STORYMIRROR

Pandav Kumar

Others

2  

Pandav Kumar

Others

फिर से

फिर से

1 min
157

मोहब्बत हो गई है फिर से या

शायद खुद गिरने चला हूं

पछताया बहुत था, पर

शायद गम भरने चला हूं


इश्क़ में दिल के टुकड़े हुए हजार

पर फिर से चांद को पाने चला हूं

रोया तो बहुत था, पर

शायद फिर से हंसने चला हूं


Rate this content
Log in