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P Anurag Puri

Romance

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P Anurag Puri

Romance

याद आती है यादों की

याद आती है यादों की

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रहे दूरियाँ तो क्या हुआ

याद नज़रों से नहीं, दिल से किया जाता है !

मेरी यादों की कश्ती उस समुन्दर में तैरती है,

जहाँ पानी सिर्फ और सिर्फ मेरी पलकों का होता है !

न चाहकर भी मेरे लब पर फ़रियाद आ जाती है,

ऐ चाँद सामने न आ किसीकी याद आ जाती है !


कुछ तो बता ए उदास शाम,

भुलाने वाले को किस तरह याद आऊँ  !

कितने अजीब इंसान है तेरी दुनिया में ऐ खुदा,

शौक ऐ मोहब्बत भी रखते है

और याद तक नहीं करते !


तारे भी जमीन पर रात को उतरते है,

ख्वाब हमारे तेरी याद में बिखरते है !

ये वो बरसात है जिसका कोई मौसम नहीं होता,

टपक पड़ते है आँसू जब किसी की याद आती है !


रंग तेरी यादों का उतर न पाया अब तक,

लाख बार खुद को आँसुओं से धोया हमने !

दो जवाँ दिलों का ग़म दूरियाँ समझती हैं,

कौन याद करता है हिचकियाँ समझती हैं !


यादें बनकर जो रहते हो साथ मेरे,

तेरे इतने अहसान का सौ बार शुक्रिया !

हर सुबह यही सोचता हूँ की

बहने न दूंगा मेरे आंसुओं को,

रात होती है,

ख्वाब आते है और मैं हार जाता हूँ !


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