भी
एक परिवार जैसा खूबसूरत प्यारा रिश्ता था।
बस अपनी मस्ती में मस्त रहते थे।
दोस्त हो या पड़ोसी सभी एक परिवार सा लगता था।
वो बचपन आज भी याद आता है।
