STORYMIRROR

Pandav Kumar

Romance Fantasy

4  

Pandav Kumar

Romance Fantasy

याद

याद

1 min
201

शहरी भीड़ से दूर जा रही होगी

उसे मेरी याद आ रही होगी


 टहलते हुए मुस्कुरा रही होगी

उसे मेरी बात याद आ रही होगी


बारिशों में खुश हो रही होगी

बूंदों से मेरा एहसास कर रही होगी


दिनभर बहुत खुश रही होगी

रात में अकेलापन सता रही होगी


ये दूरियां अब बर्दाश्त नहीं होता

फासले कम करने की कोशिश कर रही होगी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance